गुरुवार, 12 जून 2014

कारपोरेट गांव

नमस्कार!

का हो काका  हालिचालि ठीक बा नू.
ठीके बा हलचल मचल बा कि असो बरखा कम होई.
के जाने कि कि कहां कम होई कहां अधिक. बडका जानकार लोग पूरा देश के मौसम एके मीटर स नापि देता. कमिश्नरी कि हिसाब से मौसम बतावेके चाहीं.
एतना पईसा कहां से आई.
पईसा के कौनो कमी नईखे. सगरी आवते  जात में लूटा जाता आ विदेश चलि जाता, फेरु यफडीआई बनि के आ जाता.
आरे नवकी सरकार आ गईल. कंगरेशियन के राज गईल ई कुछु करी आकि सिंहासन के शोभा में अंझुरा के रहि जाइ.
कुछु कहल ना जा सकेला. एहू सरकार में बहुत बहुवाचक लोग बा.
मोदी जी त कहतारे हरि गांव में उद्योग लागी.
गांधी जी भी कहत रहले बाकी नेहरू जी बडका उद्योग के ढेर मौका दिहलें. गांव की विकास मेम सहकारिता आन्दोलन आ सामुदायिक विकास के योजना चलवा दिहले, अधिकारी आ छोट्भैया नेता लोग मिल के सब डुबा दीहल.
त अब नया का होई.
देख का होला बाकी हर गांव में चक्की बा. उ तनि बढिया हो जा आ गांव के सब गेंहू के पीसि के पैकिंग कके बाजार में ले जा त कुछु रोजगार बढि जाई. खपत से अधिका दूध, फल, सब्जी, सब के लघु उद्योग की रूप में बदलल जा सकेला. एकरी खातिर ईहो जरूरी बा सब सामान शुद्ध आ खरा होखे ,चोर बजारी ना होखे.
एकरी खातिर त बडा लिखत पढत करे के परी.
ह अबे त ईहे हालि बा जब एगो पता ठिकाना आ वोटर लिस्ट सही नईखे. कौनो महकमा में जा त समय से काम ना हो सकेला. कब्बो केहू नईखे त कब्बो केहू नईखे. सब मिली त मारे गलतीये गिनावे लागी. जबराना आ फिरौती के जमाना. नजराना आ शुकराना अब नईखे चलत.
का करब जब इस्कुलवे से लुटहाई शुरु बा त कहां ना रही.
सब कहता ऊपर भेजे के बा. ई केतना ऊपर ले जाला.
का जाने कहां ले जाला ई नेते लोग कहि सकेला.
त का होई.
ऊपर के लोग मन से चाही त सब होई. ना त खाली राज करे की लालसा राखी लोग त कुछु ना होई
बूढ लोग बिना सवारथ के काम करेला त लइकन के मन बढेला आ सठिया के सवारथ में पडि जाला त बंटाधार हो जाला.
देखीं का होता.
अच्छा नमस्कार!
फेरू भेंट होई.

शनिवार, 10 मई 2014

सझिया के जनता

नमस्कार!
हालिचालि ठीके बा.
गर्मी, चुनाव आ लगन तीनों जोर पर बा. तीनों के जोर बढते जाई. अबे जून आ मृगिश्रा बाकिये बा, वोट गिनाई, सरकार बनी, मंत्रिमंडल के गठन आ घोडाबाजार बाकिये बा. लगन जुलाई ले बा. त कुलि मिलाके शुभे समाचार बा.
भारत के जनता से कर लेबेके मालिक सभे बा. बाकिर जब काम के समय आवता त केन्द्र कहता कि प्रान्त के जिम्मेदारी, प्रान्त कहता जिला परिष्द, नगर परिषद आ ग्राम पंचायत सब दूसरे पर जिम्मेदारी ठेलि देता. आ सब कहता कि हम पैसा दिहनी बाकिर ई कुछु ना कईले आ खा घलले.
वोट की बेरी खाली विकास बा. बाकी समय नेताजी के विकास बा. सब कहता बडा खर्चा कईले रहल ह मुर्गा खियवले रहल ह त वसूली ना. उ कहता पईसा लगा तब पईसा आवता सभे कमाता त हमहूं कमातानी. जनता के छोटे छोटे काम बा ऊ नेता लोगनि की ओर लरियाइल बा.
बडका चुनाव होता. खूब लहालोट बा सब लोग विकास करी .केजरीवाल बाबू भ्रष्टाचार के विनास करिहें. लोग कहता बताई ई कईसे होई. भ्रष्टाचार कब ना रहे आ कब ना रही. सब लोग कहता कि दूसरा पार्टी भ्रष्ट ह.
अब जे प्रधानमंत्री होई त ऊ सगरी कार अकेले क दी कि उहो इहे कही कि ई हमार काम ना ह. आकि प्रान्त के सब अधिकार मेति जाई.
बहस गईल  बन में,
सोची अपनी मन में,
तब मोहरि मारि तानि के,
अपनी निशान पे,
जीति चाहे हारी,
ए पर मति विचारीं.
फेरू भेंट होई.

बुधवार, 15 जनवरी 2014

खिंचडी

नमस्कार!
हालिचालि ठीके बा. कई दिन की बाद आजु घाम भईल बा. देउरिया में अजु खिंचडी ह. पंडित लोग कहता कि संक्रांति त कल्हिये सांझि खा रहे बाकी ई स्नान पर्व ह त असों १५ जनवरी के खिंचडी मनावल जाई. हिन्दू लोग के दूगो नहान अंग्रेजी तारीख से मिलेला. खिंचडी आ सतुआनि. झगडा समय की खातिर होला. कुल गणना बैठवले की बाद भी जवन चीजु बईठे लायक ना रही त ओके कईसे बईठावल जाई. पंडित लोग भी अईसन समय आपन आपन चलावल चाहेला.
खिंचडी के सबसे कठिन काम नहाईल ह. खायेके मिली खिंचडी. दूनू सूर्य जी से सम्बन्धित तिउहार भोजन आ पकवान की हिसाब से गडबडे ह. ईबाति जरूर बा कि दूनू में उपल्ब्ध सामग्री की दृष्टि उत्तम व्यवस्था बा. पहिले की जमाना में देहात में खिंचडी से आलू गोभी मिलत रहल ह. अब नवका खेती की जोर से सब कुछु सब समय सब जगह मिलता. पईसा के खेला बा.
खिंचडी में हितई नतई से लाई, चावल चूरा आवेला आ परिजन में बंटाला.
असों ए समय राजनीति बडा गरम बा. के जीती इहे चर्चा चारू ओर बा. भीतरे भीतर सब लोग एक दूसरे के अइकत बा. आपन आपन गुणा भागि लागि रहल बा हुसियरका आ बुरिबकवा सब भिडल बा. ई बाति जरूर बा कि एतना दिन बीतले की बादो बडका लोग जेने चाहता ओने ओट गिरवा लेता. आधा काम सिपारिस से आधा काम घूस से होखे के बा. घूस आ दहेज ई दूनू जे जेतने लेला ओतने ईज्जतदार कहाला.
खिंचडी के पतंग भी उडावल जाला. अब पतंग के राजनीति चलता. राजनीति आ विज्ञापन हर जगह हर समस्या की समाधान में हाजिर बा.
असो खिंचडी की सथवें चौथि लागता . कऊडा के पकवल कोन बडा मीठ लागेला. महिया कोन आ काराहे में के लाई. बांस की सिपुली में चेफुआ से महिया खायेके समय बा. बरफी से मीठ लवाही. असो तिल २०० रु किलो की  भाव में पहुचल बा. त तिल के स्पर्श लाभ ही मिलि पाई.
फेरु भेंट होई,
नमस्कार.

बुधवार, 1 जनवरी 2014

नवका साल २०१४

नमस्कार!
हालचाल सब ठीक बा.
नवका तिउहार "साल के पहिला दिन" अब सब से बडका राष्ट्रीय दिन इहे हो जाई लगता. ई सबके अपनी अन्दर समाहित क लेई. खाली हैपी न्यू ईयर कहि दी रउरो खुस सुने वाला भी खुस  . मोबाइल महराज आ यसयमयस से बडा आराम बा अधिकाधिक परिचित, हित नात , परिवार, मित्र सबके याद क लिहल जा. नवकी डायरी आ नवका कलेन्डर छोडिके, सब कुछ नवका दिने चलि जाता. शाकाहारी, मांसाहारी, फलाहारी, व्रतधारी सबके गुन्जाइस बा. विश्व भर के व्यंजन सब चिलि जाइ. सब पेय चली. घरे , सडक पर, होटल में, तीर्थस्थान पर जहां चाहे तहां मनाई. टीवी. रेडियो, मोबाइल, कम्पूटर सब चली.
मोदी आ मोबाइल की कृपा से अब  हैपी न्यू ईयर कहला पर भाषण नईखे सुनेके मीलत.
जवन बीत गईल तवन बात गईल. ई नवका साल में संसद के चुनाव होखेवाला बा. सब पार्टी के जवान से बूढ ले, हरियर से  उकठल ले सब नेता आ पार्टी जनता के गरियावता. भारत के जनता के कौनो ठेकान बा कब के के वोट दे दी. अब देखी दिल्ली में झाडू भी जीति गईल. घोर कलियुग आ गईल बा. बाकी चिन्ता के कौनो बाति नईखे. जब गांव में अईहें त पता चली.

जब गांव-गांव आआपा पर गलचौर होखे लागल त  केजरीवालवा प्रधानमंत्री हो जाई का. लागल रही आ वोट की दलालन से सावधान रहिके हरि गांव में जो झंडा गाडि देई त कुछु हो सकेला. सब पईसा लुटा जाता. सब नोकरी बिका जाता.
जनता के का चाही. अच्छा सरकार. सबके योग्यता की अनुसार पढेके स्कूल. दवाई त गहना बिकवा देता. सबके दवाई सरकारी होखे लागे त खेत बान्हेम ना धराई.
बिना कामे कईले निकम्मा लोग तनखाह ना उठाईत. घूस की पईसा के चमक खतम हो जाईत त का कहे के रहल ह.
आजुकाल्हि के जवानन के का कहल जा बिना मेहनतिये के सब कुछु चाहताडे सन. सगरी बुढवा मिलि के जवानन के मूरख बनावताडे स. नोकरी की बाद पईसा की जोगाड में तिकडम करत रहतारे स. मुअला की दीने ले कुरसी से चिपकले रहतारे स.
चुनाव में टिकट बटाये लागी त सिटिंग गेटिग चलाके देश के आगे ना बढे दीहे स.
आआप यदि नवजवानन की शक्ति के सही दिशा की ओर मोडि देई त देश के जवानी देश की कामे आ सकेला नाही त बगुला भगत बनिके ई देश खा जईहे स.
नवका सालि निमने बीते.
कुछु नया खुशखबरी मिले.
फेरू भेंट होई.
नमस्कार!

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

देवरिया में दूध दही-१

नमस्कार!
हालचाल ठीके बा, जाडा पडे लागल, आजु बिहाने दुआरे पर घूमत घूमत फोटो खींचत रहुई दही वाला घूमत रहुअन. एकाएक मन में अउए कि  दहीवाला के फोटो ले ली. तले ऊ दूर चलि गउअन बाकी फोटो खीचा गउए. आजु सांझि खा ऊ फोटो फेसबुक पर लगा दिहुईं. दन से टीप अऊये " देवरिया" में दही एंगा बिकाला. त हमरी दिमाग में सजांव की नियरे के गांव रंगवली ्के दहीवाली के चेहरा नाचे लगुये.
दही के दूगो रूप ढेर चलेला. सजाव दही आ छिनुई दही. नदिया चाहे कहतरी में दूध के गोइठा कि आग पर देर ले अवंटि के जओरन डालल जाला त खूब मोट साढी वाला दही जामेले ई ह सजाव दही. देवरिया शहर में अबो कांवरि पर कहतरी में दही लेके दहीवाला लोग घूम घूमिके दही बेचेला. दही मंडी भी बा आ दही चूरा के होटल भी.
दही के दुसरका रूप ह छिनुई. उ दही जवना में से घीव छिना जा. कहतरी में से सब साढी निकलले कि बाद  बचेला  ऊ कहाला छिनुई.
रंगवली के दहीवाली मटकी मे दही ले के आवे. ओ दही में छिनुई दही के मथि के खुब पानी मिला के मटकी तैयार. दही लेबे खातिर गेंहू या जौ की दिया जा. दही खरीदे वाला बर्तन  के ढेला से तौलि के चाहे डिकिया की माप से दही मिलि जाउ. हर डोकिया में एगो दही के ठोस टुकडा भी रहे. चिरौरी कईला पर एगो छोटका टुकडा और मिलि जाउ. ओकरी बाद घलुआ.
नमस्कार.
फेरु भेंट होई.

सोमवार, 14 अक्टूबर 2013

नमस्कार!
हालिचालि ठीक बा. असो (२०१३) दशहरा की दीने चित्रा मंडराइल बा. कल्हिये से बरसता. फेसबुक पर तरह-तरह के पोस्ट देखत देखत सजांव के रामलीला मन में उतरे लागल ह. देश में सबसे अधिक सरकार के पइसा खर्च करे वाला इनवरसीटी (ज.ने.वि.) के लोग सब सोचेला बाकी ई त ना कहेला की देश की हर नौजवान के एइसने इनवरसीटी चाहीं.
सजांव के रामलीला तिजि या चौथि से शुरु होखे. प्राइमरी पाठशाला सजांव की तीन ओर खरिहान में कोदो साठी आ घनकोदई के दवरी आ रामलीला आ ओही साथे चना केराव के बावग सब साथे साथे चले. माटी की दीवाल आ खपडा  के स्कूल के क्लास बारी में पेंड की नीचे. जाडा में फील्ड में चले. प्रार्थना "वह शक्ति हमें दो दयानिधे" स्वदेशी नारा की बाद  फील्ड आ कमरा के सफाई सब लइका लोग कूडा बीन के करे. झाडू झंझट खतम. रामलीला मैदान के सफाई भी एही तरे हो जा. लपटौना घास उखारि के कूडा बीन ल सफाई हो गईल. माटी के दू गो चबूतरा बना के दू गो पताका लागे. राम के लाल पताका रावण के काला पताका.

रामलीला के  सब पात्र गांव के लोग रहे. फुलवारी की दिन से भीड बढे लागे. सबसे अधिक भीड  धनुषग्य, विवाह आ दशरथ मरण मे होखे. धनुषजग्गि के दू गो संवाद रावण बालि संवाद आ परसुराम लक्ष्मण संवाद मजेदार होखे.

रामलीला की मेला में (1960) सबसे अधिक सर्व सुलभ मिठाई रहे पट्टी . लकठा, खझुली, बतासा भी मिले. कोदो, धनकोदई देके मनपसन्द मिठाई मिल जा.

रावण जरवला की समय एगो ढेला फेंकला के चलन रहे. लोग की ढेला चलवला में एक दू लोग के कपार फूटे. झगडा के शुरुआत.

तब ना  सिनेमा रहे. ना टीवी. बरात के नाच आ मंडली की बाद रामलीला अभिनय देखला आ मनोरंजन के साधन रहे.
हमनों के रहरि के तीर धनुष बनि जा. जब समय मिले तब रामलीला शुरू. अबो ईहे बुझाला कि ओइसन रमलीला कहीं ना होला. एक बेर राम नगर के रामलीला भी देखले  बानी.

फेरू भेंट होई,
नमस्कार!

बुधवार, 28 अगस्त 2013

डोल

नमस्कार!

का हालिचालि बा आजु अस्टिमी भूखल बानी की नाहीं? भादो के अस्टिमी आ कातिक के एकादसी सबहर ब्रत ह. माने सब सेयान लोग भूखेला. गांव में अस्टिमी के डोल रखाला. बाद में जनलीं की दोलनोत्सव के भोजपुरी रूप डोल ह. अब बहुत जगह डॉल मेला भी लागेला.

रामनवमी से ढेर लोग भादो के अस्टिमी भूखेला. रामनवमी की समय खेतीबारी के काम बहुत रहेला. एतनी घरी खेती के काम कम होला पहिले की जमाना में भोजन के संकट भी रहे. विज्ञान के जय हो कि एइसन एइसन धान गेंहू के बीया उपरवलसि की अन्न के संकट दूर हो गईल. ्कांकरि, खीरा, अमरुत, फूट फल मिलेला. बहुत लोग निर्जला रहे ला. आज के खास प्रसाद ह पन्जीरी (घन्जीरी) धनिया भून के पीस के चीनी पीस के मिला के प्रसाद बनि जाला.

हमरि गांव मे सन साठ पैंसठि की आस पास गांव की बीच में सियाराम दूबे की दुआर पर डोल रखा्त रहे. गांव भर से भेर (चंदा) लिआई. गांव भर के लोग राति के जुटि के बारह बजे ले कीर्तन गाई. ओतनी घरी हमनी का ई जानल जा कि बारह बजे अपने से खीरा फाटि जाला आ भगवान जी बाहर आ जाले.

अब त गांव में कई जगह डोल धराला ठीको बा . सब लोग एक जगह जुटि भी ना पाई.

ई के हऊएं. इनिके कांहे लोग पूजेला. कांहे दिवाना भईल बा लोग. आजु २०१३ माने एकईसवी शताब्दी के दूसरा दसक चलता. विक्रमी सम्वत के २०७० चलता. भारत में कृष्ण लोक मे रमल बाने. धार्मिक कर्मकान्ड से लेके मार्मिक विरह गीत ले कृष्ण छवले बाने. जे जवना रूप में चाहल  ओही रूप में पावल. नाचत, गावत, युद्ध करत , साहित्य आ कला क्षेत्र के प्रिय आ वरेण्य हुऊएं देवकी नन्दन, यशोदा नन्दन, केतना त कथा बा कौन कौन गाईं.

जे धर्म मानत होखे, ओकर भगवान हऊए, जे अनीश्वर वादी होखे ओकर आदर्श समाज सेवक हऊएं. धार्मिक कर्मकांड रोकि के गोबर्धन पूजे वाला कृष्ण, योगेश्वर , नटवर नागर, अभूतपूर्व राजनयिक. बिना राजपाट के  चक्रवर्ती स्म्राट बनावे वाला कृष्ण. जे जे उनुके जवना रूप में देखल चाहे सबके हऊएं. एइसन महान व्यक्तित्व वाला के जन्मदिन पर उनुकी व्यक्तित्व से कुछु सीखल जा सकेला.

आपन रोग पाप जे दीहल चाहे दे सकेला. मानसिक शान्ति पावल चाहे त पा सकेला. राजनय सीखल चाहे त सिख सकेला.

जवना काम से दूसरे के हित होखे आपन हित होखे. समाज के हित होखे, मानवता के हित होखे ओ काम करबि त ओइजू कृष्ण खडा होके सहायक हो जईहे. काम करेवाला के आत्मविश्वास हऊए कृष्ण.

सभे सुखी रहे, सब निरोग रहे, सबके शुभ होखे. केहू दुख में न रहे.