शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

गाँधी की गाल पर थपरा.

नमस्कार!
हालिचालि ठीक बानू.

काल्हि से टीवी गरमाइल बा थपरा पर. एगो सरदार जी थपरा से सुखराम के मरलें, फेरु काल्हि पवार के मारि दिहलें. लोकतंत्र में थपरा के कौन काम. गाँधी जी कहले रहलें कि केहू एगो गाल पर थपरा मारे त दुसरका गाल आगे क देबे के चाहीं. कांग्रेसी लोग गाँधी जी के वारिस मानेला लोग बाकिर अपना के गांधीवादी ना मानेला. जे एलोगन के करिया झंडा ले देखा देला ओके पीटबो करेला लोग आ पिटवईबो  करेला. सरदार जी खूब पीटईले जेल गईलें, अब मुकदमा लडीहें. सब पार्टी निंदा करता. जे ना करी ऊ पिछुआ जाई. बेचारे अन्ना घेराइल बाने. पवार जी कुर्सी खातिर कांग्रेस छोडि दिहलें ,कुर्सी खातिर सहयोगी की रूप में काग्रेस की साथे बाने. सहयोगी दल वीआईपी होला. त ई राष्ट्रवादी कांग्रेस के लोग अब आपन  ताकत देखावे खातिर आम जनता के जीवन त्रस्त करीलोग. पवार जी अन्ना की बयान पर कहलें ह की ई नया गांधीवाद ह. अन्ना जी अब केहू के वाद वाला नईखे लोग कहता मैं अन्ना हूँ.

आजु से खुदरा व्यापार में विदेशी कंपनी कूदी . केंद्र के गांधीवादी सरकार के मंत्री लोग मंजूरी देदी. स्वदेशी की जगह विदेशी. गांधी जी भी भारत के वसुधैव कुटुम्बकम नारा जानत होइहन बाक़ी स्वदेशी के नारा काहे दिहलन. काहे कि देश की आजादी आ अर्थ व्यवस्था खातिर ई जरूरी रहे. जवाहर जी समाजवाद आ सहकारिता की बल पर देश के आगे बढावल चाहत रहलें. भ्रष्टाचार सब खा घललसी. भ्रष्टाचार के उपेक्षा कईल  बहुत महंग परल. आजु फेरु विदेशी आके घरेलू व्यापार करिहें. आ इहा से मुनाफ़ा लेके अपनी घरे जईहें. ई असल में गाँधी की गाल पर थपरा बा. के धराई. के के जेल भेजल जाई?

कबो हम छोटका दर्जा में कृषि विज्ञान की किताब में गेहू धरे खातिर अमेरिका की सेलो के फोटो देखले रहलीं आ ओकर लाभ पढले रहलीं. लेकिन भारत के योजनाकार लोग जेतना के गेहूँ सड़ा देला ओतना में सेलो बना दीत त अनाज सुरक्षित रहित. खेत से सब्जी घर तक पहुचत पहुचत एक चौथाई से अधिका सरि जाता. ओके बढ़िया उपाइ नईखे. आज सहकारिता के भ्रष्टाचार से बचावल गईल रहित त जवानीगा अमूल भारत आ सहकारिता के  शान बनिके खड़ा बा ओहींगा गृहस्थी के  हर सामान उचित मूल्य पर मिलित. अब्बो समय बा सहकारिता की बल पर विदेशी परचूनिहा लुटेरन से बचावल जा सकेला. 

वदेशी निवेश की नाम पर  देश बिकाता आ देश के काला धन विदेश के चमकावता, बाक़ी कांग्रेस की राहुल के गुस्सा नईखे आवत, ऊ आके यूपी की जनता के धमका जाताने. 

देश के मंत्री लोग ई फैसला लेके गाँधी जी की गाल पर थपरा मरले बा लोग. बाक़ी गांधी जी त आपन दूसरा गाल आगे क दीहे.



शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011

काका के कंदील

नमस्कार ! 
हालचाल ठीक बानू...


दिया दियारी बीति गईल. आजू गोधनो कुटा गईल. आजु से पीडिया  लागि जाई. कई गो तिहवार ऐसन होले स जवना के समझल कुछु कठिन होला.ओही में गोधना अ पीडिया ह. चली अबहीं त बाति काका के कंदील के बा. ई बाति तबके ह जब हम बिजुली की बारे जानतो ना रहनी. दिया दियारी कि दू  दिन पहिले घर दुआर के खूब सफाई शुरू होजा. एक दिन पहिले घूरा पर जम के दिया निकाल दिहल जा. दिया दियारी की दीने सवेरे कोहार दिया लेके आवें. दया की साथे घंटी (घाँटी ) जांत, भरुका, चौभरुका भी किना जा .उपरी बेरा ( तिजहरिया) दिया के पानी में भेंके निकाल के पीढ़ा पर उलटा ध दीहल जा. माई बतिहर बनावें. तेलिन तेल लेके आवें  टीसी के तेल दिया खाती आ कडू (सरसों) के तेल तरकारी खातिर डालडा तब मिलल शुरू हो गई रहे जे करा गाई भईस रहे ओकरा घीव रहे बाकी लोग तीसी की तेल में पूड़ी बनादे.  
ज्यों किरिन डूबे  कनिया तुलसी जी के दिया बारी दें. ओकरी बाद थरिया में दीया लेके चारू ओर धराए लागे. थोद्की सा पुरनका माटी के घर के याद बा जवना में ओसारा में नीचे दिया धरा जा. नाद खूंटा सब पर दीया धरा जा . लईका माटी के घाँटी बजावत अपनी अपनी घर के दीया के रखवारी पर जुटी जा. कुछु लईका  मौक़ा पावते दूसरा की दुवार से दिया उठा के अपनी दुआर पर राखी दें. थोड़े देर खूब अन्हार होजा आसब लोग खाए की तैयारी में लागि जा. विशिष्ट व्यंजन गर काटना ओल के चोखा आ बरी बारा.होगईल दिवाली. लोग खुश दिया जरी गईल केकरा केतना दीया किनाइल  आ केतना तेल लागल एकर लेखा दूसरे दीने होखे.


दिवाली की बिहान भईला खूब सबेरे उठिके अपनी दीया की साथ साथ  दूसरों की दुआर से लोग दीया उठाले. फेरु दीया के पानी में भेंके  छेदनी से छेदी के तरजूई बने आ जांत तरजूई के खेली आ झगरा,झोंटा झोटवुअली होखे.


दिवाली आवे की साथ काका कंदील बनावे की तैयारी में लागि जासु लारी की बाजार से झिलझिलवा रंगीन कागज आ रस्सी आवे. बॉस के कमची चाहे कंडा लेके नाप नापी के काताल जा नीचे दफ्ती लागे आ पिसान की लेई से लकड़ी की ढांचा पर  झिलझिलवा रंगीन कागज़ साटी के सुखा के  धरा जा फेरू खूब बडहन बांस काटी के साजी के ऊपर एगो घिरनी बन्हा. अब बॉस के खूब गहीर गड़हा खोनिके गाड़ी के घिरनी की सहारे कंदील के ऊपर चढ़ा दीहल जा. काका राती खा  ढेबरी में माटी के तेल भरिके ओके ज़रा के  कंदील के नीचे उतारी के दफ्ती पर ढेबरी धके धीरे धीरे कंदील के ऊपर चढ़ा दे.  


कंदील ( आकाश दीप ) नीचे सचहूँ आकाश दीप बुझा. गाँव के कई लोग कंदील बनावे .सब चाहे कि ओकर कंदील सबसे बडहन आ सबसे ऊंचे तक पहुंचे आ खूब देर तक जरे.


ऊ दीया आ ऊ कंदील आजु की बिजुली की झालर आ राकेट फुलझडी पड़ाका सबके फेल करे वाला लागेला.



रविवार, 23 अक्टूबर 2011

टीए डीए गच्च

नमस्कार !

हाल चाल ठीक बा नू !

एतनी घरी बाभन आ अन्ना के टीम पर चारू ओर हल्ला बोल बा. भारत में जौन कुछु खराबी बा सबकर जिम्मेदार बाभन लोग बा. आ अन्ना की टीम जईसन भ्रष्ट लोग कहीं नईखे. अन्ना के टीम कहता की सरकार सख्त से सख्त कानून बनाके ओके लागू करे त भारत के भ्रष्टाचार बहुत कम हो जाई. मेट्रो से लेके टोला तक अन्ना चर्चा में बाने, लोग चाहता कि भ्रष्टाचार खतम हो जाऊ. बाकी नेता, अफसर, सफेदपोश लोग मन से चाहत नईखे.केहू कहता कि सब लोग ईमानदार हो जाऊ त भ्रष्टाचार खतम हो जाई. केहू कहता कि सब लोग चाहता कि ओके छोडिके सब ईमानदार हो जाऊ.

हमरी देखला में त ई लागाता कि कि जब सख्त कानून बनी जाई आ सख्ती से सबकी ऊपर समान भाव से लागू होई  आ मुकदमा के फैसला जल्दी आई त भ्रष्टाचार मिटी. कानून बनावे वाला आ कानून के रक्षक लोग पर भी कानून समान रही. जब हर अपराधी के जल्दी से दंड लागी त  भारतवासी लोग भी कही सकी कि हमहू ईमानदार हई. करिखा पोति के जगतगुरु कईसे बनल जाई.

भारत के संविधान ही नवका स्मृति ह . ओके बनावे में नेता आ बडका अधिकारी लोग रहे आ ऊ लोग अपना के बचावे के उपाइ कईले बा. त समता कहा  बा कानून एके लेखे कहाँ बा पूर्व सांसद लोग जेल के हवा खात रहे आ वर्त्तमान सांसद की गिरफ्तारी के अनुमति मंगाती रहे. बाकि नवका बाभन लोग खाली बाभन जाति के मनुस्मृति की नाम पर गरियावता. जौन  कानून ह उहे नैतिकता ह आ मानवता भी. यदि कानून नैतिक नईखे, मानवीय नईखे त ओके बदलीये देबे के चाही.

एतनी घरी किरण बेदी की यात्रा भत्ता के गोलमाल के बहुत चर्चा बा. गलती त कईलही बाड़ी बाक़ी ओईसन गलती भारत के संकृति बनी गईल बा. त अब ईहे कहल जा सकेला कि जे भी लोग चाहता कि भ्रष्टाचार मिटे उ गलती कईल छोड़े. आ भ्रष्टाचार  भ्रष्टाचारी दुनू से एके साथे  लड़े.

एगो समाचार निकलल रहल ह कि कुछु बड़े आदमी लोग रेलवे के मासिक टिकट ( ऍम एस टी)  लेके  स्लीपर में पकड़ा गईल. बड़ा हँसी भईल बाकी रोज लाखों लोग ए गलती के करता. त का करे के चाही ? भाई अब अपनी भ्रष्टाचार से भी लड़े के पड़ी.

बडका बडका लोग टीए, डीए भी लेलेला आ खींची के खाला आ वाहन सुख भी ले लेला त हो गईल भईया टीए डीए गच्च. जे ना टीए डीए गच्च करेला ओके लोग कहेला बडका हरिश्चंद बनेलें.

"कलयुग में हरिश्चंद बनल भी बहुत बड़ा नादानी ह "

सोचीं रवुआ सभे के का राय बा.

धनवंतरी जयन्ती , हनुमान जयन्ती, दीपावली, चित्रगुप्त जयन्ती आ भैयादूज पर हार्दिक शुभकामना की साथ.

रउरे सभे के-
जय प्रकाश

फेरु भेंट होई.

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

चवन्नी आ पेट्रोल

नमस्कार!
हालिचालि ठीक बानू!

बड़का गाँव माने ग्लोबल विलेज में चवन्नी हेरा गईली . अब भोजपुरी में एगो गाना बने के चाही चवन्नी हेरा गईली दईया रे. हेरईली त एईसन हेरईली की अब मिलबे ना करीहें. हेराईल त बहुत दीन से रहली ह बाक़ी कहू का कौनो फिकिर ना रहल ह. आज  की मनारेगा की ज़माना में चवन्नी के केहू का बूझत बा. बाकिर सरकार एकाएक इनकी हेरईला से कुछु फिकिर में आ गईली ह त सोचलसी  ह अब एके दाखिल दफ्तर  क देबे के चाही. त डुगडुगी बाजि गईल ह की पहली जुलाई से चवन्नी यानी की पचीस पैसा के सिक्का बंद. चवन्नी गायब. ई सूनिके तमाम पुरनका लोग का चवन्नी के जलवा मन परे लागल ह. आ चवन्नी के चर्चा शुरू हो गईल ह.

हमारा बुझाता की चवन्नी शब्द भोजपुरी के ह एसे चवन्नी की बारे में भोजपुरिये में लिखीं. बहुत दीन से ई समझ में ना आवत रहल ह की जून सिक्का प्रचलन में नईखे ओकरी हिसाब से कौनो सामान के दाम काहे राखल जाला. विशेष रूप से पेट्रोलियम पदार्थन  के दाम जईसे तैंतालीस रूपया सताईस पईसा लीटर डीजल होखे त एक लीटर कीनेके होखे तब्बो झंझट, पांच लीटर कीनेके होखे तब्बो झंझट आ दस लीटर कीनेके होखे तब्बो झंझट. जब ई चर्चा हम कीनी त एगो संघतिया कहले की कब्बू कुछु कीनले बाड़ आरे पट्रोल पम्प पर अब रूपायि वाली मशीन लागल बाड़ी स. सीधे ज रूपया के चाही त रूपया के लेल. त हम पूछालीन की गैस के दाम काहे ३४३रू ४७ पईसा बा त कहले की गैस कब्बो छपल दाम पर मीलेला का की चिंता में बाड़. हम चुप हो गईलीं.

अब रउरा सब से ई फ़रियाद बा की बताई सभे की एक ,दू, तीन,पांच,छः  दस आ पचीस के सिक्का धीरे धीरे स्वर्ग सिधारी गईल लोग त ई बात पेट्रोलियम मंत्रालय के के समझाई की दाम सीधे रूपया में बढावल करो लोग. लें दें में सुविधा होई.

जाते जाते-- सरकार सचहूँ जराले पर नमक छिरकत बा. अब्बे लोगन के दाम विरोधी आंदोलन खातमों ना भईल तले फेनू पेट्रोल आ डीजल के दाम बढ़ी गईल.

फेरू भेट होई.

गुरुवार, 9 जून 2011

भ्रष्टाचार जिंदाबाद ,मुर्दाबाद

नमस्कार!
हालचाल ठीक बा न !

एतनी घरी देश भ्रष्टाचार जिंदाबाद ,मुर्दाबाद के नारा लगावता. अण्णा हजारे आ उनकर साथी लोग ई मानता की तत्काल अगर एगो बढ़िया लोकपाल बिल बनी जाई त देश की  सत्ता पर काबिज लोगन की भ्रष्टाचार पर कुछु अंकुश लागी जाई. बाकिर तमाम लोग ई बूझता की लोकपाल बिल आवते भ्रष्टाचार ख़तम हो जाई. कांग्रेसी  भाई लोग खुले आम सोनिया राहुल के वफादारी के बात करेला आ  ओ लोगन का कांग्रेस संगठन से कौनो मतलब ना ह. ओ लोगन का लागता की अगिला प्रधान मंत्री राहुल जी होइहें आ उनुकी ऊपर कौनो अंकुश न होखेके चाही त प्रधानमंत्री पद लोकपाल की सीमा से बाहर होखेके चाही त एकरी खातिर कुछु पैताराबाजी करेके चाही त कुछू औरी पद लोकपाल की सीमा से बाहर होजा त ठीके बा. वैसे उ लोग मन से त ईहे चाहता की लोकपाल बनबे ना करे. एकरी खातिर पैंतरा बाजी चलता. वकील लोग चहबे करेला की मुकदमा चलते रहे. बार कौसिल मुकदमा जल्दी निपति जा एकर केतना प्रयास करेले जग जाहिर बा. अण्णा भाई अपनी आत्म विश्वास से सोलह अगस्त के समाया देले बाने. जनता के साथ बनल रही त काम बनी जाई. 

बाबा रामदेव योगासन आ योग क्रिया बतावे के प्रचार शुरू कईलें. लोग उनुसे प्रभावित भईल आ उनुके योग आ आयुर्वेद के दोकानि चली गईल. कपालभाती आ अनुलोम विलोम की साथे साथ तमाम चीज पर उनुके भाषण लगातार चलेला. लोग तमाम तरह की बीमारी से मुक्त भईल जे विशवास की साथे उनुके बाति मानता. बहुतन के कौनो फ़ायदा नईखे. आयुर्वेदिक दवाई चूरन चटनी आता तेल भी साथे साथे बिकाता. अलग से प्रचार ना करके पड़ेला त प्रचार के खर्चा बचि जाला. बाबा रामदेव की कमाई एतनी घरी चर्चा में बा, बाक़ी बाबा लोग मौजि में बा मंत्री, अधिकारी के आशीर्वाद आ दर्शन प्रसाद देत रहता. बाबा रामदेव भी सरकार मंत्री अधिकारी आ पत्रकार लोगन के आशीर्वाद आ प्रसाद देत रहेलें आ ओ लोगन के कृपा पावत रहेलें. बाकी इ बेरी बाबा धरा गईल बाने. बाबा काला धन पर भिड़ी गईले कुछु राजनीति के भी मन बनल त भारत स्वाभिमान यात्रा कईलें, काला धन की  बारे में जागरूकता फईलला साथे साथे दवा आ उपभोक्ता सामान के प्रचार भईल कुछु चन्दा जुटल आ लोग दू घंटा के मुफ्त योग प्रशिक्षण  पावल. बाबा की कारण भ्रष्टाचार की विरोध में वातावरण बाने  लागल. कुछु वदेश इमं भी ईसन हो गईल ह की बाबा की पक्ष में बाति चली गईल. टेल अण्णा हजारे भाई लोकपाल लेके आ गईलें. बाबा का बहुत ना रुचल. बाबा रामलीला मैदान में कालाधन की वापसी के लेके आमरण अनशन के तैयारी शुरू का दीहलन. ई भारतीय   जनतंत्र के बहुत बड़हन कमजोरी बा की सरकार के विरोध करे खातिर कौनो जगह नईखे. जब जनतंत्र में विरोध करके अधिकार बा त ओहू खातिर जगह चाहि जहां दू चारि लाख   लोग जुटी सके.  अगर संसद बा त जनता खातिर विरोध स्थल भी होखे  के चाही. जहा खाली पंजीकरण कराके लोग आपन धरना  प्रदर्शन अनशन क सके. अब देखीं रामलीला मैदान में जगह लीहल गईल अनशन करके बाकी कहल गईल योग सिखावल जाई. अगर अनसन करेके जगह दे दीहल जाईत त ई झूठ ना बोले के परत बाकिर भारत में सच ना चली. जब रामलीला मैदान की ओ तम्मू में एक लाख लोग बैहत सकत रहे त ओतना लोग के अनुमति देबे के चाहत रहे. लेकिन भारत में ईहे चलावल जाला इहाँ जनतंत्र बा बाक़ी जनता के अधिकार नईखे खाली विधायिका के विशेषाधिकार बा ऊ चाहे जौन मन करे का सके. त बाबा रामदेव उहे कईले. जब सरकार का मन कईलस   तब धावा बोल दिहलस गृह मंत्री, सिब्बल, जनार्दन, दिग्गी राजा आ दिल्ली पुलिस जेकरा जौन मन कईल तों बयान दीहलस. चाहे जौन घटित होखे मानल उहे जाई जौन प्रमाणित हो जाई.

बाबा की अभियान से  सरकार चिंतित हो गईल आ उनुका के मना भी लिहलस . बाकिर बीच में कुछु हो गईल. कांग्रेसी लोगन का लागल की सचाहू में भ्रष्टाचार पर अंकुश लागी जाई त गड़बड़ा जाई त कुछु ईसन कईल जा की फेरु जनता कही भ्रष्टाचार मिटावे खातिर जुटी  ना पावे. आ हो गईल कारवाई. बाबा लोग के समझौता के पूरा बाति ना बतवले रहलें त भागे के परल पुलिस झूठा मुकदमा बनवला के माहिर ह. ई लोग त मुआ देला लाठी डंडा के कहे .बाबा आ उनुकर ख़ास सहयोगी लोग भागी गईल जनता जे भागल ऊ बचल जे फंसी गईल ऊ पिटा गईल. ल मिटाव भ्रष्टाचार . पुलिस वाला जब मारत रहल होईन्हें त सोचत रहल होईहें की सबसे भ्रष्ट त हमने के कहेला लोग त आजु मौक़ा मिलल बा बदला  ले लेबेके. 

बाबा जनता से समझौता छिपाके, फेरू भागीके आपन फजीहत करालीहलें अब एके उपाई बा की साल भर फलाहार वरत आ मौन व्रत रहिके आत्म शुद्धि क लें. देखिलें की सरकार का करातीया. अपनी समझौता के श्वेत पत्र जारी करें आ सांच बोले के सीखे जेसे बयान प्र बयान ना देबे के परे.

जनता काला धन की मुद्दा पर फेरु ठगा गईल. मीडिया कार्पोरेट आ सर्कार के बाति कम सुनले. ऊहू जनता के बे पेनी के लोटे माने ले. जौनी ओर  चाहेले तौनी ओर ढरका लेले. विज्ञापन जेतना चाहे ओतना नंगई देखादेले. जेके चाहे ओके हीरू आजेके चाहे ओके जीरो बना देले. भ्रष्टाचार मेटावला से ढेर जरूरी पार्टी के ही बा भईया लोग फेरू देतात रही काला धन आके ऊजर होई त   सबके भागी खुली तले  घूस देत रहीं आ काली कमाई पर खींझाल करीं. 

रविवार, 17 अप्रैल 2011

जंतर मंतर

नमस्कार!
हालचाल ठीक बा न 
हमारा बुझाता की जंतर मंतर नाम केहू भोजपुरिये वाला धईले होई. काहे से की संस्कृत की यन्त्र मंत्र के भोजपुरी जंतर मंतर ह. http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0_%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0,_%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%८०
ऊपर जौन लिंक बा तौना से नई दिल्ली की जंतर मंतर की बारे में जानकारी मिलि जाई. बहुते लोग त जानते बा.ई जंतर मंतर  की बगल में एगो छोटी चुकी मैदान बा जौना में ठीक से फुटबालो ना खेलल जा सकेला, उहे जगह भारत की एक अरब बीस करोड़ जनता के जन तंत्र के रक्षा करके जगह जनतांत्रिक सरकार द्वारा दीहल गईल बा. केतनो लोग  जुटी जा त ओके कहू सैकड़ा में कहि सकेला. भारत की जनतंत्र के एगो महान विसंगति ईहो  बा की जनता के आपन बाति कहे खातिर कौनो जगह नईखे. त सड़क आ रेल के पटरी सबसे अच्छा जगह बनि गईल बा. यन्त्र माने मशीन भी होला. मशीन ऊ होला जौना से कमे ताकत में ढेर काम हो जाला. जंतर ओझा सोखा पंडित लोग भी बनावेला जवना में भोजपत्र चाहे कागज़ पर कौनो चित्र या मंत्र लिखि के पूजा वूजा कके जंतर वाली खोल में राखी के हाथे चाहे गला में पहिरि लीहल जाला. मंतर कुछु शब्दन के श्रृखला ह जौना के बार बार पढ़ला से कुछु ख़ास काम सिद्ध हो जाला. त दिल्ली की जंतर मंतर पर जन लोकपाल बिल नाम के जंतर लेके अन्ना हजारे के साथी लोग भ्रष्टाचार हटाओ मंतर पढ़े लागल. 

मंतर इंटर नेट से भी बटाए लागल लोग पढ़े लागल. उपवास से मंतर जल्दी काम करे लागेला. अन्ना अनशन कईले लोगन से कहलें तमाम लोग अनसन करे लागल नारात्र के व्रत चालत रहे एके साथे दुनु काम होखे लागल. टीवी आ नेट दूनू दनादन चले लागल. आ सरकार सकता में आ गईल. सिब्बल अईले एक त वकील दूसरे नेता तीसरे मंत्री कुछु एने ओने कील चहलें बाक़ी लहल नाहीं आ सरकार अन्ना के बाति मानी गईल. लोकपाल विधेयक बनावे खातिर एगो समिति के गठन के राजपत्र जारी हो गईल.इ समिति में पांची गो अन्ना की और के आ पाँची गो मंत्री लोग बा. 

केहू का ई आशा ना रहे की सरकाए इतना जल्दी बाति मानि ली. लेकिन जब सरकार मानि गईल त सिब्बलो साहब सकपका गईलें. अंट शंट बयान दीहलें सुनी के हँसी आईल. बाक़ी उहो इतना बड़का वकील हौअनी कुछु वकालत वाला पेंच होई. बाक़ी ईसाफ झलकता की सिब्बल साहब के मन साफ नईखे उ अइसन बिल बानईह की अपराधी बची जा स. बिल त ईसन चाही की अपराधी बचे नापाव्रे आ निरपराधी धराये ना पावे.

अब आजु काल्हि अन्ना हजारे उनुकर टोली सबकी निशाना पर बा. जेतना तरह के विचार हो सकेला ओतना तरह से प्रसंशा आ निंदा हो रहल बा. साम्यवाद, समाजवाद, पूंजीवाद, उदारवाद,अम्बेडकरवाद, मंडलवाद, कमंडलवाद, सब खतरा में बा सबसे ढेर खतरा में समाजवादी लोग के लोकतंत्र बा. गांधीवादी लोग खुश बा बाक़ी बहुते कांग्रेसी बहुत दुखी बाने. नेता लोग के सिट्टी पिट्टी गुम बा. लागता की भारत के जनता अब जागी जाई. त ए आन्दोलन के जेतना कमी हो सकेला उ बतावल जाता.

ए आन्दोलन से ई साफ़ हो गईल बा की भारत के लोग अब भ्रष्टाचार से लदल चाहता. आ नेता लोग भ्रष्टाचार के बचावल चाहता. अब चाहे जनता जीते चाहे भ्रष्टाचार. इतना त साफ़ बा की भ्रष्टाचार के समूल नाश नाहो सकेला कबो ना हो सकेला बाकि अल्पी करण हो सकेला. केतना कम होई ई शासन की ईमानदारी पर निर्भर बा. भारत के बेईमानी या भ्रष्टाचार दुनिया में प्रसिद्द बा ई अध्यात्मिक देश ह आ भ्रष्टाचार के ई हाल.

नवका जंतर मंतर से शायद भ्रष्टाचार के अल्पीकरण के शुरुआत होजा यही आशा की साथ.
फेरु भेट होई.                 

बुधवार, 30 मार्च 2011

बैट-बाल

नमस्कार!
हालचाल ठीक बा न 

आजु काल्हि बैट बाल माने किरकेट के बड़का मैच चलता. एतनी घरी भारत पाकिस्तान के मैच होता आ देउरिया में बिजुली नईखे. टीवी नइखे चलत इन्टरनेट पर याहू पर स्कोर देख तानी आ लिखतो बानी. एतनी घरी सब कहू चारू ओर मैचे के बाति करता. एतना नशा त धरम के भी ना होला. इहो एगो अफीमें बा. घरे आके सुनली ह की कई गो मल्टीनेशनल  कम्पनी में आधा दिन के छुट्टी हो गईल बा. देउरिया में त आन्ही पानी आ गईल ह बिजुली भागी गईल ह. थोड़ी देर खातिर डिश टीवी फेल हो गईल ह. बाक़ी लोग मैच की पीछे लागल बा. पहिले रेडियो से कमेंटरी आवे  फेरु पाकेट  रेडियो चलल अब त मोबाइल महाराज के कृपा बा बिलकुल उपडेट रहला के कार बा नाही पिछुआइले  रहि जाईल जाई. 

त भईया आधुनिक कहाए खातिर ई जरूरी बा हमहू कुछु किरकेट  पर लिखीं. आज भारत आ पाकिस्तान की बीच में मैच बा. खेल आ राजनीति के खेल दुनु जारी बा जब लोग एतना मैच देखता  त नेता का ओईजू रहही के बा . कूटनीति भी चलता. भक्ती होता सट्टा लागता सब मगन बा. पूरा लड़ाई के माहौल बा. खूब मजा बा. मजा कटले के कार बा. आज दू बजे से लगभग भारत बन्दे बा. आईपीएल वाला त अपनी परचार में कहते बा की भारत बंद रही. 

ई खेल के खेल ना ह ई पईसा के खेलि ह. बिजिनेस ह खेलि भी बिजिनेस बा ई आदमी के कमाल ह. अब ई काहे होता मगज मारी चल रहली बा. जोतिसी, खेल विशेषज्ञ लोगन के आज चटकल बा. इलेक्ट्रोनिक मीडिया के त कुछु पूछही के नईखे . खिलाड़ी लोग खेल से ढेर पईसा विज्ञापन से कमा लेता. एतना खेलि की बादो भारत के लोग जीवन शैली रोग लाईफ स्टाईल डिजीज के शिकार बा. खेलि के बाति कईल अलग ह आ खेलल अलग ह. 

खेलला से मानसिक आ शारीरिक स्वास्थ्य ठीक रहेला कुंठा दूर भागेला आक्रामकता में कमी आवेला. लोग सरकार के कोसल छोड़ी के कुछु दिन खिलाड़ी लोग की प्रशसा निंदा में लागल रही. त खेल के राज नीति बहुते अच्छा बा.

देहात में पहिले गुल्ली डंडा के खेल खूब होखे. अप्रैल से जून तक बारी में आम के अगोरिया आ गुल्ली डंडा के खेल दुनु खूब होखे. ऊ खिलाड़ी लोग कमावो  खूब करे. बाक़ी जे खेल के दीवाना हो जा ऊ सब काम छोडि के खेलिए खेले. लेकिन गुल्ली डंडा खेलला से केहू के कौनों पईसा ना मिलि पावल. अब टीवी पर फेरु मैच आवे लागल. दूसरा ओभर चलता त हमहू  चलतानी मैच देखे.  फेरु भेंट होई.           

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

वसंत पंचमी

वसंत पंचमी 
नमस्कार!
माघ महीना के शुक्ल पक्ष के पंचमी के वसंत पंचमी कहल जाला. देहात में वसंत पंचमी के नेवान कहल जात रहल ह. पहिले की ज़माना में जब जौ के खेती होखे त नेवान की दिन ले  जौ गदरा जात रहे आ केराव ( मटर हरियरका जवना के छिलका झुर्रीदार होत रहे ओके देशी केराव भी कहल जात रहे , कबिली केराव  सफ़ेद मटर के कहल जात रहे  आज कल त हरा मटर के एईसन किसिम चलल बा जवना में बारह गो से अधिका दाना होता.)  भी गदरा जात रहे. नेवान की दीने घर दुआर गोबर से लीपल जात रहे ( एगो भोजपुरी गीत के मुखड़ा ह गायी  की गोबरा से अंगना लीपवलों..). सांझी की बेरा केहू जा के खेत में से पांची गो जौ के बाली तूरि के ले आई. वो बालिन के भूजि के गुड़ आ घी में मीसि के घर भरि के बाँटल जाई. नवका फसल के पहिला व्यंजन.

एकरी बाद केराव आ जौ के भूजि के ओखरी में खानि के हापुस बना के खाईल  जात रहे. अधपका केराव या रहिला (चना) के डंठल समेत  दुगो रहर (अरहर ) की डंठल पर धके नीचे से ऊखी (गन्ना) के पतई चाहे सूखल घास धके आगि लगा दिहल जाई. धीरे धीरे सब छिम्मी (फली पाकी के गिरि जात रहे. एके होरहा कहल जाला ई  सोंह  ( सोंधा)  वंजन अब दुर्लभ बा . रहिला के होरहा त कुछु लोग ढ देत रहे आ ओके बरसात में खात रहे.ओतनी घरी दूसरे की खेत में से केराव उखारी के होरहा लगा के खाए वाला लईकन कमी ना रहे.

वसंत पंचमी की चर्चा में  बाति होरहा  पर चलि गईल. वसंत पंचमी की दीनें ही सम्मति गडात रहे. अब्बो  गाडल  जाला. सम्मति गाड़े के निश्चित स्थान होला. एगो बड़हन बांस की पुलुई पर जौ आ तीसी बान्हि के गाडी दीहल जाई. ओकरी चारु ओर पतई बिटोरी के राखी दीहल जाई. वसंत के गाना चौताल गावल जाई. होलिका दहन जौना के कहल जाला ओही दीने ई सम्मति फुका जाई. शहर के होलिका दहन भोजपुरी के सम्मति फूकल एक्के चीजु ह. वसंत पंचमी से लेके फागुन की पुर्न्वासी ले रोज गाव के गवैया लोग आ सुनवैया लोग रोज सम्मति लगे जुटी के पतई बिटोरी चौताल गाई. कहियो कहियो लोग ओईजू से उठी केहू की दुआर पर आके भी गाना गाई.

ऐतरे देहात की लोगन के वसंत फागुन ले चली फेरू गेहूँ रहर पाकी जाई आ कटिया दवरी के सीजन आ जाई. ई कुलि बखान हम सन साठी  से पैंसठ की बीच के कर तानी. आजु काल्हि खेती में नया तकनीक मनोरंजन के नया तकनीक आ गईल बा मोबाइल गाँव गाँव  में बा. टी वी बा मोटर साइकिल बा मोटर बा पक्का मकान  बा. हैण्ड पम्प कूना सुखी गईलें स. हर हरवाह  कटिया मजूरी की जगह टेक्टर कम्बाइन ट्यूबवेल के जमाना बा.

अब अखबार आ टी वी गाँव गाँव में वैलेंटाइन डे के पहुंचा देले बा. रोज राजनीति के चर्चा बा. अब गाँव के दलित उनईखे जौन पहिले रहे. बदलत ज़माना की साथ सोच भी बहुत बदली गईल बा. अब झगड़ा दलित आ सवर्ण के नाहोके जातिवादी राजनीति के बा. गाँव में भी बफे के खाना बा सब एके साथे खा लेता. जेकरा जौन मन करता तौन पहिरता. लड़ाई सामाजिक से ढेर राजनीतिक हो गईल बा.

देहाते में तब छोट लईकन के अपनी दुनु पर सुता के लोग घुघुआ माना खेलावत रहल ह. आ अंत  में दूनू पर ऊपर कके लईका से कहल जात रहल ह नई भीति उठेले पुराण भीति गीरेले ह हा हा ....  

नया बनत रही पुराना बिगड़त रही भोजपुरी में नया नया शब्द आ पुराना होरहा गुम हो जाई. उपयोगी रही तुने बची बाक़ी सब ख़तम हो जाई.

बाक़ी फेरु कब्बो.
नमस्कार.     

बुधवार, 26 जनवरी 2011

गुजरली बाति

गुजरली बाति 
नमस्कार!
हालिचालि ठीक बानू 
आज घर से निकलि के सड़क पर पहुँचली ह त एगो बूढ़ आदमी के जात देखि के बाबा के यादि आ गईल ह. ऊ आदमी एकदम नब्बे अंश पर झुकल रहल ह. बाबा जब चलें त ओहींगा झुक के चलें. ऊ एगो लाठी (छड़ी ) लेके चलें. कुछु दूर चलिके सीधा हो जांसु. ऊ जब चलें त तेज चले हमारो के कहें हाली हाली चल. भोजन के बहु त शौकीन रहलें तरह तरह के व्यंजन बनावे के ढंग जाने. मछली मांस बनावे के भी तरीका जानत रहलें. लेकिन हमारी होस में ऊ ई कुल छोड़ी देले रहलें. ब्राह्मन लोग बुढ़ापा में  मांस मछली छोड़ी देला. मान्यता बा कि एसे भगवान् खुश रहिहें.
बाबा सिंहासन बतीसी के बतीसो कथा जानत रहलें. बाक़ी हमरा अब याद नईखे. गीत भजन के भी शौकीन रहलें. आज की समय में आ तब्बो की समय में जुना के दुनियादारी कहल जाला ओसे ऊ बहुत दूर रहलें. पिटा अपनी संतान के एक समान सुखी देखल चाहेला. परिस्थिति के खेल या भाग्य के खेल चाहे करम के खेल जौन काम करत होखे , एक पिता के सब संतान एक समान सुखी ना हो पावेला. बाबा के ई चिंता बहित सतावे.
बाबा एकबेर बहुत बीमार पड़ले. बाबूजी छुट्टी लेके घरे आगईल रहलें. ऊ केहू के चिन्हल उन्हाल बंद क देले रहलें. सांझी के हम उनके गीता के श्लोक प्धिके सुनाईं. लोग कहे एग्रहवां अध्याय सुनाव. ओही बीच में ऊ एक दिन लगने बड़ बडाए. घर में धान के बोरा के छली लागल बा एइसन धान बा कि एक मुठ्ठी चाउर में घर भर के भोजन हो जाई. पक्का दुमहला घर बनी गईल बा. गाँव के लोग सुबह शाम हालचाल ले. धीरे धीरे बाबा ठीक हो गईले. १९६७ में बाबा के सरग्बास हो गईल.
बाद में चलि के घर भी दुमहला हो गईल आ एतना धान होखे लागल की धान बिकाए लागल. ई ओ समय के बाति ह जब हमारी क्षेत्र में नगीना बाईस धान बोअईल शुरू भईल रहे . बाद में आई आर एट नाव के धान बोआए लागल औउक्षेत्र भी धन के भण्डार हो गईल. एगो पद्मा नाम के धान बोअईल रहे जौन बहुत छोट पौधा वाला रहे बाक़ी दाना बड़े बड़े होखे.
आज छबीस जनवरी के दीने बचपन के कई गो पन्ना  खुलत जाता आ ओही की साथे भारत की विकास के कहानी भी चलता. कईन में सफ़ेद कागज पर वाटर कलर की रंग से बनावल झंडा आ नारा की की साथे गाँव के फेरी. विकास त भईल बा लेकिन भ्रष्टाचार ओके कमतर कीले बा. ऊपर के पईसा नीचे  ईला में रस्तवे में हेरा जाता . नीचे से पईसा चलता त उहो बिचवे  में हेरा जाता.
हमरी साथे प्राइमरी में हमरी हरवाहे के लईको पढ़े, . हजामों के लईका पढ़े ,  मोलवी साहब के लईकाभी पढ़े. तेली ,गोड़ सब केहू साथे पढ़े एके पाली पर बईठे. कौनो ना शेडूल  रहे ना ओबीसी.