सोमवार, 12 जनवरी 2015

ढाई घरी के सपना

ढाई घरी के सपना
नमस्कार!

हालिचालि ठीक बा, शीतलहर चलता. रजनिति गरम बा. गान्धी जी शौचालय ले सीमित बाने. जाड़ा में घर शौचालय होखे. गरम पानी होखे. इनर होखे,  हीटर होखे.  फेसबुक आ ब्लाग होखे त ना मनोरंजन दूर बा ना व्यंजन. बाकी बिजली आ इन्टरनेट त चहबे करी.

आजु फेसबुक पर दू महारथी कहलनि ह कि अंग्रेजी के देवनागरी लिपि में लिखल जाई. लोग बड़ा खुश भईल हमरो नीक लागल ह.

बाकी दू गो शंका उठल बा एगो बड़हन बा आ एगो छोट बा.

बड़का शंका ई बा कि अबे त देवनागरी लिखे खातिर, गूगल, प्रमुख, मंगल आदि आदि के सहारा लिया ता. त जब अंग्रेजी के देवनागरी में लिखल जाई त ऊहो रोमन में ही लिखाई त रोमन से गर ना छूटी.

जब हमनीका छठवीं में पढ़े लगलीं जा त अंग्रेजी के पढ़ाई शुरु भईल. Rat - रैट- (रैट माने) चूहा. ए तरे. अंग्रेजी बोले के त ऐबे ना करे. ट्रान्सलेशन आ ग्रामर, प्रोज, पोइट्री के अर्थ आ रटुआ एसे. इन्टर ले काम चलि गईल. अगली पढाई अंग्रेजी में शुरु हो गईल. पढ़े लिखे के त आ जा बाकी बोले के अजु ले ना आइल.

ए देश के कुछु लोग जरिये से अंग्रेजी माध्यम से पढ़्ले बा हमरा बुझाता कि ओही लोगन की दिमाग में अंग्रेजी के देवनागरी में लिखे के बति आइल ह. हमनीका त अब्बो देवनागरी की भरोसे ही अंग्रेजी पढ तानी जा.

कुछु दिन से मन में ई विचार आवता कि अंग्रेजी के भाषा की रूप में अलग से सबके पढ़ावल जा. ओके बोले के सिखावल जा बाकी पढ़ाई के माध्यम मातृभाषा ही रहे के चाही.

पुरनका जमाना के लोग अपनी अपनी क्षेत्र में भाषा आ लिपि के विकास कईल. सबमें कुछु कमी बा कुछु विशेषता बा. अब जब पूरा विश्व एगो गांव हो गईल. "वसुधैव कुटुम्बकम" भी अच्छा नारा ह. ज्ञान विज्ञान एतना आगे बा.

त एगो नया भाषा आ नया लिपि के आविष्कार होखे के चाही. तब्बे " वसुधैव कुटुम्बकम" आ "ग्लोबल विलेज" होई. जब सब एके साथे एके भाषा आ लिपि में समान रूप से ज्ञान पाई. 

नमस्कार.
फेरू भेंट होई.