नमस्कार!
हालिचालि ठीके बा. एतनी घरी लोग आम खा के अघा जात रहल ह. बाकी अब त सब बारी कटी गईली स. लोग कीनि के आसेर पाभर आम खा लेता आ अघा जाता.
केजरीवाल की आन्दोलन की बाद मीडिया वाला लोग मध्यवर्ग के "खाने अघाने" वाला लोग चर्चा शुरु कईल अब इ शब्द चलि गईल बा.
मीडिया में काम करे वाला लोग के वेतन आदि के बडी समस्या बा. नाम बहुत बा, बड़्का लोग की बीच में उठे बैठे के बा. पत्रकार लोग के भी घोषित अघोषित तरह तरह के लाभ मिलि जाला बाकि ओंगा ना मिलेला जईसे सरकारी नोकरी में बा.
आजु काल्हि त चपरासी के नोकरि भी दस लाख में बिकाता. सेना आ पुलिस के नोकरी भी बिकाता. सब बिकाता कुछु नईखे बिकात. जे नईखे बिकात ऊहो सिफारिस आदि आदि की मजबूरी में बा. जे कुछु ना सुनेला ओके केहू ना पुछेला.
बाति तनिके में एने-ओने चलि जाले. हम खईले आ अघईले के बात करत रहली ह. जे मेहनत कके खायेके जुटाले ऊ खाईल मध्यवर्ग ह. जे ऊपरी आमदनी से पावेला ऊ अघा जाला. जे टैक्स चोरावेला ऊ अघा जाला.
अघाईल लोग आन्दोलन ना करेला.
जे के मेहनति कईला की बाद भी सामान्य जीवन स्तर नामिलि पावेला ऊ हे आन्दोलन क सकेला. भारत के अधिकाधिक लोग बहुत आलसी होला. एकर फायदा सब उठावेला.
जवन लोग रोज रेल टिकट की आरक्षण की परेशानी के बाति करत रहल ह अब बुलेट ट्रेन के बाति करता. अब रेल सब समस्या खत्रम बा बुलेट ट्रेन आई आ सबके पहूंचाई.
तले योजना आ बाति से अघाईल रहीं सभे. जब अघाइले बानी त रऊरा से का होई?
नमस्कार. फेरू भेंट होई.
हालिचालि ठीके बा. एतनी घरी लोग आम खा के अघा जात रहल ह. बाकी अब त सब बारी कटी गईली स. लोग कीनि के आसेर पाभर आम खा लेता आ अघा जाता.
केजरीवाल की आन्दोलन की बाद मीडिया वाला लोग मध्यवर्ग के "खाने अघाने" वाला लोग चर्चा शुरु कईल अब इ शब्द चलि गईल बा.
मीडिया में काम करे वाला लोग के वेतन आदि के बडी समस्या बा. नाम बहुत बा, बड़्का लोग की बीच में उठे बैठे के बा. पत्रकार लोग के भी घोषित अघोषित तरह तरह के लाभ मिलि जाला बाकि ओंगा ना मिलेला जईसे सरकारी नोकरी में बा.
आजु काल्हि त चपरासी के नोकरि भी दस लाख में बिकाता. सेना आ पुलिस के नोकरी भी बिकाता. सब बिकाता कुछु नईखे बिकात. जे नईखे बिकात ऊहो सिफारिस आदि आदि की मजबूरी में बा. जे कुछु ना सुनेला ओके केहू ना पुछेला.
बाति तनिके में एने-ओने चलि जाले. हम खईले आ अघईले के बात करत रहली ह. जे मेहनत कके खायेके जुटाले ऊ खाईल मध्यवर्ग ह. जे ऊपरी आमदनी से पावेला ऊ अघा जाला. जे टैक्स चोरावेला ऊ अघा जाला.
अघाईल लोग आन्दोलन ना करेला.
जे के मेहनति कईला की बाद भी सामान्य जीवन स्तर नामिलि पावेला ऊ हे आन्दोलन क सकेला. भारत के अधिकाधिक लोग बहुत आलसी होला. एकर फायदा सब उठावेला.
जवन लोग रोज रेल टिकट की आरक्षण की परेशानी के बाति करत रहल ह अब बुलेट ट्रेन के बाति करता. अब रेल सब समस्या खत्रम बा बुलेट ट्रेन आई आ सबके पहूंचाई.
तले योजना आ बाति से अघाईल रहीं सभे. जब अघाइले बानी त रऊरा से का होई?
नमस्कार. फेरू भेंट होई.
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