नमस्कार!
का हालिचालि बा आजु अस्टिमी भूखल बानी की नाहीं? भादो के अस्टिमी आ कातिक के एकादसी सबहर ब्रत ह. माने सब सेयान लोग भूखेला. गांव में अस्टिमी के डोल रखाला. बाद में जनलीं की दोलनोत्सव के भोजपुरी रूप डोल ह. अब बहुत जगह डॉल मेला भी लागेला.
रामनवमी से ढेर लोग भादो के अस्टिमी भूखेला. रामनवमी की समय खेतीबारी के काम बहुत रहेला. एतनी घरी खेती के काम कम होला पहिले की जमाना में भोजन के संकट भी रहे. विज्ञान के जय हो कि एइसन एइसन धान गेंहू के बीया उपरवलसि की अन्न के संकट दूर हो गईल. ्कांकरि, खीरा, अमरुत, फूट फल मिलेला. बहुत लोग निर्जला रहे ला. आज के खास प्रसाद ह पन्जीरी (घन्जीरी) धनिया भून के पीस के चीनी पीस के मिला के प्रसाद बनि जाला.
हमरि गांव मे सन साठ पैंसठि की आस पास गांव की बीच में सियाराम दूबे की दुआर पर डोल रखा्त रहे. गांव भर से भेर (चंदा) लिआई. गांव भर के लोग राति के जुटि के बारह बजे ले कीर्तन गाई. ओतनी घरी हमनी का ई जानल जा कि बारह बजे अपने से खीरा फाटि जाला आ भगवान जी बाहर आ जाले.
अब त गांव में कई जगह डोल धराला ठीको बा . सब लोग एक जगह जुटि भी ना पाई.
ई के हऊएं. इनिके कांहे लोग पूजेला. कांहे दिवाना भईल बा लोग. आजु २०१३ माने एकईसवी शताब्दी के दूसरा दसक चलता. विक्रमी सम्वत के २०७० चलता. भारत में कृष्ण लोक मे रमल बाने. धार्मिक कर्मकान्ड से लेके मार्मिक विरह गीत ले कृष्ण छवले बाने. जे जवना रूप में चाहल ओही रूप में पावल. नाचत, गावत, युद्ध करत , साहित्य आ कला क्षेत्र के प्रिय आ वरेण्य हुऊएं देवकी नन्दन, यशोदा नन्दन, केतना त कथा बा कौन कौन गाईं.
जे धर्म मानत होखे, ओकर भगवान हऊए, जे अनीश्वर वादी होखे ओकर आदर्श समाज सेवक हऊएं. धार्मिक कर्मकांड रोकि के गोबर्धन पूजे वाला कृष्ण, योगेश्वर , नटवर नागर, अभूतपूर्व राजनयिक. बिना राजपाट के चक्रवर्ती स्म्राट बनावे वाला कृष्ण. जे जे उनुके जवना रूप में देखल चाहे सबके हऊएं. एइसन महान व्यक्तित्व वाला के जन्मदिन पर उनुकी व्यक्तित्व से कुछु सीखल जा सकेला.
आपन रोग पाप जे दीहल चाहे दे सकेला. मानसिक शान्ति पावल चाहे त पा सकेला. राजनय सीखल चाहे त सिख सकेला.
जवना काम से दूसरे के हित होखे आपन हित होखे. समाज के हित होखे, मानवता के हित होखे ओ काम करबि त ओइजू कृष्ण खडा होके सहायक हो जईहे. काम करेवाला के आत्मविश्वास हऊए कृष्ण.
सभे सुखी रहे, सब निरोग रहे, सबके शुभ होखे. केहू दुख में न रहे.
का हालिचालि बा आजु अस्टिमी भूखल बानी की नाहीं? भादो के अस्टिमी आ कातिक के एकादसी सबहर ब्रत ह. माने सब सेयान लोग भूखेला. गांव में अस्टिमी के डोल रखाला. बाद में जनलीं की दोलनोत्सव के भोजपुरी रूप डोल ह. अब बहुत जगह डॉल मेला भी लागेला.
रामनवमी से ढेर लोग भादो के अस्टिमी भूखेला. रामनवमी की समय खेतीबारी के काम बहुत रहेला. एतनी घरी खेती के काम कम होला पहिले की जमाना में भोजन के संकट भी रहे. विज्ञान के जय हो कि एइसन एइसन धान गेंहू के बीया उपरवलसि की अन्न के संकट दूर हो गईल. ्कांकरि, खीरा, अमरुत, फूट फल मिलेला. बहुत लोग निर्जला रहे ला. आज के खास प्रसाद ह पन्जीरी (घन्जीरी) धनिया भून के पीस के चीनी पीस के मिला के प्रसाद बनि जाला.
हमरि गांव मे सन साठ पैंसठि की आस पास गांव की बीच में सियाराम दूबे की दुआर पर डोल रखा्त रहे. गांव भर से भेर (चंदा) लिआई. गांव भर के लोग राति के जुटि के बारह बजे ले कीर्तन गाई. ओतनी घरी हमनी का ई जानल जा कि बारह बजे अपने से खीरा फाटि जाला आ भगवान जी बाहर आ जाले.
अब त गांव में कई जगह डोल धराला ठीको बा . सब लोग एक जगह जुटि भी ना पाई.
ई के हऊएं. इनिके कांहे लोग पूजेला. कांहे दिवाना भईल बा लोग. आजु २०१३ माने एकईसवी शताब्दी के दूसरा दसक चलता. विक्रमी सम्वत के २०७० चलता. भारत में कृष्ण लोक मे रमल बाने. धार्मिक कर्मकान्ड से लेके मार्मिक विरह गीत ले कृष्ण छवले बाने. जे जवना रूप में चाहल ओही रूप में पावल. नाचत, गावत, युद्ध करत , साहित्य आ कला क्षेत्र के प्रिय आ वरेण्य हुऊएं देवकी नन्दन, यशोदा नन्दन, केतना त कथा बा कौन कौन गाईं.
जे धर्म मानत होखे, ओकर भगवान हऊए, जे अनीश्वर वादी होखे ओकर आदर्श समाज सेवक हऊएं. धार्मिक कर्मकांड रोकि के गोबर्धन पूजे वाला कृष्ण, योगेश्वर , नटवर नागर, अभूतपूर्व राजनयिक. बिना राजपाट के चक्रवर्ती स्म्राट बनावे वाला कृष्ण. जे जे उनुके जवना रूप में देखल चाहे सबके हऊएं. एइसन महान व्यक्तित्व वाला के जन्मदिन पर उनुकी व्यक्तित्व से कुछु सीखल जा सकेला.
आपन रोग पाप जे दीहल चाहे दे सकेला. मानसिक शान्ति पावल चाहे त पा सकेला. राजनय सीखल चाहे त सिख सकेला.
जवना काम से दूसरे के हित होखे आपन हित होखे. समाज के हित होखे, मानवता के हित होखे ओ काम करबि त ओइजू कृष्ण खडा होके सहायक हो जईहे. काम करेवाला के आत्मविश्वास हऊए कृष्ण.
सभे सुखी रहे, सब निरोग रहे, सबके शुभ होखे. केहू दुख में न रहे.