बुधवार, 25 दिसंबर 2013

देवरिया में दूध दही-१

नमस्कार!
हालचाल ठीके बा, जाडा पडे लागल, आजु बिहाने दुआरे पर घूमत घूमत फोटो खींचत रहुई दही वाला घूमत रहुअन. एकाएक मन में अउए कि  दहीवाला के फोटो ले ली. तले ऊ दूर चलि गउअन बाकी फोटो खीचा गउए. आजु सांझि खा ऊ फोटो फेसबुक पर लगा दिहुईं. दन से टीप अऊये " देवरिया" में दही एंगा बिकाला. त हमरी दिमाग में सजांव की नियरे के गांव रंगवली ्के दहीवाली के चेहरा नाचे लगुये.
दही के दूगो रूप ढेर चलेला. सजाव दही आ छिनुई दही. नदिया चाहे कहतरी में दूध के गोइठा कि आग पर देर ले अवंटि के जओरन डालल जाला त खूब मोट साढी वाला दही जामेले ई ह सजाव दही. देवरिया शहर में अबो कांवरि पर कहतरी में दही लेके दहीवाला लोग घूम घूमिके दही बेचेला. दही मंडी भी बा आ दही चूरा के होटल भी.
दही के दुसरका रूप ह छिनुई. उ दही जवना में से घीव छिना जा. कहतरी में से सब साढी निकलले कि बाद  बचेला  ऊ कहाला छिनुई.
रंगवली के दहीवाली मटकी मे दही ले के आवे. ओ दही में छिनुई दही के मथि के खुब पानी मिला के मटकी तैयार. दही लेबे खातिर गेंहू या जौ की दिया जा. दही खरीदे वाला बर्तन  के ढेला से तौलि के चाहे डिकिया की माप से दही मिलि जाउ. हर डोकिया में एगो दही के ठोस टुकडा भी रहे. चिरौरी कईला पर एगो छोटका टुकडा और मिलि जाउ. ओकरी बाद घलुआ.
नमस्कार.
फेरु भेंट होई.

सोमवार, 14 अक्टूबर 2013

नमस्कार!
हालिचालि ठीक बा. असो (२०१३) दशहरा की दीने चित्रा मंडराइल बा. कल्हिये से बरसता. फेसबुक पर तरह-तरह के पोस्ट देखत देखत सजांव के रामलीला मन में उतरे लागल ह. देश में सबसे अधिक सरकार के पइसा खर्च करे वाला इनवरसीटी (ज.ने.वि.) के लोग सब सोचेला बाकी ई त ना कहेला की देश की हर नौजवान के एइसने इनवरसीटी चाहीं.
सजांव के रामलीला तिजि या चौथि से शुरु होखे. प्राइमरी पाठशाला सजांव की तीन ओर खरिहान में कोदो साठी आ घनकोदई के दवरी आ रामलीला आ ओही साथे चना केराव के बावग सब साथे साथे चले. माटी की दीवाल आ खपडा  के स्कूल के क्लास बारी में पेंड की नीचे. जाडा में फील्ड में चले. प्रार्थना "वह शक्ति हमें दो दयानिधे" स्वदेशी नारा की बाद  फील्ड आ कमरा के सफाई सब लइका लोग कूडा बीन के करे. झाडू झंझट खतम. रामलीला मैदान के सफाई भी एही तरे हो जा. लपटौना घास उखारि के कूडा बीन ल सफाई हो गईल. माटी के दू गो चबूतरा बना के दू गो पताका लागे. राम के लाल पताका रावण के काला पताका.

रामलीला के  सब पात्र गांव के लोग रहे. फुलवारी की दिन से भीड बढे लागे. सबसे अधिक भीड  धनुषग्य, विवाह आ दशरथ मरण मे होखे. धनुषजग्गि के दू गो संवाद रावण बालि संवाद आ परसुराम लक्ष्मण संवाद मजेदार होखे.

रामलीला की मेला में (1960) सबसे अधिक सर्व सुलभ मिठाई रहे पट्टी . लकठा, खझुली, बतासा भी मिले. कोदो, धनकोदई देके मनपसन्द मिठाई मिल जा.

रावण जरवला की समय एगो ढेला फेंकला के चलन रहे. लोग की ढेला चलवला में एक दू लोग के कपार फूटे. झगडा के शुरुआत.

तब ना  सिनेमा रहे. ना टीवी. बरात के नाच आ मंडली की बाद रामलीला अभिनय देखला आ मनोरंजन के साधन रहे.
हमनों के रहरि के तीर धनुष बनि जा. जब समय मिले तब रामलीला शुरू. अबो ईहे बुझाला कि ओइसन रमलीला कहीं ना होला. एक बेर राम नगर के रामलीला भी देखले  बानी.

फेरू भेंट होई,
नमस्कार!

बुधवार, 28 अगस्त 2013

डोल

नमस्कार!

का हालिचालि बा आजु अस्टिमी भूखल बानी की नाहीं? भादो के अस्टिमी आ कातिक के एकादसी सबहर ब्रत ह. माने सब सेयान लोग भूखेला. गांव में अस्टिमी के डोल रखाला. बाद में जनलीं की दोलनोत्सव के भोजपुरी रूप डोल ह. अब बहुत जगह डॉल मेला भी लागेला.

रामनवमी से ढेर लोग भादो के अस्टिमी भूखेला. रामनवमी की समय खेतीबारी के काम बहुत रहेला. एतनी घरी खेती के काम कम होला पहिले की जमाना में भोजन के संकट भी रहे. विज्ञान के जय हो कि एइसन एइसन धान गेंहू के बीया उपरवलसि की अन्न के संकट दूर हो गईल. ्कांकरि, खीरा, अमरुत, फूट फल मिलेला. बहुत लोग निर्जला रहे ला. आज के खास प्रसाद ह पन्जीरी (घन्जीरी) धनिया भून के पीस के चीनी पीस के मिला के प्रसाद बनि जाला.

हमरि गांव मे सन साठ पैंसठि की आस पास गांव की बीच में सियाराम दूबे की दुआर पर डोल रखा्त रहे. गांव भर से भेर (चंदा) लिआई. गांव भर के लोग राति के जुटि के बारह बजे ले कीर्तन गाई. ओतनी घरी हमनी का ई जानल जा कि बारह बजे अपने से खीरा फाटि जाला आ भगवान जी बाहर आ जाले.

अब त गांव में कई जगह डोल धराला ठीको बा . सब लोग एक जगह जुटि भी ना पाई.

ई के हऊएं. इनिके कांहे लोग पूजेला. कांहे दिवाना भईल बा लोग. आजु २०१३ माने एकईसवी शताब्दी के दूसरा दसक चलता. विक्रमी सम्वत के २०७० चलता. भारत में कृष्ण लोक मे रमल बाने. धार्मिक कर्मकान्ड से लेके मार्मिक विरह गीत ले कृष्ण छवले बाने. जे जवना रूप में चाहल  ओही रूप में पावल. नाचत, गावत, युद्ध करत , साहित्य आ कला क्षेत्र के प्रिय आ वरेण्य हुऊएं देवकी नन्दन, यशोदा नन्दन, केतना त कथा बा कौन कौन गाईं.

जे धर्म मानत होखे, ओकर भगवान हऊए, जे अनीश्वर वादी होखे ओकर आदर्श समाज सेवक हऊएं. धार्मिक कर्मकांड रोकि के गोबर्धन पूजे वाला कृष्ण, योगेश्वर , नटवर नागर, अभूतपूर्व राजनयिक. बिना राजपाट के  चक्रवर्ती स्म्राट बनावे वाला कृष्ण. जे जे उनुके जवना रूप में देखल चाहे सबके हऊएं. एइसन महान व्यक्तित्व वाला के जन्मदिन पर उनुकी व्यक्तित्व से कुछु सीखल जा सकेला.

आपन रोग पाप जे दीहल चाहे दे सकेला. मानसिक शान्ति पावल चाहे त पा सकेला. राजनय सीखल चाहे त सिख सकेला.

जवना काम से दूसरे के हित होखे आपन हित होखे. समाज के हित होखे, मानवता के हित होखे ओ काम करबि त ओइजू कृष्ण खडा होके सहायक हो जईहे. काम करेवाला के आत्मविश्वास हऊए कृष्ण.

सभे सुखी रहे, सब निरोग रहे, सबके शुभ होखे. केहू दुख में न रहे.





सोमवार, 26 अगस्त 2013

भदवारी में बैठे ठाले-१

नमस्कार!
हालचाल ठीक बा सावन की सूखा की बाद भादो टिपटिपाता. निमने बा सवनसुख निमन बाकी भदवसुख ना निमन. कई गो भाषा कहीं चाहॅ बोली कही मरले की कगार पर बा. लोग बचावे खाती हलचलि कईले बा. भोजपुरियो के इहे दशा रहल ह. ई बोली पिछडन के मानलि जाले. कुछु लोग जागल आ विश्व भोजपुरी सम्मेलन के आयोजन होखे लागल पहिला सम्मेलन देउरिये में भईल. एगो पत्रिको निकलेले एके बेर देखले बानी. नीक लागल बाकि ओकर नियमित ग्राहक ना बनि पवली. एक दिन देखलीं कि विकिपीडिया पर भोजपुरी बा. आ मांग होता कि एके संविधान की ओर से भी मान लिहल जाउ. देखी का होला.

आजु काल्हि लोग पश्चिमी संस्कृति के गरिया गरिया के अपनावत चलि जाता. बलात्कार आ सामूहिक बलात्कार अब खबर में छपाये लागल त लोग घबराये लागल. बाकी का का करता ओके ठीके मानेला. आखिर ई संस्कृति का ह पूरब की संसकृति में सचहूं कुछु बा ?. रेडियो, टीवी, सिनेमा के दोष दीहल जाई त ऊ लोग कही हमार कौन दोष हम त ऊहे देखाव तानी जवन होला. का सचहू इहे बाति बा. कपडा के बाति होई त लोग कहे लागी कि ई अधिकार के बाति ह जेकरा जवन मन करे तवन पहिने. ई सोचे वाली बाति बा कि आखिर पूरा देश एतना कामुक काहे हो गईल बा .
            ''कलिकाल बिहाल किये मनुजा , नहिं मानत क्वौ अनुजा तनुजा,'' -रामचरित मानस उ.का.१०६-५

लोग अपनी मन के ही कईल चाहता ओकरा ना समाज से डर बा ना कानून से,  ्नैतिकता (धर्म) के के पुछेला. भारत की संयुक्त परिवार की घर में मजाक बहुत होला ई सब मजाक मर्द मेहरारू की सम्बन्ध पर होला. देवर भाभी , जीजा साली ना जाने और कौन कौन. गांव के गांव, तहसील के तहसील, जिला के जिला, प्रदेश के प्रदेश अब त देश के देश के लोग बहनोई साला की रिश्ता की नाम पर जौन जौन बाति कहत रहत ओके सुनि के का होई.

भोजपुरी गाना में अब खाली नंगई चलत बा. जौना सडक से चलि जाई गुजरे वाली हर महिला की ऊपर द्विअर्थी आवाज सुने के मिलि जाइ. ई हे भारतीय संस्कृति ह. आकि एके अगरेज बढावा देले बाडे स.

कपडा भी हर समय आ परिवेश आ मौसम की अनुसार पहिरल जाला. कपडा भी मनोभव आ रस के स्रिजन करेला. सुते कि समय के कपडा कचहरी के कपडा खेलि के कपडा अलग होला. अब सब महिला लोग हरदम नचनिया के कपडा पहिरे लागे. सुतेवाला कपडा पहिन के लोग स्कूल आ आफिस जाये लागे त कु्छु गडबड होई.

हमरी कहले के मतलब ई बा कि चारुओर जब कामुकता के वातावरण बनावल जाइ त ओकर प्रभाव होई. ई प्रभाव तब देखे के मिली जब कहीं भी अपराधी का ई लागे लागि कि उ सफल हो जाई.

एकरी खातिर सभ्य समाज का चाही कि ए तरह की स्थिति में योगदान करे वाला सब कारक के पहिचान कके ओके सुधारे के उपाइ कईल जा. न्याय प्रणाली के दारोमदार पलिस ,वकील आ जज लोग पर बा ऊ लोग मन से रकल चाहि तबे ई रुकि.

त वस्तुनिष्ठ विचार कईल जा आ सुधार के प्रयास कईल जा आ अपनी व्यव्हार पर ध्यान दीहल जा कि हमसे कौन कवन गलती होता आ ओके कैसे सुधारल जा सके ला.

फेरू भेंट होई.

नमस्कार!

बुधवार, 15 मई 2013

संघे लागल लंगडो देवालि फानेली

संघे लागल लंगडो देवालि फानेली

नमस्कार! 


हालिचालि त सब ठीके बा . बाकी जहिया से सुनले बानी कि दिल्ली विश्व्विद्यालय में चारि सालि के बीए आठ सेमेस्टर  में पूरा होई तहिये से भोजपुरी के कहावत मने में घूमता. माननीय प्रणव जी जहिया से राष्ट्रपति भईल बानी उच्चशिक्षा पर चिंतित बानी .( इहे चिन्ता उहांका वित्तमन्त्री रहते हुये कईले रहिती त ई हालि ना भईल रहित.)  उहां का उच्चशिक्षा की गुणवत्ता खातिर चिन्तित बानी एसे दिल्ली के कुलपति जी हार्वर्ड आ स्टेन्फोर्ड  इनवरसिटी की नकल पर  पाठ्यक्रम  बना के लागू करावतानी. जेकरी लगे पावर रहेला ओकर बाति जल्दी केहू काटेला नाही. त सब कुछु पास ओस हो गईल . अब लईका लोग पढि के निकलते नोबुल प्राइज मारि देई लोग.

किताब, मास्टर, कलास, हास्टल आ औरु कुल पढावे खातिर जरूरी सामान ,लाइब्रेरी, लैबोरेटरी आ मेज कुर्सी के कौनो जरूरत नईखे. लईका लोग दिल्ली में नाव लिखवा के मुखर्जी नगर आ ढाकागांव में बनाई खाई आ सेमेस्टर में तड से बाजी मारि ले जाई. अब ई बूझि ली कि सब कलक्टर  आ एस्पी दिल्ली के होइहे. जौनिगा इन्डिया शाइनिंग हो गईल ओहींगा भारत निर्माण हो जाई. आपरेशन ब्लैकबोर्ड के नाव त सुनलि ही होखबि सभे, आरे उहे राजीव गान्धी वाला जौना समय रूपया में दस पैसा गांव में पहुंचे. त ऊ आपरेशन कच्चा निकलल त सर्व शिक्षा अभियान चलल ओकरि खातिर ना त कमरा बा ना मास्टर. तले झट देना आरटीई आ गईल.


एकर माने ई भईल की जे अपनी लईका के ना पढाई ओही के दोष. आन्ही मान्ही दोष. एहू में पचीस परसेन्ट रिजरवेशन बा. आ हालि ईबा कि दिल्ली में गार्जीयन लोग के नाव लिखववला में नानी याद आ जाता. जे तनिको हुशियार बा उ एके लईका की बाद नसबन्दी करा लेता. आ देहात के हालि जाने के होखे त सरकारी रिपोट पढि लेई. कुल मिलाके हम ई कहल चाहत बानी कि पहिले प्राथमिक शिक्षा के गुणवत्ता, माध्यमिक शिक्षा के गुणवत्ता बढा ली सभे तब ओकरिये साथे उच्चशिक्षा के भी मानक ठीक क लेई सभे.

खाली लन्दन आ अमेरिका मति देखी रूस, चीन आ जापान के भी देखेके चाही. एकरी आधार पर अपनी देश के आपन नीति बनाई. जईसन सन्सद चली ओहींगा स्कूल चली. रूपया देके जे मास्टर, प्रोफेसर, प्रिंसिपल आ कुलपति  बनी ऊ का पढाई. इन्तिहान में नकल, सिफारिस आ पईसा पर नम्बर, चमचागीरि में टपौवल. इहे भारत के गुणवत्ता हो गईल बा. त पहिले संसद के गुण्वत्ता सुधरो. यूजीसी के पर्सेन्टेज बन्द होखे. वस्तुनिष्ठ चयन होखे त देखी का से का हो जाता.

त पहिले आपन गोड बरियार कईला के जरूरति बा फेरू कूदी सबसे ऊंचे कूदीं.

फरू भेंट होई..

नमस्कार!