शनिवार, 16 मई 2015

तारीख

तारीख
नमस्कार!
हालचाल ठीक बा आ ठीके चाही. आजु काल्हि कोरट कचहरी आ फैसला के बड़ा चरचा बा. लोग एने ओने आवत जात, कचहरी आ जज लोगनि की बारे में जेतना बतियावेला, लीखे की बेर चुपा जाला. लिखे की पहिले प्रमाण चाही. जवन प्रमाण लउकेला ओके केहु देखल ना चाहेला आ इहो चाहेला कि लोग के कमाई अन्थाप होखे. पहिले शहर में वकील लोगन के कोठी होत रहल . बिना कमाई के कोठी बनी ना. ए देश के एगो महान कोठी "आनन्द भवन" भी वकालत की कमाई पर बनल रहे. आजादी की लड़ाई से जुड़ि गइला की कारण उ पूजनीय आ दर्शनीय हो गईल.

बचपन में गांव में लोग अक्सर बतिआई कि तारीख पर गईल रहली ह, वकील, पेशकार के फीस आ भेंट दे के आ तारीख ले के चलि अइलीं ह. तारीख, फीस, भेंट आ तारीख एकर सिलसिला लगातार चलत रहेला. एतरे जब बहुत दिन बीति जाला त कुछु फाइन ओइन लागेला फेरु बहस आ फैसला. एगो विज्ञापन प्लाईवुड के देखले होखबि सभे कि एके मुकदिमा में सब बुढ़ा जाला.

पचीसन साल से ई हल्ला होला कि कोर्ट में हेतना मुकदिमा बा. बड़का हाकिम, वकील, मुख्तार, आयोग की आगे मुकदमा के ढेर लागल जात बा. तरह तरह के संकट आवत जाता लेकिन हल नइखे निकलत. लागता एहू खातिर अब कौनों विदेशी कम्पनी आई आ ठीका ले ली. जब वकील लोगन के कम्पनी बनि जाता त फैसला खातिर.......

सरकार चाहे त सालि भर में मुकदिमा की हिसाब से जज लोगन के नियुक्ति हो सकेला. एइसन व्य्वस्था हो सकेला कि पांचि सालि की अन्दर सबसे बड़्को कोर्ट से फैसला हो जाउ.

एहि बाति पर सिनेमा वाला हीरो के बाति मन परि गईल ह. पहिले पुलिस आ वकील साहब लोग खूब जोर लगावेला कि जमानत होई आकि ना होई. आखिर जमानत होइये जाला. बाकिर ओकर ना हो पावेला जे बड़का कोर्ट ना जा पावेला. हमरा त ई बुझाला कि जमानत त तहसील पर से ही हो जायेके चाहीं. जइसन धारा ओतने जमानतदार आ ओतने रूपया.

जब हीरो के सजा भईल तबे ई कहा गईल रहित की आगे मुकदिमा करेके होखे त हेतना जमानतदार आ हेतना रूपया जमा क के जमानत ले ल, आ दू महीना की अन्दर जाके बड़का कोर्ट में मुकदिमा कर, आ नाहीं त सजा भुगत. त जेतना हंगामा भईल ऊ ना होईत. इ जरूर भईल की बड़्का वकील लोगन के मोट फीस मिल गईल.

भारत में लोकतंत्र बा बाकिर लोकतंत्र बहाल भईला की बाद भी कोर्ट कचहरी में लोकतंत्र के किरण अबे पहुंचल नईखे. सरकार में बहुत बड़्का बड़का वकील लोग बा. ऊ लोग कबो ना चाहेला कि सबके न्याय मिले. गरीब लोग तारीख पर झूलि के मरि जाई आ अमीर लोग तारीख की सहारे जी जाई. बड़्का वकील के कोठी चमकि जाई. लोकतंत्र के गटई नपा जाई.

फेरू भेट होई.
नमस्कार.

सोमवार, 12 जनवरी 2015

ढाई घरी के सपना

ढाई घरी के सपना
नमस्कार!

हालिचालि ठीक बा, शीतलहर चलता. रजनिति गरम बा. गान्धी जी शौचालय ले सीमित बाने. जाड़ा में घर शौचालय होखे. गरम पानी होखे. इनर होखे,  हीटर होखे.  फेसबुक आ ब्लाग होखे त ना मनोरंजन दूर बा ना व्यंजन. बाकी बिजली आ इन्टरनेट त चहबे करी.

आजु फेसबुक पर दू महारथी कहलनि ह कि अंग्रेजी के देवनागरी लिपि में लिखल जाई. लोग बड़ा खुश भईल हमरो नीक लागल ह.

बाकी दू गो शंका उठल बा एगो बड़हन बा आ एगो छोट बा.

बड़का शंका ई बा कि अबे त देवनागरी लिखे खातिर, गूगल, प्रमुख, मंगल आदि आदि के सहारा लिया ता. त जब अंग्रेजी के देवनागरी में लिखल जाई त ऊहो रोमन में ही लिखाई त रोमन से गर ना छूटी.

जब हमनीका छठवीं में पढ़े लगलीं जा त अंग्रेजी के पढ़ाई शुरु भईल. Rat - रैट- (रैट माने) चूहा. ए तरे. अंग्रेजी बोले के त ऐबे ना करे. ट्रान्सलेशन आ ग्रामर, प्रोज, पोइट्री के अर्थ आ रटुआ एसे. इन्टर ले काम चलि गईल. अगली पढाई अंग्रेजी में शुरु हो गईल. पढ़े लिखे के त आ जा बाकी बोले के अजु ले ना आइल.

ए देश के कुछु लोग जरिये से अंग्रेजी माध्यम से पढ़्ले बा हमरा बुझाता कि ओही लोगन की दिमाग में अंग्रेजी के देवनागरी में लिखे के बति आइल ह. हमनीका त अब्बो देवनागरी की भरोसे ही अंग्रेजी पढ तानी जा.

कुछु दिन से मन में ई विचार आवता कि अंग्रेजी के भाषा की रूप में अलग से सबके पढ़ावल जा. ओके बोले के सिखावल जा बाकी पढ़ाई के माध्यम मातृभाषा ही रहे के चाही.

पुरनका जमाना के लोग अपनी अपनी क्षेत्र में भाषा आ लिपि के विकास कईल. सबमें कुछु कमी बा कुछु विशेषता बा. अब जब पूरा विश्व एगो गांव हो गईल. "वसुधैव कुटुम्बकम" भी अच्छा नारा ह. ज्ञान विज्ञान एतना आगे बा.

त एगो नया भाषा आ नया लिपि के आविष्कार होखे के चाही. तब्बे " वसुधैव कुटुम्बकम" आ "ग्लोबल विलेज" होई. जब सब एके साथे एके भाषा आ लिपि में समान रूप से ज्ञान पाई. 

नमस्कार.
फेरू भेंट होई.