शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011

काका के कंदील

नमस्कार ! 
हालचाल ठीक बानू...


दिया दियारी बीति गईल. आजू गोधनो कुटा गईल. आजु से पीडिया  लागि जाई. कई गो तिहवार ऐसन होले स जवना के समझल कुछु कठिन होला.ओही में गोधना अ पीडिया ह. चली अबहीं त बाति काका के कंदील के बा. ई बाति तबके ह जब हम बिजुली की बारे जानतो ना रहनी. दिया दियारी कि दू  दिन पहिले घर दुआर के खूब सफाई शुरू होजा. एक दिन पहिले घूरा पर जम के दिया निकाल दिहल जा. दिया दियारी की दीने सवेरे कोहार दिया लेके आवें. दया की साथे घंटी (घाँटी ) जांत, भरुका, चौभरुका भी किना जा .उपरी बेरा ( तिजहरिया) दिया के पानी में भेंके निकाल के पीढ़ा पर उलटा ध दीहल जा. माई बतिहर बनावें. तेलिन तेल लेके आवें  टीसी के तेल दिया खाती आ कडू (सरसों) के तेल तरकारी खातिर डालडा तब मिलल शुरू हो गई रहे जे करा गाई भईस रहे ओकरा घीव रहे बाकी लोग तीसी की तेल में पूड़ी बनादे.  
ज्यों किरिन डूबे  कनिया तुलसी जी के दिया बारी दें. ओकरी बाद थरिया में दीया लेके चारू ओर धराए लागे. थोद्की सा पुरनका माटी के घर के याद बा जवना में ओसारा में नीचे दिया धरा जा. नाद खूंटा सब पर दीया धरा जा . लईका माटी के घाँटी बजावत अपनी अपनी घर के दीया के रखवारी पर जुटी जा. कुछु लईका  मौक़ा पावते दूसरा की दुवार से दिया उठा के अपनी दुआर पर राखी दें. थोड़े देर खूब अन्हार होजा आसब लोग खाए की तैयारी में लागि जा. विशिष्ट व्यंजन गर काटना ओल के चोखा आ बरी बारा.होगईल दिवाली. लोग खुश दिया जरी गईल केकरा केतना दीया किनाइल  आ केतना तेल लागल एकर लेखा दूसरे दीने होखे.


दिवाली की बिहान भईला खूब सबेरे उठिके अपनी दीया की साथ साथ  दूसरों की दुआर से लोग दीया उठाले. फेरु दीया के पानी में भेंके  छेदनी से छेदी के तरजूई बने आ जांत तरजूई के खेली आ झगरा,झोंटा झोटवुअली होखे.


दिवाली आवे की साथ काका कंदील बनावे की तैयारी में लागि जासु लारी की बाजार से झिलझिलवा रंगीन कागज आ रस्सी आवे. बॉस के कमची चाहे कंडा लेके नाप नापी के काताल जा नीचे दफ्ती लागे आ पिसान की लेई से लकड़ी की ढांचा पर  झिलझिलवा रंगीन कागज़ साटी के सुखा के  धरा जा फेरू खूब बडहन बांस काटी के साजी के ऊपर एगो घिरनी बन्हा. अब बॉस के खूब गहीर गड़हा खोनिके गाड़ी के घिरनी की सहारे कंदील के ऊपर चढ़ा दीहल जा. काका राती खा  ढेबरी में माटी के तेल भरिके ओके ज़रा के  कंदील के नीचे उतारी के दफ्ती पर ढेबरी धके धीरे धीरे कंदील के ऊपर चढ़ा दे.  


कंदील ( आकाश दीप ) नीचे सचहूँ आकाश दीप बुझा. गाँव के कई लोग कंदील बनावे .सब चाहे कि ओकर कंदील सबसे बडहन आ सबसे ऊंचे तक पहुंचे आ खूब देर तक जरे.


ऊ दीया आ ऊ कंदील आजु की बिजुली की झालर आ राकेट फुलझडी पड़ाका सबके फेल करे वाला लागेला.



रविवार, 23 अक्टूबर 2011

टीए डीए गच्च

नमस्कार !

हाल चाल ठीक बा नू !

एतनी घरी बाभन आ अन्ना के टीम पर चारू ओर हल्ला बोल बा. भारत में जौन कुछु खराबी बा सबकर जिम्मेदार बाभन लोग बा. आ अन्ना की टीम जईसन भ्रष्ट लोग कहीं नईखे. अन्ना के टीम कहता की सरकार सख्त से सख्त कानून बनाके ओके लागू करे त भारत के भ्रष्टाचार बहुत कम हो जाई. मेट्रो से लेके टोला तक अन्ना चर्चा में बाने, लोग चाहता कि भ्रष्टाचार खतम हो जाऊ. बाकी नेता, अफसर, सफेदपोश लोग मन से चाहत नईखे.केहू कहता कि सब लोग ईमानदार हो जाऊ त भ्रष्टाचार खतम हो जाई. केहू कहता कि सब लोग चाहता कि ओके छोडिके सब ईमानदार हो जाऊ.

हमरी देखला में त ई लागाता कि कि जब सख्त कानून बनी जाई आ सख्ती से सबकी ऊपर समान भाव से लागू होई  आ मुकदमा के फैसला जल्दी आई त भ्रष्टाचार मिटी. कानून बनावे वाला आ कानून के रक्षक लोग पर भी कानून समान रही. जब हर अपराधी के जल्दी से दंड लागी त  भारतवासी लोग भी कही सकी कि हमहू ईमानदार हई. करिखा पोति के जगतगुरु कईसे बनल जाई.

भारत के संविधान ही नवका स्मृति ह . ओके बनावे में नेता आ बडका अधिकारी लोग रहे आ ऊ लोग अपना के बचावे के उपाइ कईले बा. त समता कहा  बा कानून एके लेखे कहाँ बा पूर्व सांसद लोग जेल के हवा खात रहे आ वर्त्तमान सांसद की गिरफ्तारी के अनुमति मंगाती रहे. बाकि नवका बाभन लोग खाली बाभन जाति के मनुस्मृति की नाम पर गरियावता. जौन  कानून ह उहे नैतिकता ह आ मानवता भी. यदि कानून नैतिक नईखे, मानवीय नईखे त ओके बदलीये देबे के चाही.

एतनी घरी किरण बेदी की यात्रा भत्ता के गोलमाल के बहुत चर्चा बा. गलती त कईलही बाड़ी बाक़ी ओईसन गलती भारत के संकृति बनी गईल बा. त अब ईहे कहल जा सकेला कि जे भी लोग चाहता कि भ्रष्टाचार मिटे उ गलती कईल छोड़े. आ भ्रष्टाचार  भ्रष्टाचारी दुनू से एके साथे  लड़े.

एगो समाचार निकलल रहल ह कि कुछु बड़े आदमी लोग रेलवे के मासिक टिकट ( ऍम एस टी)  लेके  स्लीपर में पकड़ा गईल. बड़ा हँसी भईल बाकी रोज लाखों लोग ए गलती के करता. त का करे के चाही ? भाई अब अपनी भ्रष्टाचार से भी लड़े के पड़ी.

बडका बडका लोग टीए, डीए भी लेलेला आ खींची के खाला आ वाहन सुख भी ले लेला त हो गईल भईया टीए डीए गच्च. जे ना टीए डीए गच्च करेला ओके लोग कहेला बडका हरिश्चंद बनेलें.

"कलयुग में हरिश्चंद बनल भी बहुत बड़ा नादानी ह "

सोचीं रवुआ सभे के का राय बा.

धनवंतरी जयन्ती , हनुमान जयन्ती, दीपावली, चित्रगुप्त जयन्ती आ भैयादूज पर हार्दिक शुभकामना की साथ.

रउरे सभे के-
जय प्रकाश

फेरु भेंट होई.