तारीख
नमस्कार!हालचाल ठीक बा आ ठीके चाही. आजु काल्हि कोरट कचहरी आ फैसला के बड़ा चरचा बा. लोग एने ओने आवत जात, कचहरी आ जज लोगनि की बारे में जेतना बतियावेला, लीखे की बेर चुपा जाला. लिखे की पहिले प्रमाण चाही. जवन प्रमाण लउकेला ओके केहु देखल ना चाहेला आ इहो चाहेला कि लोग के कमाई अन्थाप होखे. पहिले शहर में वकील लोगन के कोठी होत रहल . बिना कमाई के कोठी बनी ना. ए देश के एगो महान कोठी "आनन्द भवन" भी वकालत की कमाई पर बनल रहे. आजादी की लड़ाई से जुड़ि गइला की कारण उ पूजनीय आ दर्शनीय हो गईल.
बचपन में गांव में लोग अक्सर बतिआई कि तारीख पर गईल रहली ह, वकील, पेशकार के फीस आ भेंट दे के आ तारीख ले के चलि अइलीं ह. तारीख, फीस, भेंट आ तारीख एकर सिलसिला लगातार चलत रहेला. एतरे जब बहुत दिन बीति जाला त कुछु फाइन ओइन लागेला फेरु बहस आ फैसला. एगो विज्ञापन प्लाईवुड के देखले होखबि सभे कि एके मुकदिमा में सब बुढ़ा जाला.
पचीसन साल से ई हल्ला होला कि कोर्ट में हेतना मुकदिमा बा. बड़का हाकिम, वकील, मुख्तार, आयोग की आगे मुकदमा के ढेर लागल जात बा. तरह तरह के संकट आवत जाता लेकिन हल नइखे निकलत. लागता एहू खातिर अब कौनों विदेशी कम्पनी आई आ ठीका ले ली. जब वकील लोगन के कम्पनी बनि जाता त फैसला खातिर.......
सरकार चाहे त सालि भर में मुकदिमा की हिसाब से जज लोगन के नियुक्ति हो सकेला. एइसन व्य्वस्था हो सकेला कि पांचि सालि की अन्दर सबसे बड़्को कोर्ट से फैसला हो जाउ.
एहि बाति पर सिनेमा वाला हीरो के बाति मन परि गईल ह. पहिले पुलिस आ वकील साहब लोग खूब जोर लगावेला कि जमानत होई आकि ना होई. आखिर जमानत होइये जाला. बाकिर ओकर ना हो पावेला जे बड़का कोर्ट ना जा पावेला. हमरा त ई बुझाला कि जमानत त तहसील पर से ही हो जायेके चाहीं. जइसन धारा ओतने जमानतदार आ ओतने रूपया.
जब हीरो के सजा भईल तबे ई कहा गईल रहित की आगे मुकदिमा करेके होखे त हेतना जमानतदार आ हेतना रूपया जमा क के जमानत ले ल, आ दू महीना की अन्दर जाके बड़का कोर्ट में मुकदिमा कर, आ नाहीं त सजा भुगत. त जेतना हंगामा भईल ऊ ना होईत. इ जरूर भईल की बड़्का वकील लोगन के मोट फीस मिल गईल.
भारत में लोकतंत्र बा बाकिर लोकतंत्र बहाल भईला की बाद भी कोर्ट कचहरी में लोकतंत्र के किरण अबे पहुंचल नईखे. सरकार में बहुत बड़्का बड़का वकील लोग बा. ऊ लोग कबो ना चाहेला कि सबके न्याय मिले. गरीब लोग तारीख पर झूलि के मरि जाई आ अमीर लोग तारीख की सहारे जी जाई. बड़्का वकील के कोठी चमकि जाई. लोकतंत्र के गटई नपा जाई.
फेरू भेट होई.
नमस्कार.