नमस्कार!
हालिचालि ठीके बा. कई दिन की बाद आजु घाम भईल बा. देउरिया में अजु खिंचडी ह. पंडित लोग कहता कि संक्रांति त कल्हिये सांझि खा रहे बाकी ई स्नान पर्व ह त असों १५ जनवरी के खिंचडी मनावल जाई. हिन्दू लोग के दूगो नहान अंग्रेजी तारीख से मिलेला. खिंचडी आ सतुआनि. झगडा समय की खातिर होला. कुल गणना बैठवले की बाद भी जवन चीजु बईठे लायक ना रही त ओके कईसे बईठावल जाई. पंडित लोग भी अईसन समय आपन आपन चलावल चाहेला.
खिंचडी के सबसे कठिन काम नहाईल ह. खायेके मिली खिंचडी. दूनू सूर्य जी से सम्बन्धित तिउहार भोजन आ पकवान की हिसाब से गडबडे ह. ईबाति जरूर बा कि दूनू में उपल्ब्ध सामग्री की दृष्टि उत्तम व्यवस्था बा. पहिले की जमाना में देहात में खिंचडी से आलू गोभी मिलत रहल ह. अब नवका खेती की जोर से सब कुछु सब समय सब जगह मिलता. पईसा के खेला बा.
खिंचडी में हितई नतई से लाई, चावल चूरा आवेला आ परिजन में बंटाला.
असों ए समय राजनीति बडा गरम बा. के जीती इहे चर्चा चारू ओर बा. भीतरे भीतर सब लोग एक दूसरे के अइकत बा. आपन आपन गुणा भागि लागि रहल बा हुसियरका आ बुरिबकवा सब भिडल बा. ई बाति जरूर बा कि एतना दिन बीतले की बादो बडका लोग जेने चाहता ओने ओट गिरवा लेता. आधा काम सिपारिस से आधा काम घूस से होखे के बा. घूस आ दहेज ई दूनू जे जेतने लेला ओतने ईज्जतदार कहाला.
खिंचडी के पतंग भी उडावल जाला. अब पतंग के राजनीति चलता. राजनीति आ विज्ञापन हर जगह हर समस्या की समाधान में हाजिर बा.
असो खिंचडी की सथवें चौथि लागता . कऊडा के पकवल कोन बडा मीठ लागेला. महिया कोन आ काराहे में के लाई. बांस की सिपुली में चेफुआ से महिया खायेके समय बा. बरफी से मीठ लवाही. असो तिल २०० रु किलो की भाव में पहुचल बा. त तिल के स्पर्श लाभ ही मिलि पाई.
फेरु भेंट होई,
नमस्कार.
हालिचालि ठीके बा. कई दिन की बाद आजु घाम भईल बा. देउरिया में अजु खिंचडी ह. पंडित लोग कहता कि संक्रांति त कल्हिये सांझि खा रहे बाकी ई स्नान पर्व ह त असों १५ जनवरी के खिंचडी मनावल जाई. हिन्दू लोग के दूगो नहान अंग्रेजी तारीख से मिलेला. खिंचडी आ सतुआनि. झगडा समय की खातिर होला. कुल गणना बैठवले की बाद भी जवन चीजु बईठे लायक ना रही त ओके कईसे बईठावल जाई. पंडित लोग भी अईसन समय आपन आपन चलावल चाहेला.
खिंचडी के सबसे कठिन काम नहाईल ह. खायेके मिली खिंचडी. दूनू सूर्य जी से सम्बन्धित तिउहार भोजन आ पकवान की हिसाब से गडबडे ह. ईबाति जरूर बा कि दूनू में उपल्ब्ध सामग्री की दृष्टि उत्तम व्यवस्था बा. पहिले की जमाना में देहात में खिंचडी से आलू गोभी मिलत रहल ह. अब नवका खेती की जोर से सब कुछु सब समय सब जगह मिलता. पईसा के खेला बा.
खिंचडी में हितई नतई से लाई, चावल चूरा आवेला आ परिजन में बंटाला.
असों ए समय राजनीति बडा गरम बा. के जीती इहे चर्चा चारू ओर बा. भीतरे भीतर सब लोग एक दूसरे के अइकत बा. आपन आपन गुणा भागि लागि रहल बा हुसियरका आ बुरिबकवा सब भिडल बा. ई बाति जरूर बा कि एतना दिन बीतले की बादो बडका लोग जेने चाहता ओने ओट गिरवा लेता. आधा काम सिपारिस से आधा काम घूस से होखे के बा. घूस आ दहेज ई दूनू जे जेतने लेला ओतने ईज्जतदार कहाला.
खिंचडी के पतंग भी उडावल जाला. अब पतंग के राजनीति चलता. राजनीति आ विज्ञापन हर जगह हर समस्या की समाधान में हाजिर बा.
असो खिंचडी की सथवें चौथि लागता . कऊडा के पकवल कोन बडा मीठ लागेला. महिया कोन आ काराहे में के लाई. बांस की सिपुली में चेफुआ से महिया खायेके समय बा. बरफी से मीठ लवाही. असो तिल २०० रु किलो की भाव में पहुचल बा. त तिल के स्पर्श लाभ ही मिलि पाई.
फेरु भेंट होई,
नमस्कार.