रविवार, 17 अप्रैल 2011

जंतर मंतर

नमस्कार!
हालचाल ठीक बा न 
हमारा बुझाता की जंतर मंतर नाम केहू भोजपुरिये वाला धईले होई. काहे से की संस्कृत की यन्त्र मंत्र के भोजपुरी जंतर मंतर ह. http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0_%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0,_%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%८०
ऊपर जौन लिंक बा तौना से नई दिल्ली की जंतर मंतर की बारे में जानकारी मिलि जाई. बहुते लोग त जानते बा.ई जंतर मंतर  की बगल में एगो छोटी चुकी मैदान बा जौना में ठीक से फुटबालो ना खेलल जा सकेला, उहे जगह भारत की एक अरब बीस करोड़ जनता के जन तंत्र के रक्षा करके जगह जनतांत्रिक सरकार द्वारा दीहल गईल बा. केतनो लोग  जुटी जा त ओके कहू सैकड़ा में कहि सकेला. भारत की जनतंत्र के एगो महान विसंगति ईहो  बा की जनता के आपन बाति कहे खातिर कौनो जगह नईखे. त सड़क आ रेल के पटरी सबसे अच्छा जगह बनि गईल बा. यन्त्र माने मशीन भी होला. मशीन ऊ होला जौना से कमे ताकत में ढेर काम हो जाला. जंतर ओझा सोखा पंडित लोग भी बनावेला जवना में भोजपत्र चाहे कागज़ पर कौनो चित्र या मंत्र लिखि के पूजा वूजा कके जंतर वाली खोल में राखी के हाथे चाहे गला में पहिरि लीहल जाला. मंतर कुछु शब्दन के श्रृखला ह जौना के बार बार पढ़ला से कुछु ख़ास काम सिद्ध हो जाला. त दिल्ली की जंतर मंतर पर जन लोकपाल बिल नाम के जंतर लेके अन्ना हजारे के साथी लोग भ्रष्टाचार हटाओ मंतर पढ़े लागल. 

मंतर इंटर नेट से भी बटाए लागल लोग पढ़े लागल. उपवास से मंतर जल्दी काम करे लागेला. अन्ना अनशन कईले लोगन से कहलें तमाम लोग अनसन करे लागल नारात्र के व्रत चालत रहे एके साथे दुनु काम होखे लागल. टीवी आ नेट दूनू दनादन चले लागल. आ सरकार सकता में आ गईल. सिब्बल अईले एक त वकील दूसरे नेता तीसरे मंत्री कुछु एने ओने कील चहलें बाक़ी लहल नाहीं आ सरकार अन्ना के बाति मानी गईल. लोकपाल विधेयक बनावे खातिर एगो समिति के गठन के राजपत्र जारी हो गईल.इ समिति में पांची गो अन्ना की और के आ पाँची गो मंत्री लोग बा. 

केहू का ई आशा ना रहे की सरकाए इतना जल्दी बाति मानि ली. लेकिन जब सरकार मानि गईल त सिब्बलो साहब सकपका गईलें. अंट शंट बयान दीहलें सुनी के हँसी आईल. बाक़ी उहो इतना बड़का वकील हौअनी कुछु वकालत वाला पेंच होई. बाक़ी ईसाफ झलकता की सिब्बल साहब के मन साफ नईखे उ अइसन बिल बानईह की अपराधी बची जा स. बिल त ईसन चाही की अपराधी बचे नापाव्रे आ निरपराधी धराये ना पावे.

अब आजु काल्हि अन्ना हजारे उनुकर टोली सबकी निशाना पर बा. जेतना तरह के विचार हो सकेला ओतना तरह से प्रसंशा आ निंदा हो रहल बा. साम्यवाद, समाजवाद, पूंजीवाद, उदारवाद,अम्बेडकरवाद, मंडलवाद, कमंडलवाद, सब खतरा में बा सबसे ढेर खतरा में समाजवादी लोग के लोकतंत्र बा. गांधीवादी लोग खुश बा बाक़ी बहुते कांग्रेसी बहुत दुखी बाने. नेता लोग के सिट्टी पिट्टी गुम बा. लागता की भारत के जनता अब जागी जाई. त ए आन्दोलन के जेतना कमी हो सकेला उ बतावल जाता.

ए आन्दोलन से ई साफ़ हो गईल बा की भारत के लोग अब भ्रष्टाचार से लदल चाहता. आ नेता लोग भ्रष्टाचार के बचावल चाहता. अब चाहे जनता जीते चाहे भ्रष्टाचार. इतना त साफ़ बा की भ्रष्टाचार के समूल नाश नाहो सकेला कबो ना हो सकेला बाकि अल्पी करण हो सकेला. केतना कम होई ई शासन की ईमानदारी पर निर्भर बा. भारत के बेईमानी या भ्रष्टाचार दुनिया में प्रसिद्द बा ई अध्यात्मिक देश ह आ भ्रष्टाचार के ई हाल.

नवका जंतर मंतर से शायद भ्रष्टाचार के अल्पीकरण के शुरुआत होजा यही आशा की साथ.
फेरु भेट होई.                 

बुधवार, 30 मार्च 2011

बैट-बाल

नमस्कार!
हालचाल ठीक बा न 

आजु काल्हि बैट बाल माने किरकेट के बड़का मैच चलता. एतनी घरी भारत पाकिस्तान के मैच होता आ देउरिया में बिजुली नईखे. टीवी नइखे चलत इन्टरनेट पर याहू पर स्कोर देख तानी आ लिखतो बानी. एतनी घरी सब कहू चारू ओर मैचे के बाति करता. एतना नशा त धरम के भी ना होला. इहो एगो अफीमें बा. घरे आके सुनली ह की कई गो मल्टीनेशनल  कम्पनी में आधा दिन के छुट्टी हो गईल बा. देउरिया में त आन्ही पानी आ गईल ह बिजुली भागी गईल ह. थोड़ी देर खातिर डिश टीवी फेल हो गईल ह. बाक़ी लोग मैच की पीछे लागल बा. पहिले रेडियो से कमेंटरी आवे  फेरु पाकेट  रेडियो चलल अब त मोबाइल महाराज के कृपा बा बिलकुल उपडेट रहला के कार बा नाही पिछुआइले  रहि जाईल जाई. 

त भईया आधुनिक कहाए खातिर ई जरूरी बा हमहू कुछु किरकेट  पर लिखीं. आज भारत आ पाकिस्तान की बीच में मैच बा. खेल आ राजनीति के खेल दुनु जारी बा जब लोग एतना मैच देखता  त नेता का ओईजू रहही के बा . कूटनीति भी चलता. भक्ती होता सट्टा लागता सब मगन बा. पूरा लड़ाई के माहौल बा. खूब मजा बा. मजा कटले के कार बा. आज दू बजे से लगभग भारत बन्दे बा. आईपीएल वाला त अपनी परचार में कहते बा की भारत बंद रही. 

ई खेल के खेल ना ह ई पईसा के खेलि ह. बिजिनेस ह खेलि भी बिजिनेस बा ई आदमी के कमाल ह. अब ई काहे होता मगज मारी चल रहली बा. जोतिसी, खेल विशेषज्ञ लोगन के आज चटकल बा. इलेक्ट्रोनिक मीडिया के त कुछु पूछही के नईखे . खिलाड़ी लोग खेल से ढेर पईसा विज्ञापन से कमा लेता. एतना खेलि की बादो भारत के लोग जीवन शैली रोग लाईफ स्टाईल डिजीज के शिकार बा. खेलि के बाति कईल अलग ह आ खेलल अलग ह. 

खेलला से मानसिक आ शारीरिक स्वास्थ्य ठीक रहेला कुंठा दूर भागेला आक्रामकता में कमी आवेला. लोग सरकार के कोसल छोड़ी के कुछु दिन खिलाड़ी लोग की प्रशसा निंदा में लागल रही. त खेल के राज नीति बहुते अच्छा बा.

देहात में पहिले गुल्ली डंडा के खेल खूब होखे. अप्रैल से जून तक बारी में आम के अगोरिया आ गुल्ली डंडा के खेल दुनु खूब होखे. ऊ खिलाड़ी लोग कमावो  खूब करे. बाक़ी जे खेल के दीवाना हो जा ऊ सब काम छोडि के खेलिए खेले. लेकिन गुल्ली डंडा खेलला से केहू के कौनों पईसा ना मिलि पावल. अब टीवी पर फेरु मैच आवे लागल. दूसरा ओभर चलता त हमहू  चलतानी मैच देखे.  फेरु भेंट होई.           

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

वसंत पंचमी

वसंत पंचमी 
नमस्कार!
माघ महीना के शुक्ल पक्ष के पंचमी के वसंत पंचमी कहल जाला. देहात में वसंत पंचमी के नेवान कहल जात रहल ह. पहिले की ज़माना में जब जौ के खेती होखे त नेवान की दिन ले  जौ गदरा जात रहे आ केराव ( मटर हरियरका जवना के छिलका झुर्रीदार होत रहे ओके देशी केराव भी कहल जात रहे , कबिली केराव  सफ़ेद मटर के कहल जात रहे  आज कल त हरा मटर के एईसन किसिम चलल बा जवना में बारह गो से अधिका दाना होता.)  भी गदरा जात रहे. नेवान की दीने घर दुआर गोबर से लीपल जात रहे ( एगो भोजपुरी गीत के मुखड़ा ह गायी  की गोबरा से अंगना लीपवलों..). सांझी की बेरा केहू जा के खेत में से पांची गो जौ के बाली तूरि के ले आई. वो बालिन के भूजि के गुड़ आ घी में मीसि के घर भरि के बाँटल जाई. नवका फसल के पहिला व्यंजन.

एकरी बाद केराव आ जौ के भूजि के ओखरी में खानि के हापुस बना के खाईल  जात रहे. अधपका केराव या रहिला (चना) के डंठल समेत  दुगो रहर (अरहर ) की डंठल पर धके नीचे से ऊखी (गन्ना) के पतई चाहे सूखल घास धके आगि लगा दिहल जाई. धीरे धीरे सब छिम्मी (फली पाकी के गिरि जात रहे. एके होरहा कहल जाला ई  सोंह  ( सोंधा)  वंजन अब दुर्लभ बा . रहिला के होरहा त कुछु लोग ढ देत रहे आ ओके बरसात में खात रहे.ओतनी घरी दूसरे की खेत में से केराव उखारी के होरहा लगा के खाए वाला लईकन कमी ना रहे.

वसंत पंचमी की चर्चा में  बाति होरहा  पर चलि गईल. वसंत पंचमी की दीनें ही सम्मति गडात रहे. अब्बो  गाडल  जाला. सम्मति गाड़े के निश्चित स्थान होला. एगो बड़हन बांस की पुलुई पर जौ आ तीसी बान्हि के गाडी दीहल जाई. ओकरी चारु ओर पतई बिटोरी के राखी दीहल जाई. वसंत के गाना चौताल गावल जाई. होलिका दहन जौना के कहल जाला ओही दीने ई सम्मति फुका जाई. शहर के होलिका दहन भोजपुरी के सम्मति फूकल एक्के चीजु ह. वसंत पंचमी से लेके फागुन की पुर्न्वासी ले रोज गाव के गवैया लोग आ सुनवैया लोग रोज सम्मति लगे जुटी के पतई बिटोरी चौताल गाई. कहियो कहियो लोग ओईजू से उठी केहू की दुआर पर आके भी गाना गाई.

ऐतरे देहात की लोगन के वसंत फागुन ले चली फेरू गेहूँ रहर पाकी जाई आ कटिया दवरी के सीजन आ जाई. ई कुलि बखान हम सन साठी  से पैंसठ की बीच के कर तानी. आजु काल्हि खेती में नया तकनीक मनोरंजन के नया तकनीक आ गईल बा मोबाइल गाँव गाँव  में बा. टी वी बा मोटर साइकिल बा मोटर बा पक्का मकान  बा. हैण्ड पम्प कूना सुखी गईलें स. हर हरवाह  कटिया मजूरी की जगह टेक्टर कम्बाइन ट्यूबवेल के जमाना बा.

अब अखबार आ टी वी गाँव गाँव में वैलेंटाइन डे के पहुंचा देले बा. रोज राजनीति के चर्चा बा. अब गाँव के दलित उनईखे जौन पहिले रहे. बदलत ज़माना की साथ सोच भी बहुत बदली गईल बा. अब झगड़ा दलित आ सवर्ण के नाहोके जातिवादी राजनीति के बा. गाँव में भी बफे के खाना बा सब एके साथे खा लेता. जेकरा जौन मन करता तौन पहिरता. लड़ाई सामाजिक से ढेर राजनीतिक हो गईल बा.

देहाते में तब छोट लईकन के अपनी दुनु पर सुता के लोग घुघुआ माना खेलावत रहल ह. आ अंत  में दूनू पर ऊपर कके लईका से कहल जात रहल ह नई भीति उठेले पुराण भीति गीरेले ह हा हा ....  

नया बनत रही पुराना बिगड़त रही भोजपुरी में नया नया शब्द आ पुराना होरहा गुम हो जाई. उपयोगी रही तुने बची बाक़ी सब ख़तम हो जाई.

बाक़ी फेरु कब्बो.
नमस्कार.     

बुधवार, 26 जनवरी 2011

गुजरली बाति

गुजरली बाति 
नमस्कार!
हालिचालि ठीक बानू 
आज घर से निकलि के सड़क पर पहुँचली ह त एगो बूढ़ आदमी के जात देखि के बाबा के यादि आ गईल ह. ऊ आदमी एकदम नब्बे अंश पर झुकल रहल ह. बाबा जब चलें त ओहींगा झुक के चलें. ऊ एगो लाठी (छड़ी ) लेके चलें. कुछु दूर चलिके सीधा हो जांसु. ऊ जब चलें त तेज चले हमारो के कहें हाली हाली चल. भोजन के बहु त शौकीन रहलें तरह तरह के व्यंजन बनावे के ढंग जाने. मछली मांस बनावे के भी तरीका जानत रहलें. लेकिन हमारी होस में ऊ ई कुल छोड़ी देले रहलें. ब्राह्मन लोग बुढ़ापा में  मांस मछली छोड़ी देला. मान्यता बा कि एसे भगवान् खुश रहिहें.
बाबा सिंहासन बतीसी के बतीसो कथा जानत रहलें. बाक़ी हमरा अब याद नईखे. गीत भजन के भी शौकीन रहलें. आज की समय में आ तब्बो की समय में जुना के दुनियादारी कहल जाला ओसे ऊ बहुत दूर रहलें. पिटा अपनी संतान के एक समान सुखी देखल चाहेला. परिस्थिति के खेल या भाग्य के खेल चाहे करम के खेल जौन काम करत होखे , एक पिता के सब संतान एक समान सुखी ना हो पावेला. बाबा के ई चिंता बहित सतावे.
बाबा एकबेर बहुत बीमार पड़ले. बाबूजी छुट्टी लेके घरे आगईल रहलें. ऊ केहू के चिन्हल उन्हाल बंद क देले रहलें. सांझी के हम उनके गीता के श्लोक प्धिके सुनाईं. लोग कहे एग्रहवां अध्याय सुनाव. ओही बीच में ऊ एक दिन लगने बड़ बडाए. घर में धान के बोरा के छली लागल बा एइसन धान बा कि एक मुठ्ठी चाउर में घर भर के भोजन हो जाई. पक्का दुमहला घर बनी गईल बा. गाँव के लोग सुबह शाम हालचाल ले. धीरे धीरे बाबा ठीक हो गईले. १९६७ में बाबा के सरग्बास हो गईल.
बाद में चलि के घर भी दुमहला हो गईल आ एतना धान होखे लागल की धान बिकाए लागल. ई ओ समय के बाति ह जब हमारी क्षेत्र में नगीना बाईस धान बोअईल शुरू भईल रहे . बाद में आई आर एट नाव के धान बोआए लागल औउक्षेत्र भी धन के भण्डार हो गईल. एगो पद्मा नाम के धान बोअईल रहे जौन बहुत छोट पौधा वाला रहे बाक़ी दाना बड़े बड़े होखे.
आज छबीस जनवरी के दीने बचपन के कई गो पन्ना  खुलत जाता आ ओही की साथे भारत की विकास के कहानी भी चलता. कईन में सफ़ेद कागज पर वाटर कलर की रंग से बनावल झंडा आ नारा की की साथे गाँव के फेरी. विकास त भईल बा लेकिन भ्रष्टाचार ओके कमतर कीले बा. ऊपर के पईसा नीचे  ईला में रस्तवे में हेरा जाता . नीचे से पईसा चलता त उहो बिचवे  में हेरा जाता.
हमरी साथे प्राइमरी में हमरी हरवाहे के लईको पढ़े, . हजामों के लईका पढ़े ,  मोलवी साहब के लईकाभी पढ़े. तेली ,गोड़ सब केहू साथे पढ़े एके पाली पर बईठे. कौनो ना शेडूल  रहे ना ओबीसी.  
     


रविवार, 14 नवंबर 2010

ग्लोबल छठ

नमस्कार !
हालिचाली ठीक बा नू !
छठी के तिहवार निमने निमने बीती गईल. चैनल से लेके अखबार ले छठी की समाचार से पटी गईल रहल ह. बाजार, ट्रेन, बस, सड़क सब जाम हो गईल रहल ह. केहू कहता की छठ ग्लोबल हो गईल बा त केहू कहता की लोकल हो गईल बा. जौन चीज एक जगह से चारू ओर धूमधाम से फ़ैल जा ओके का कहल जाई.

कांच बांस के बंहगी खोजते रही गईली कहीं देखे के ना मीलल .जबसे छठी देख तानी तबसे आजु    ले कब्बो ना देखलीं . हाँ ई जरूर देखली कि नया नया दौउरी चाहे उ बॉस के होखे चाहे मूंज के होखे. मूड़ी ( सिर ) पर रखिके घाट पर पहुंचा दिहल जात बा. एतनी घरी मोटर साईकिल के ज़माना बा ओही पर बैठी के कान्हे पर दौरी भी चली जात बा ऊखियो चली जाता आ ब्रतधारियो चली जा तारी.

त लोकगीतन में अब ईहू कुल के जिक्र होखे  के चाहीं  तबे नू   नवको ज़माना के जानकारी होई. अब कार वाला गाना ना होई त काम कैसे चली. अब त कार से घाट पर जाता लोग.

नदी, पोखरा, तालाब, गड़ही, तुरंता घाट आ कठौता घाट सब चलता . मन चंगा त कठौती में गंगा.


  

शनिवार, 13 नवंबर 2010

Posted by Picasa

शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

पावलागी!
आजु पहली जनवरी ह। बड़ा धूमधाम बा। चारु और बड़ा हल्ला बा। आजु से नवका साल शुरू होता। पुरनका साल किकुरले चली जाला आ नवको सलिया किकुरले आवेला। जबसे भारत के पढुआ लोग महानगरवासी से (ग्लोबल) गाँव के वासी हो गईल बा तबसे नवका साल बहुत जोर से आवे लागल बा। इ नवका गाँव के भाषा भुत अजब गजब हो गईल बा। अब ईहे जानिलीं की ई भोजपुरी रउरी लगे अंग्रेजी की रोमन लिपि पर चढ़िके पहुचत बा.

काल्हि हमारी मन में में आईल की आपन कुछु बाति भोजपुरी में कहीं। जवनी भाषा में बोलल शुरू कईले रहलीं ओही में अब लीखले के साहस करतानी। एकरी कुछ दिन पहिले भी तनी कोशिश कईले रहनी। लेकिन ई ब्लाग्वार्ता हमारी खातिर नया विधा बाटे।

त हम बात करत रहलीं हई नवका साल के। पूरा विश्व में बहुत साल बा। ई बाटी कुछ अजबे लागता। हमार मतलब ई बा विश्व में काल गणना के कईगो पध्दति बा भोजपुरी छेत्र में विक्रम संवत, शक संवत आ ईसवी संवत के चलन बा एकरी साथे साथे राष्ट्रीय कलेंडर भी बा। एमे सबसे भारी ईसवी स्वत ही बा। कोर्ट कचहरी के तारीख एहीसे पड़ेला। बैंक के काम काज एहीसे चलता। एक तरह से ई छा गईल बा। ग्लोबल गाँव के भाषा अंग्रेजी साल ईसवी सन हो गईल बा। त ई एगो नया तिहवार बनी गईल बा। पुरनिया लोग ईदेखी के बड़ा कुड़बुड़ाता। हिन्दू आ मुस्लिम धर्मगुरु लोग बड़ा खिसियाला। हालांकी असो रविशंकर गुरु कहले ह (अमर उजाला) इ तिहवार के हँसी खुसी से मनावेके चाहीं।

नवका पीढी के चाहे जेकरा जौन मन करे तौन कहे ऊ ए दीन के बड़ा मन से मनावता। उद्योग जगत एके बहुत दीन से भजावता। डायरी, कलेंडर, झोरा आ गिफ्ट बांटि के आपन इम्प्रेसन बनावता। घुमाफिरा के ए तेहवारे के उद्योगमित्रवत ( कार्पोरेट फ्रेंडली ) कहला में कवनो दोष नईखे। औरू नाही त मोबाईल कम्पनियन की खातिर ई वरदान हो गईल बा। २५ दिसंबर से शुरू होके ७ जनवरी ले फोन से बाटी कईल आसान नईखे। खरबपति लोग की खातिर ई बरदान हो गईल बा। मध्यम वर्ग कुछु मजा काटि के तनाव से मुक्त हो जाता ताकि अपनी अपनी दफ्तर में तनी मन लगाके काम करी। छोटका लोग भकुआ के ताकते रहि जाता।

नवका सालि की चर्चा में ग्रीटिंग कार्ड के चर्चा ना होई त बूझी की सब बेकारे बा। चवनिया छाप से लेके रउरा जेतना खर्च क सकेली ओतना दाम के कार्ड बजारे में बिकाता। लोगन के रीझावे खातिर एसे बढ़िया कौनो साधन नईखे। दिसंबर चढ़ते कार्ड के छटाई शुरू हो जाला आ जनवरी में कुछु दीने ले चलेला। अब नवका ज़माना के ईमेल सबसे अगुआता। एसेमेस हो सकेला तनी औरू आगे होखे। ईकार्ड आ एसेमेस दुनू बड़ा तेज दऊरताने।

ई बतकही त ओही की लगे पहुची जे कम्पूटर से देखी। त असो की साल हमहू एकरी माध्यम से सब लोगनि के नवका साल के शुभकामना देत बानी। सभके संकाल्प पूरा होखे सब सुह्की रहे। सबकर मंगल हो.