नमस्कार!
हालचाल ठीक बा सावन की सूखा की बाद भादो टिपटिपाता. निमने बा सवनसुख निमन बाकी भदवसुख ना निमन. कई गो भाषा कहीं चाहॅ बोली कही मरले की कगार पर बा. लोग बचावे खाती हलचलि कईले बा. भोजपुरियो के इहे दशा रहल ह. ई बोली पिछडन के मानलि जाले. कुछु लोग जागल आ विश्व भोजपुरी सम्मेलन के आयोजन होखे लागल पहिला सम्मेलन देउरिये में भईल. एगो पत्रिको निकलेले एके बेर देखले बानी. नीक लागल बाकि ओकर नियमित ग्राहक ना बनि पवली. एक दिन देखलीं कि विकिपीडिया पर भोजपुरी बा. आ मांग होता कि एके संविधान की ओर से भी मान लिहल जाउ. देखी का होला.
आजु काल्हि लोग पश्चिमी संस्कृति के गरिया गरिया के अपनावत चलि जाता. बलात्कार आ सामूहिक बलात्कार अब खबर में छपाये लागल त लोग घबराये लागल. बाकी का का करता ओके ठीके मानेला. आखिर ई संस्कृति का ह पूरब की संसकृति में सचहूं कुछु बा ?. रेडियो, टीवी, सिनेमा के दोष दीहल जाई त ऊ लोग कही हमार कौन दोष हम त ऊहे देखाव तानी जवन होला. का सचहू इहे बाति बा. कपडा के बाति होई त लोग कहे लागी कि ई अधिकार के बाति ह जेकरा जवन मन करे तवन पहिने. ई सोचे वाली बाति बा कि आखिर पूरा देश एतना कामुक काहे हो गईल बा .
''कलिकाल बिहाल किये मनुजा , नहिं मानत क्वौ अनुजा तनुजा,'' -रामचरित मानस उ.का.१०६-५
लोग अपनी मन के ही कईल चाहता ओकरा ना समाज से डर बा ना कानून से, ्नैतिकता (धर्म) के के पुछेला. भारत की संयुक्त परिवार की घर में मजाक बहुत होला ई सब मजाक मर्द मेहरारू की सम्बन्ध पर होला. देवर भाभी , जीजा साली ना जाने और कौन कौन. गांव के गांव, तहसील के तहसील, जिला के जिला, प्रदेश के प्रदेश अब त देश के देश के लोग बहनोई साला की रिश्ता की नाम पर जौन जौन बाति कहत रहत ओके सुनि के का होई.
भोजपुरी गाना में अब खाली नंगई चलत बा. जौना सडक से चलि जाई गुजरे वाली हर महिला की ऊपर द्विअर्थी आवाज सुने के मिलि जाइ. ई हे भारतीय संस्कृति ह. आकि एके अगरेज बढावा देले बाडे स.
कपडा भी हर समय आ परिवेश आ मौसम की अनुसार पहिरल जाला. कपडा भी मनोभव आ रस के स्रिजन करेला. सुते कि समय के कपडा कचहरी के कपडा खेलि के कपडा अलग होला. अब सब महिला लोग हरदम नचनिया के कपडा पहिरे लागे. सुतेवाला कपडा पहिन के लोग स्कूल आ आफिस जाये लागे त कु्छु गडबड होई.
हमरी कहले के मतलब ई बा कि चारुओर जब कामुकता के वातावरण बनावल जाइ त ओकर प्रभाव होई. ई प्रभाव तब देखे के मिली जब कहीं भी अपराधी का ई लागे लागि कि उ सफल हो जाई.
एकरी खातिर सभ्य समाज का चाही कि ए तरह की स्थिति में योगदान करे वाला सब कारक के पहिचान कके ओके सुधारे के उपाइ कईल जा. न्याय प्रणाली के दारोमदार पलिस ,वकील आ जज लोग पर बा ऊ लोग मन से रकल चाहि तबे ई रुकि.
त वस्तुनिष्ठ विचार कईल जा आ सुधार के प्रयास कईल जा आ अपनी व्यव्हार पर ध्यान दीहल जा कि हमसे कौन कवन गलती होता आ ओके कैसे सुधारल जा सके ला.
फेरू भेंट होई.
नमस्कार!
हालचाल ठीक बा सावन की सूखा की बाद भादो टिपटिपाता. निमने बा सवनसुख निमन बाकी भदवसुख ना निमन. कई गो भाषा कहीं चाहॅ बोली कही मरले की कगार पर बा. लोग बचावे खाती हलचलि कईले बा. भोजपुरियो के इहे दशा रहल ह. ई बोली पिछडन के मानलि जाले. कुछु लोग जागल आ विश्व भोजपुरी सम्मेलन के आयोजन होखे लागल पहिला सम्मेलन देउरिये में भईल. एगो पत्रिको निकलेले एके बेर देखले बानी. नीक लागल बाकि ओकर नियमित ग्राहक ना बनि पवली. एक दिन देखलीं कि विकिपीडिया पर भोजपुरी बा. आ मांग होता कि एके संविधान की ओर से भी मान लिहल जाउ. देखी का होला.
आजु काल्हि लोग पश्चिमी संस्कृति के गरिया गरिया के अपनावत चलि जाता. बलात्कार आ सामूहिक बलात्कार अब खबर में छपाये लागल त लोग घबराये लागल. बाकी का का करता ओके ठीके मानेला. आखिर ई संस्कृति का ह पूरब की संसकृति में सचहूं कुछु बा ?. रेडियो, टीवी, सिनेमा के दोष दीहल जाई त ऊ लोग कही हमार कौन दोष हम त ऊहे देखाव तानी जवन होला. का सचहू इहे बाति बा. कपडा के बाति होई त लोग कहे लागी कि ई अधिकार के बाति ह जेकरा जवन मन करे तवन पहिने. ई सोचे वाली बाति बा कि आखिर पूरा देश एतना कामुक काहे हो गईल बा .
''कलिकाल बिहाल किये मनुजा , नहिं मानत क्वौ अनुजा तनुजा,'' -रामचरित मानस उ.का.१०६-५
लोग अपनी मन के ही कईल चाहता ओकरा ना समाज से डर बा ना कानून से, ्नैतिकता (धर्म) के के पुछेला. भारत की संयुक्त परिवार की घर में मजाक बहुत होला ई सब मजाक मर्द मेहरारू की सम्बन्ध पर होला. देवर भाभी , जीजा साली ना जाने और कौन कौन. गांव के गांव, तहसील के तहसील, जिला के जिला, प्रदेश के प्रदेश अब त देश के देश के लोग बहनोई साला की रिश्ता की नाम पर जौन जौन बाति कहत रहत ओके सुनि के का होई.
भोजपुरी गाना में अब खाली नंगई चलत बा. जौना सडक से चलि जाई गुजरे वाली हर महिला की ऊपर द्विअर्थी आवाज सुने के मिलि जाइ. ई हे भारतीय संस्कृति ह. आकि एके अगरेज बढावा देले बाडे स.
कपडा भी हर समय आ परिवेश आ मौसम की अनुसार पहिरल जाला. कपडा भी मनोभव आ रस के स्रिजन करेला. सुते कि समय के कपडा कचहरी के कपडा खेलि के कपडा अलग होला. अब सब महिला लोग हरदम नचनिया के कपडा पहिरे लागे. सुतेवाला कपडा पहिन के लोग स्कूल आ आफिस जाये लागे त कु्छु गडबड होई.
हमरी कहले के मतलब ई बा कि चारुओर जब कामुकता के वातावरण बनावल जाइ त ओकर प्रभाव होई. ई प्रभाव तब देखे के मिली जब कहीं भी अपराधी का ई लागे लागि कि उ सफल हो जाई.
एकरी खातिर सभ्य समाज का चाही कि ए तरह की स्थिति में योगदान करे वाला सब कारक के पहिचान कके ओके सुधारे के उपाइ कईल जा. न्याय प्रणाली के दारोमदार पलिस ,वकील आ जज लोग पर बा ऊ लोग मन से रकल चाहि तबे ई रुकि.
त वस्तुनिष्ठ विचार कईल जा आ सुधार के प्रयास कईल जा आ अपनी व्यव्हार पर ध्यान दीहल जा कि हमसे कौन कवन गलती होता आ ओके कैसे सुधारल जा सके ला.
फेरू भेंट होई.
नमस्कार!
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