नमस्कार !
हालचाल ठीक बानू...
दिया दियारी बीति गईल. आजू गोधनो कुटा गईल. आजु से पीडिया लागि जाई. कई गो तिहवार ऐसन होले स जवना के समझल कुछु कठिन होला.ओही में गोधना अ पीडिया ह. चली अबहीं त बाति काका के कंदील के बा. ई बाति तबके ह जब हम बिजुली की बारे जानतो ना रहनी. दिया दियारी कि दू दिन पहिले घर दुआर के खूब सफाई शुरू होजा. एक दिन पहिले घूरा पर जम के दिया निकाल दिहल जा. दिया दियारी की दीने सवेरे कोहार दिया लेके आवें. दया की साथे घंटी (घाँटी ) जांत, भरुका, चौभरुका भी किना जा .उपरी बेरा ( तिजहरिया) दिया के पानी में भेंके निकाल के पीढ़ा पर उलटा ध दीहल जा. माई बतिहर बनावें. तेलिन तेल लेके आवें टीसी के तेल दिया खाती आ कडू (सरसों) के तेल तरकारी खातिर डालडा तब मिलल शुरू हो गई रहे जे करा गाई भईस रहे ओकरा घीव रहे बाकी लोग तीसी की तेल में पूड़ी बनादे.
ज्यों किरिन डूबे कनिया तुलसी जी के दिया बारी दें. ओकरी बाद थरिया में दीया लेके चारू ओर धराए लागे. थोद्की सा पुरनका माटी के घर के याद बा जवना में ओसारा में नीचे दिया धरा जा. नाद खूंटा सब पर दीया धरा जा . लईका माटी के घाँटी बजावत अपनी अपनी घर के दीया के रखवारी पर जुटी जा. कुछु लईका मौक़ा पावते दूसरा की दुवार से दिया उठा के अपनी दुआर पर राखी दें. थोड़े देर खूब अन्हार होजा आसब लोग खाए की तैयारी में लागि जा. विशिष्ट व्यंजन गर काटना ओल के चोखा आ बरी बारा.होगईल दिवाली. लोग खुश दिया जरी गईल केकरा केतना दीया किनाइल आ केतना तेल लागल एकर लेखा दूसरे दीने होखे.
दिवाली की बिहान भईला खूब सबेरे उठिके अपनी दीया की साथ साथ दूसरों की दुआर से लोग दीया उठाले. फेरु दीया के पानी में भेंके छेदनी से छेदी के तरजूई बने आ जांत तरजूई के खेली आ झगरा,झोंटा झोटवुअली होखे.
दिवाली आवे की साथ काका कंदील बनावे की तैयारी में लागि जासु लारी की बाजार से झिलझिलवा रंगीन कागज आ रस्सी आवे. बॉस के कमची चाहे कंडा लेके नाप नापी के काताल जा नीचे दफ्ती लागे आ पिसान की लेई से लकड़ी की ढांचा पर झिलझिलवा रंगीन कागज़ साटी के सुखा के धरा जा फेरू खूब बडहन बांस काटी के साजी के ऊपर एगो घिरनी बन्हा. अब बॉस के खूब गहीर गड़हा खोनिके गाड़ी के घिरनी की सहारे कंदील के ऊपर चढ़ा दीहल जा. काका राती खा ढेबरी में माटी के तेल भरिके ओके ज़रा के कंदील के नीचे उतारी के दफ्ती पर ढेबरी धके धीरे धीरे कंदील के ऊपर चढ़ा दे.
कंदील ( आकाश दीप ) नीचे सचहूँ आकाश दीप बुझा. गाँव के कई लोग कंदील बनावे .सब चाहे कि ओकर कंदील सबसे बडहन आ सबसे ऊंचे तक पहुंचे आ खूब देर तक जरे.
ऊ दीया आ ऊ कंदील आजु की बिजुली की झालर आ राकेट फुलझडी पड़ाका सबके फेल करे वाला लागेला.
हालचाल ठीक बानू...
दिया दियारी बीति गईल. आजू गोधनो कुटा गईल. आजु से पीडिया लागि जाई. कई गो तिहवार ऐसन होले स जवना के समझल कुछु कठिन होला.ओही में गोधना अ पीडिया ह. चली अबहीं त बाति काका के कंदील के बा. ई बाति तबके ह जब हम बिजुली की बारे जानतो ना रहनी. दिया दियारी कि दू दिन पहिले घर दुआर के खूब सफाई शुरू होजा. एक दिन पहिले घूरा पर जम के दिया निकाल दिहल जा. दिया दियारी की दीने सवेरे कोहार दिया लेके आवें. दया की साथे घंटी (घाँटी ) जांत, भरुका, चौभरुका भी किना जा .उपरी बेरा ( तिजहरिया) दिया के पानी में भेंके निकाल के पीढ़ा पर उलटा ध दीहल जा. माई बतिहर बनावें. तेलिन तेल लेके आवें टीसी के तेल दिया खाती आ कडू (सरसों) के तेल तरकारी खातिर डालडा तब मिलल शुरू हो गई रहे जे करा गाई भईस रहे ओकरा घीव रहे बाकी लोग तीसी की तेल में पूड़ी बनादे.
ज्यों किरिन डूबे कनिया तुलसी जी के दिया बारी दें. ओकरी बाद थरिया में दीया लेके चारू ओर धराए लागे. थोद्की सा पुरनका माटी के घर के याद बा जवना में ओसारा में नीचे दिया धरा जा. नाद खूंटा सब पर दीया धरा जा . लईका माटी के घाँटी बजावत अपनी अपनी घर के दीया के रखवारी पर जुटी जा. कुछु लईका मौक़ा पावते दूसरा की दुवार से दिया उठा के अपनी दुआर पर राखी दें. थोड़े देर खूब अन्हार होजा आसब लोग खाए की तैयारी में लागि जा. विशिष्ट व्यंजन गर काटना ओल के चोखा आ बरी बारा.होगईल दिवाली. लोग खुश दिया जरी गईल केकरा केतना दीया किनाइल आ केतना तेल लागल एकर लेखा दूसरे दीने होखे.
दिवाली की बिहान भईला खूब सबेरे उठिके अपनी दीया की साथ साथ दूसरों की दुआर से लोग दीया उठाले. फेरु दीया के पानी में भेंके छेदनी से छेदी के तरजूई बने आ जांत तरजूई के खेली आ झगरा,झोंटा झोटवुअली होखे.
दिवाली आवे की साथ काका कंदील बनावे की तैयारी में लागि जासु लारी की बाजार से झिलझिलवा रंगीन कागज आ रस्सी आवे. बॉस के कमची चाहे कंडा लेके नाप नापी के काताल जा नीचे दफ्ती लागे आ पिसान की लेई से लकड़ी की ढांचा पर झिलझिलवा रंगीन कागज़ साटी के सुखा के धरा जा फेरू खूब बडहन बांस काटी के साजी के ऊपर एगो घिरनी बन्हा. अब बॉस के खूब गहीर गड़हा खोनिके गाड़ी के घिरनी की सहारे कंदील के ऊपर चढ़ा दीहल जा. काका राती खा ढेबरी में माटी के तेल भरिके ओके ज़रा के कंदील के नीचे उतारी के दफ्ती पर ढेबरी धके धीरे धीरे कंदील के ऊपर चढ़ा दे.
कंदील ( आकाश दीप ) नीचे सचहूँ आकाश दीप बुझा. गाँव के कई लोग कंदील बनावे .सब चाहे कि ओकर कंदील सबसे बडहन आ सबसे ऊंचे तक पहुंचे आ खूब देर तक जरे.
ऊ दीया आ ऊ कंदील आजु की बिजुली की झालर आ राकेट फुलझडी पड़ाका सबके फेल करे वाला लागेला.