शनिवार, 12 जुलाई 2014

मेघा सारे पानी दे!

नमस्कार!
हालिचालि के का कहीं सूखा परि गईल. जौने राजा की आवते सूखा परि जा त किसान त पिसाइये जाई. बरखा त नाहिंये होता, गरमी आ बीमारी दुनू बढ़्ले जाता. आजु काल्हि पर्यावरण उपराइल बा इहे बरखा नईखे होखे देत.

राजा जनक की जमाना में सूखा आ अकाल परल रहे त ऊ हर चलवने त सीता जी मिलली आ पानी भी बरसल. अबो तमाम गांवन में मरद लोग बैल की जगह हो जाला आ मेहरारु हल चला वेली . कुछु लोग इनार (कुंआ)  की जगत के शिव जी के इनार में लटका देला. अखंड हरिकीर्तन, रूद्राभिषेक, आदि की साथे साथे मजदूर वर्ग  नंग धड़ंग लईकन के टोली पूरा गांव की लोग की दुआर पर जाई घर में से या कुंआ मेंसे पानी ला ला के जमीन  पर गिरावल जाई टोली ओमें लोटि लोटि के नारा लगाई जवना के अन्त होई...........मेघा सारे पानी दे.

अब मौसम विभाग बा ऊ पूरा देश की मौसम के देख रेख करेला. ई बड़े आदमी लोगनि के विभाग ह. हवाई जहाज, पानी के जहाज की खातिर तात्कालिक मौसम के जानकारी देला. बरखा के जानकारी किसान की खातिर भी लाभप्रद होला् बाकीअपनी भारत में अबे खेती की काम लायक मौसम क्षेत्र के बंट्वारा नईखे भईल. अगर भईलो बा त ओकर सूचना ठीक ठाक नईखे.

अब किसान की सामने तरह  तरह के संकट आ गईल बा. सरकार के योजना, मूल्यांकन में एतना समय बीति जाला कि जबले प्रबन्ध होला तबले समस्या ना रहेले आ सब धन बंदरबांट  मे चलि जाला. सगरी लोग ई कहानी फईला देले बा कि जबले ऊपर कुछु दियाई ना तले पईसा नीचे आई ना. पईसा खाये वाला लोग जोंकि ह ऊ जे के पकड़ि ली ऊ सब खुन चुसि के छोड़ी. ई अफवाह ह कि सच ह कुछु कहल ना जा सकेला. सीधे कौनों गवाह ना मिली आ परिस्थिति जन्य साक्ष्य के के मानी. जब चचेरा भाई करोड़ रूपया घर में फेंकि के चलिजाता त कुछु हो सकेला.

कथा गईल बन में, सोच अपनि मन में.
फेरू भेंट होई.
नमस्कार.




मंगलवार, 8 जुलाई 2014

अघाइल लोग

नमस्कार!
हालिचालि ठीके बा. एतनी घरी लोग आम खा के अघा जात रहल ह. बाकी अब त सब बारी कटी गईली स. लोग कीनि के आसेर पाभर आम खा लेता आ अघा जाता.
केजरीवाल की आन्दोलन की बाद मीडिया वाला लोग मध्यवर्ग के "खाने अघाने" वाला लोग चर्चा शुरु कईल अब इ शब्द चलि गईल बा.
मीडिया में काम करे वाला लोग के वेतन आदि के बडी समस्या बा. नाम बहुत बा, बड़्का लोग की बीच में उठे बैठे के बा. पत्रकार लोग के भी घोषित अघोषित तरह तरह के लाभ मिलि जाला बाकि ओंगा ना मिलेला जईसे सरकारी नोकरी में बा.
आजु काल्हि त चपरासी के नोकरि भी  दस लाख में बिकाता. सेना आ पुलिस के नोकरी भी बिकाता. सब बिकाता कुछु नईखे बिकात. जे नईखे बिकात ऊहो सिफारिस  आदि आदि की मजबूरी में बा. जे कुछु ना सुनेला ओके केहू ना पुछेला.

बाति तनिके में एने-ओने चलि जाले. हम खईले आ अघईले के बात करत रहली ह. जे मेहनत कके खायेके जुटाले ऊ खाईल मध्यवर्ग ह. जे ऊपरी आमदनी से पावेला ऊ अघा जाला. जे टैक्स चोरावेला ऊ अघा जाला.
अघाईल लोग आन्दोलन ना करेला.
जे के मेहनति कईला की बाद भी सामान्य जीवन स्तर नामिलि पावेला ऊ हे आन्दोलन क सकेला. भारत के अधिकाधिक लोग बहुत आलसी होला. एकर फायदा सब उठावेला.

जवन लोग रोज रेल  टिकट की आरक्षण की परेशानी के बाति करत रहल ह अब बुलेट ट्रेन के  बाति करता. अब रेल सब समस्या खत्रम बा बुलेट ट्रेन आई आ सबके पहूंचाई.

तले योजना आ बाति से अघाईल रहीं सभे. जब अघाइले बानी त रऊरा से का होई?

नमस्कार. फेरू भेंट होई.