बुधवार, 28 अगस्त 2013

डोल

नमस्कार!

का हालिचालि बा आजु अस्टिमी भूखल बानी की नाहीं? भादो के अस्टिमी आ कातिक के एकादसी सबहर ब्रत ह. माने सब सेयान लोग भूखेला. गांव में अस्टिमी के डोल रखाला. बाद में जनलीं की दोलनोत्सव के भोजपुरी रूप डोल ह. अब बहुत जगह डॉल मेला भी लागेला.

रामनवमी से ढेर लोग भादो के अस्टिमी भूखेला. रामनवमी की समय खेतीबारी के काम बहुत रहेला. एतनी घरी खेती के काम कम होला पहिले की जमाना में भोजन के संकट भी रहे. विज्ञान के जय हो कि एइसन एइसन धान गेंहू के बीया उपरवलसि की अन्न के संकट दूर हो गईल. ्कांकरि, खीरा, अमरुत, फूट फल मिलेला. बहुत लोग निर्जला रहे ला. आज के खास प्रसाद ह पन्जीरी (घन्जीरी) धनिया भून के पीस के चीनी पीस के मिला के प्रसाद बनि जाला.

हमरि गांव मे सन साठ पैंसठि की आस पास गांव की बीच में सियाराम दूबे की दुआर पर डोल रखा्त रहे. गांव भर से भेर (चंदा) लिआई. गांव भर के लोग राति के जुटि के बारह बजे ले कीर्तन गाई. ओतनी घरी हमनी का ई जानल जा कि बारह बजे अपने से खीरा फाटि जाला आ भगवान जी बाहर आ जाले.

अब त गांव में कई जगह डोल धराला ठीको बा . सब लोग एक जगह जुटि भी ना पाई.

ई के हऊएं. इनिके कांहे लोग पूजेला. कांहे दिवाना भईल बा लोग. आजु २०१३ माने एकईसवी शताब्दी के दूसरा दसक चलता. विक्रमी सम्वत के २०७० चलता. भारत में कृष्ण लोक मे रमल बाने. धार्मिक कर्मकान्ड से लेके मार्मिक विरह गीत ले कृष्ण छवले बाने. जे जवना रूप में चाहल  ओही रूप में पावल. नाचत, गावत, युद्ध करत , साहित्य आ कला क्षेत्र के प्रिय आ वरेण्य हुऊएं देवकी नन्दन, यशोदा नन्दन, केतना त कथा बा कौन कौन गाईं.

जे धर्म मानत होखे, ओकर भगवान हऊए, जे अनीश्वर वादी होखे ओकर आदर्श समाज सेवक हऊएं. धार्मिक कर्मकांड रोकि के गोबर्धन पूजे वाला कृष्ण, योगेश्वर , नटवर नागर, अभूतपूर्व राजनयिक. बिना राजपाट के  चक्रवर्ती स्म्राट बनावे वाला कृष्ण. जे जे उनुके जवना रूप में देखल चाहे सबके हऊएं. एइसन महान व्यक्तित्व वाला के जन्मदिन पर उनुकी व्यक्तित्व से कुछु सीखल जा सकेला.

आपन रोग पाप जे दीहल चाहे दे सकेला. मानसिक शान्ति पावल चाहे त पा सकेला. राजनय सीखल चाहे त सिख सकेला.

जवना काम से दूसरे के हित होखे आपन हित होखे. समाज के हित होखे, मानवता के हित होखे ओ काम करबि त ओइजू कृष्ण खडा होके सहायक हो जईहे. काम करेवाला के आत्मविश्वास हऊए कृष्ण.

सभे सुखी रहे, सब निरोग रहे, सबके शुभ होखे. केहू दुख में न रहे.





सोमवार, 26 अगस्त 2013

भदवारी में बैठे ठाले-१

नमस्कार!
हालचाल ठीक बा सावन की सूखा की बाद भादो टिपटिपाता. निमने बा सवनसुख निमन बाकी भदवसुख ना निमन. कई गो भाषा कहीं चाहॅ बोली कही मरले की कगार पर बा. लोग बचावे खाती हलचलि कईले बा. भोजपुरियो के इहे दशा रहल ह. ई बोली पिछडन के मानलि जाले. कुछु लोग जागल आ विश्व भोजपुरी सम्मेलन के आयोजन होखे लागल पहिला सम्मेलन देउरिये में भईल. एगो पत्रिको निकलेले एके बेर देखले बानी. नीक लागल बाकि ओकर नियमित ग्राहक ना बनि पवली. एक दिन देखलीं कि विकिपीडिया पर भोजपुरी बा. आ मांग होता कि एके संविधान की ओर से भी मान लिहल जाउ. देखी का होला.

आजु काल्हि लोग पश्चिमी संस्कृति के गरिया गरिया के अपनावत चलि जाता. बलात्कार आ सामूहिक बलात्कार अब खबर में छपाये लागल त लोग घबराये लागल. बाकी का का करता ओके ठीके मानेला. आखिर ई संस्कृति का ह पूरब की संसकृति में सचहूं कुछु बा ?. रेडियो, टीवी, सिनेमा के दोष दीहल जाई त ऊ लोग कही हमार कौन दोष हम त ऊहे देखाव तानी जवन होला. का सचहू इहे बाति बा. कपडा के बाति होई त लोग कहे लागी कि ई अधिकार के बाति ह जेकरा जवन मन करे तवन पहिने. ई सोचे वाली बाति बा कि आखिर पूरा देश एतना कामुक काहे हो गईल बा .
            ''कलिकाल बिहाल किये मनुजा , नहिं मानत क्वौ अनुजा तनुजा,'' -रामचरित मानस उ.का.१०६-५

लोग अपनी मन के ही कईल चाहता ओकरा ना समाज से डर बा ना कानून से,  ्नैतिकता (धर्म) के के पुछेला. भारत की संयुक्त परिवार की घर में मजाक बहुत होला ई सब मजाक मर्द मेहरारू की सम्बन्ध पर होला. देवर भाभी , जीजा साली ना जाने और कौन कौन. गांव के गांव, तहसील के तहसील, जिला के जिला, प्रदेश के प्रदेश अब त देश के देश के लोग बहनोई साला की रिश्ता की नाम पर जौन जौन बाति कहत रहत ओके सुनि के का होई.

भोजपुरी गाना में अब खाली नंगई चलत बा. जौना सडक से चलि जाई गुजरे वाली हर महिला की ऊपर द्विअर्थी आवाज सुने के मिलि जाइ. ई हे भारतीय संस्कृति ह. आकि एके अगरेज बढावा देले बाडे स.

कपडा भी हर समय आ परिवेश आ मौसम की अनुसार पहिरल जाला. कपडा भी मनोभव आ रस के स्रिजन करेला. सुते कि समय के कपडा कचहरी के कपडा खेलि के कपडा अलग होला. अब सब महिला लोग हरदम नचनिया के कपडा पहिरे लागे. सुतेवाला कपडा पहिन के लोग स्कूल आ आफिस जाये लागे त कु्छु गडबड होई.

हमरी कहले के मतलब ई बा कि चारुओर जब कामुकता के वातावरण बनावल जाइ त ओकर प्रभाव होई. ई प्रभाव तब देखे के मिली जब कहीं भी अपराधी का ई लागे लागि कि उ सफल हो जाई.

एकरी खातिर सभ्य समाज का चाही कि ए तरह की स्थिति में योगदान करे वाला सब कारक के पहिचान कके ओके सुधारे के उपाइ कईल जा. न्याय प्रणाली के दारोमदार पलिस ,वकील आ जज लोग पर बा ऊ लोग मन से रकल चाहि तबे ई रुकि.

त वस्तुनिष्ठ विचार कईल जा आ सुधार के प्रयास कईल जा आ अपनी व्यव्हार पर ध्यान दीहल जा कि हमसे कौन कवन गलती होता आ ओके कैसे सुधारल जा सके ला.

फेरू भेंट होई.

नमस्कार!

बुधवार, 15 मई 2013

संघे लागल लंगडो देवालि फानेली

संघे लागल लंगडो देवालि फानेली

नमस्कार! 


हालिचालि त सब ठीके बा . बाकी जहिया से सुनले बानी कि दिल्ली विश्व्विद्यालय में चारि सालि के बीए आठ सेमेस्टर  में पूरा होई तहिये से भोजपुरी के कहावत मने में घूमता. माननीय प्रणव जी जहिया से राष्ट्रपति भईल बानी उच्चशिक्षा पर चिंतित बानी .( इहे चिन्ता उहांका वित्तमन्त्री रहते हुये कईले रहिती त ई हालि ना भईल रहित.)  उहां का उच्चशिक्षा की गुणवत्ता खातिर चिन्तित बानी एसे दिल्ली के कुलपति जी हार्वर्ड आ स्टेन्फोर्ड  इनवरसिटी की नकल पर  पाठ्यक्रम  बना के लागू करावतानी. जेकरी लगे पावर रहेला ओकर बाति जल्दी केहू काटेला नाही. त सब कुछु पास ओस हो गईल . अब लईका लोग पढि के निकलते नोबुल प्राइज मारि देई लोग.

किताब, मास्टर, कलास, हास्टल आ औरु कुल पढावे खातिर जरूरी सामान ,लाइब्रेरी, लैबोरेटरी आ मेज कुर्सी के कौनो जरूरत नईखे. लईका लोग दिल्ली में नाव लिखवा के मुखर्जी नगर आ ढाकागांव में बनाई खाई आ सेमेस्टर में तड से बाजी मारि ले जाई. अब ई बूझि ली कि सब कलक्टर  आ एस्पी दिल्ली के होइहे. जौनिगा इन्डिया शाइनिंग हो गईल ओहींगा भारत निर्माण हो जाई. आपरेशन ब्लैकबोर्ड के नाव त सुनलि ही होखबि सभे, आरे उहे राजीव गान्धी वाला जौना समय रूपया में दस पैसा गांव में पहुंचे. त ऊ आपरेशन कच्चा निकलल त सर्व शिक्षा अभियान चलल ओकरि खातिर ना त कमरा बा ना मास्टर. तले झट देना आरटीई आ गईल.


एकर माने ई भईल की जे अपनी लईका के ना पढाई ओही के दोष. आन्ही मान्ही दोष. एहू में पचीस परसेन्ट रिजरवेशन बा. आ हालि ईबा कि दिल्ली में गार्जीयन लोग के नाव लिखववला में नानी याद आ जाता. जे तनिको हुशियार बा उ एके लईका की बाद नसबन्दी करा लेता. आ देहात के हालि जाने के होखे त सरकारी रिपोट पढि लेई. कुल मिलाके हम ई कहल चाहत बानी कि पहिले प्राथमिक शिक्षा के गुणवत्ता, माध्यमिक शिक्षा के गुणवत्ता बढा ली सभे तब ओकरिये साथे उच्चशिक्षा के भी मानक ठीक क लेई सभे.

खाली लन्दन आ अमेरिका मति देखी रूस, चीन आ जापान के भी देखेके चाही. एकरी आधार पर अपनी देश के आपन नीति बनाई. जईसन सन्सद चली ओहींगा स्कूल चली. रूपया देके जे मास्टर, प्रोफेसर, प्रिंसिपल आ कुलपति  बनी ऊ का पढाई. इन्तिहान में नकल, सिफारिस आ पईसा पर नम्बर, चमचागीरि में टपौवल. इहे भारत के गुणवत्ता हो गईल बा. त पहिले संसद के गुण्वत्ता सुधरो. यूजीसी के पर्सेन्टेज बन्द होखे. वस्तुनिष्ठ चयन होखे त देखी का से का हो जाता.

त पहिले आपन गोड बरियार कईला के जरूरति बा फेरू कूदी सबसे ऊंचे कूदीं.

फरू भेंट होई..

नमस्कार!















मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

परमेसर काका

नमस्कार!

काल्हि जब भागलपुर की मसान घाट पर राजा दशरथ के आगि देबेवाला की खातिर आगि मंगाए लागल त परमेसर काका की जिनिगी के सब दृश्य आखी में नाचे लागल. परमेसर काका गाँव की रामलीला में डोम बनें. उनुकी जईसन डोम के अभिनय कहू दूसर ना क पावे दूसर केहू डोम बनलो ना चाहे. परमेसर काका उ सब काम करके तैयार हो जा जेकरी खातिर कहू तैयार ना होखे.

परमेसर काका कोआपरेटिव बैंक में चपरासी की पद पर रहले. हमरी घर आ बाबू जी में उनुकर जान बसे. हम जब सलेमपुर में बाबूजी की साथे छव में पढ़े गईलीं त उहे भोजन बनावें . भोजन बनावेके उनुका  ना आवे बाक़ी  जवान सामने काम बा ओके करेके बा त उ करे के तैयार रहें.

गाँव में हम जबले फगुआ देखलीं टेबल इहे लागे की पूरा गाँव से उ अकेले फगुआ खेलें . उनुकी फगुआ के अलग तरीका रहे ऊ सबकी मूंड़ी में एक पुड़ियाँ गुलाबी रंग धीरे से डाली दें फेरु दूसरे से कही दें की उनुकी कपारे में पानी डालि दे.

जब कौनों समारोह होखे त सबसे अधिक हल्ला करेवाला सबके काम पर लगावेवाला आ सबसे अधिक काम करेवाला उहे रहें.

पूरा गाँव के सहयोगी परमेसर काका तीन दिसंबर २०१२ के शरीर त्याग के मुक्ति पा गईलें।

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

गाँधी की गाल पर थपरा.

नमस्कार!
हालिचालि ठीक बानू.

काल्हि से टीवी गरमाइल बा थपरा पर. एगो सरदार जी थपरा से सुखराम के मरलें, फेरु काल्हि पवार के मारि दिहलें. लोकतंत्र में थपरा के कौन काम. गाँधी जी कहले रहलें कि केहू एगो गाल पर थपरा मारे त दुसरका गाल आगे क देबे के चाहीं. कांग्रेसी लोग गाँधी जी के वारिस मानेला लोग बाकिर अपना के गांधीवादी ना मानेला. जे एलोगन के करिया झंडा ले देखा देला ओके पीटबो करेला लोग आ पिटवईबो  करेला. सरदार जी खूब पीटईले जेल गईलें, अब मुकदमा लडीहें. सब पार्टी निंदा करता. जे ना करी ऊ पिछुआ जाई. बेचारे अन्ना घेराइल बाने. पवार जी कुर्सी खातिर कांग्रेस छोडि दिहलें ,कुर्सी खातिर सहयोगी की रूप में काग्रेस की साथे बाने. सहयोगी दल वीआईपी होला. त ई राष्ट्रवादी कांग्रेस के लोग अब आपन  ताकत देखावे खातिर आम जनता के जीवन त्रस्त करीलोग. पवार जी अन्ना की बयान पर कहलें ह की ई नया गांधीवाद ह. अन्ना जी अब केहू के वाद वाला नईखे लोग कहता मैं अन्ना हूँ.

आजु से खुदरा व्यापार में विदेशी कंपनी कूदी . केंद्र के गांधीवादी सरकार के मंत्री लोग मंजूरी देदी. स्वदेशी की जगह विदेशी. गांधी जी भी भारत के वसुधैव कुटुम्बकम नारा जानत होइहन बाक़ी स्वदेशी के नारा काहे दिहलन. काहे कि देश की आजादी आ अर्थ व्यवस्था खातिर ई जरूरी रहे. जवाहर जी समाजवाद आ सहकारिता की बल पर देश के आगे बढावल चाहत रहलें. भ्रष्टाचार सब खा घललसी. भ्रष्टाचार के उपेक्षा कईल  बहुत महंग परल. आजु फेरु विदेशी आके घरेलू व्यापार करिहें. आ इहा से मुनाफ़ा लेके अपनी घरे जईहें. ई असल में गाँधी की गाल पर थपरा बा. के धराई. के के जेल भेजल जाई?

कबो हम छोटका दर्जा में कृषि विज्ञान की किताब में गेहू धरे खातिर अमेरिका की सेलो के फोटो देखले रहलीं आ ओकर लाभ पढले रहलीं. लेकिन भारत के योजनाकार लोग जेतना के गेहूँ सड़ा देला ओतना में सेलो बना दीत त अनाज सुरक्षित रहित. खेत से सब्जी घर तक पहुचत पहुचत एक चौथाई से अधिका सरि जाता. ओके बढ़िया उपाइ नईखे. आज सहकारिता के भ्रष्टाचार से बचावल गईल रहित त जवानीगा अमूल भारत आ सहकारिता के  शान बनिके खड़ा बा ओहींगा गृहस्थी के  हर सामान उचित मूल्य पर मिलित. अब्बो समय बा सहकारिता की बल पर विदेशी परचूनिहा लुटेरन से बचावल जा सकेला. 

वदेशी निवेश की नाम पर  देश बिकाता आ देश के काला धन विदेश के चमकावता, बाक़ी कांग्रेस की राहुल के गुस्सा नईखे आवत, ऊ आके यूपी की जनता के धमका जाताने. 

देश के मंत्री लोग ई फैसला लेके गाँधी जी की गाल पर थपरा मरले बा लोग. बाक़ी गांधी जी त आपन दूसरा गाल आगे क दीहे.



शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011

काका के कंदील

नमस्कार ! 
हालचाल ठीक बानू...


दिया दियारी बीति गईल. आजू गोधनो कुटा गईल. आजु से पीडिया  लागि जाई. कई गो तिहवार ऐसन होले स जवना के समझल कुछु कठिन होला.ओही में गोधना अ पीडिया ह. चली अबहीं त बाति काका के कंदील के बा. ई बाति तबके ह जब हम बिजुली की बारे जानतो ना रहनी. दिया दियारी कि दू  दिन पहिले घर दुआर के खूब सफाई शुरू होजा. एक दिन पहिले घूरा पर जम के दिया निकाल दिहल जा. दिया दियारी की दीने सवेरे कोहार दिया लेके आवें. दया की साथे घंटी (घाँटी ) जांत, भरुका, चौभरुका भी किना जा .उपरी बेरा ( तिजहरिया) दिया के पानी में भेंके निकाल के पीढ़ा पर उलटा ध दीहल जा. माई बतिहर बनावें. तेलिन तेल लेके आवें  टीसी के तेल दिया खाती आ कडू (सरसों) के तेल तरकारी खातिर डालडा तब मिलल शुरू हो गई रहे जे करा गाई भईस रहे ओकरा घीव रहे बाकी लोग तीसी की तेल में पूड़ी बनादे.  
ज्यों किरिन डूबे  कनिया तुलसी जी के दिया बारी दें. ओकरी बाद थरिया में दीया लेके चारू ओर धराए लागे. थोद्की सा पुरनका माटी के घर के याद बा जवना में ओसारा में नीचे दिया धरा जा. नाद खूंटा सब पर दीया धरा जा . लईका माटी के घाँटी बजावत अपनी अपनी घर के दीया के रखवारी पर जुटी जा. कुछु लईका  मौक़ा पावते दूसरा की दुवार से दिया उठा के अपनी दुआर पर राखी दें. थोड़े देर खूब अन्हार होजा आसब लोग खाए की तैयारी में लागि जा. विशिष्ट व्यंजन गर काटना ओल के चोखा आ बरी बारा.होगईल दिवाली. लोग खुश दिया जरी गईल केकरा केतना दीया किनाइल  आ केतना तेल लागल एकर लेखा दूसरे दीने होखे.


दिवाली की बिहान भईला खूब सबेरे उठिके अपनी दीया की साथ साथ  दूसरों की दुआर से लोग दीया उठाले. फेरु दीया के पानी में भेंके  छेदनी से छेदी के तरजूई बने आ जांत तरजूई के खेली आ झगरा,झोंटा झोटवुअली होखे.


दिवाली आवे की साथ काका कंदील बनावे की तैयारी में लागि जासु लारी की बाजार से झिलझिलवा रंगीन कागज आ रस्सी आवे. बॉस के कमची चाहे कंडा लेके नाप नापी के काताल जा नीचे दफ्ती लागे आ पिसान की लेई से लकड़ी की ढांचा पर  झिलझिलवा रंगीन कागज़ साटी के सुखा के  धरा जा फेरू खूब बडहन बांस काटी के साजी के ऊपर एगो घिरनी बन्हा. अब बॉस के खूब गहीर गड़हा खोनिके गाड़ी के घिरनी की सहारे कंदील के ऊपर चढ़ा दीहल जा. काका राती खा  ढेबरी में माटी के तेल भरिके ओके ज़रा के  कंदील के नीचे उतारी के दफ्ती पर ढेबरी धके धीरे धीरे कंदील के ऊपर चढ़ा दे.  


कंदील ( आकाश दीप ) नीचे सचहूँ आकाश दीप बुझा. गाँव के कई लोग कंदील बनावे .सब चाहे कि ओकर कंदील सबसे बडहन आ सबसे ऊंचे तक पहुंचे आ खूब देर तक जरे.


ऊ दीया आ ऊ कंदील आजु की बिजुली की झालर आ राकेट फुलझडी पड़ाका सबके फेल करे वाला लागेला.



रविवार, 23 अक्टूबर 2011

टीए डीए गच्च

नमस्कार !

हाल चाल ठीक बा नू !

एतनी घरी बाभन आ अन्ना के टीम पर चारू ओर हल्ला बोल बा. भारत में जौन कुछु खराबी बा सबकर जिम्मेदार बाभन लोग बा. आ अन्ना की टीम जईसन भ्रष्ट लोग कहीं नईखे. अन्ना के टीम कहता की सरकार सख्त से सख्त कानून बनाके ओके लागू करे त भारत के भ्रष्टाचार बहुत कम हो जाई. मेट्रो से लेके टोला तक अन्ना चर्चा में बाने, लोग चाहता कि भ्रष्टाचार खतम हो जाऊ. बाकी नेता, अफसर, सफेदपोश लोग मन से चाहत नईखे.केहू कहता कि सब लोग ईमानदार हो जाऊ त भ्रष्टाचार खतम हो जाई. केहू कहता कि सब लोग चाहता कि ओके छोडिके सब ईमानदार हो जाऊ.

हमरी देखला में त ई लागाता कि कि जब सख्त कानून बनी जाई आ सख्ती से सबकी ऊपर समान भाव से लागू होई  आ मुकदमा के फैसला जल्दी आई त भ्रष्टाचार मिटी. कानून बनावे वाला आ कानून के रक्षक लोग पर भी कानून समान रही. जब हर अपराधी के जल्दी से दंड लागी त  भारतवासी लोग भी कही सकी कि हमहू ईमानदार हई. करिखा पोति के जगतगुरु कईसे बनल जाई.

भारत के संविधान ही नवका स्मृति ह . ओके बनावे में नेता आ बडका अधिकारी लोग रहे आ ऊ लोग अपना के बचावे के उपाइ कईले बा. त समता कहा  बा कानून एके लेखे कहाँ बा पूर्व सांसद लोग जेल के हवा खात रहे आ वर्त्तमान सांसद की गिरफ्तारी के अनुमति मंगाती रहे. बाकि नवका बाभन लोग खाली बाभन जाति के मनुस्मृति की नाम पर गरियावता. जौन  कानून ह उहे नैतिकता ह आ मानवता भी. यदि कानून नैतिक नईखे, मानवीय नईखे त ओके बदलीये देबे के चाही.

एतनी घरी किरण बेदी की यात्रा भत्ता के गोलमाल के बहुत चर्चा बा. गलती त कईलही बाड़ी बाक़ी ओईसन गलती भारत के संकृति बनी गईल बा. त अब ईहे कहल जा सकेला कि जे भी लोग चाहता कि भ्रष्टाचार मिटे उ गलती कईल छोड़े. आ भ्रष्टाचार  भ्रष्टाचारी दुनू से एके साथे  लड़े.

एगो समाचार निकलल रहल ह कि कुछु बड़े आदमी लोग रेलवे के मासिक टिकट ( ऍम एस टी)  लेके  स्लीपर में पकड़ा गईल. बड़ा हँसी भईल बाकी रोज लाखों लोग ए गलती के करता. त का करे के चाही ? भाई अब अपनी भ्रष्टाचार से भी लड़े के पड़ी.

बडका बडका लोग टीए, डीए भी लेलेला आ खींची के खाला आ वाहन सुख भी ले लेला त हो गईल भईया टीए डीए गच्च. जे ना टीए डीए गच्च करेला ओके लोग कहेला बडका हरिश्चंद बनेलें.

"कलयुग में हरिश्चंद बनल भी बहुत बड़ा नादानी ह "

सोचीं रवुआ सभे के का राय बा.

धनवंतरी जयन्ती , हनुमान जयन्ती, दीपावली, चित्रगुप्त जयन्ती आ भैयादूज पर हार्दिक शुभकामना की साथ.

रउरे सभे के-
जय प्रकाश

फेरु भेंट होई.