नमस्कार!
का हो काका हालिचालि ठीक बा नू.
ठीके बा हलचल मचल बा कि असो बरखा कम होई.
के जाने कि कि कहां कम होई कहां अधिक. बडका जानकार लोग पूरा देश के मौसम एके मीटर स नापि देता. कमिश्नरी कि हिसाब से मौसम बतावेके चाहीं.
एतना पईसा कहां से आई.
पईसा के कौनो कमी नईखे. सगरी आवते जात में लूटा जाता आ विदेश चलि जाता, फेरु यफडीआई बनि के आ जाता.
आरे नवकी सरकार आ गईल. कंगरेशियन के राज गईल ई कुछु करी आकि सिंहासन के शोभा में अंझुरा के रहि जाइ.
कुछु कहल ना जा सकेला. एहू सरकार में बहुत बहुवाचक लोग बा.
मोदी जी त कहतारे हरि गांव में उद्योग लागी.
गांधी जी भी कहत रहले बाकी नेहरू जी बडका उद्योग के ढेर मौका दिहलें. गांव की विकास मेम सहकारिता आन्दोलन आ सामुदायिक विकास के योजना चलवा दिहले, अधिकारी आ छोट्भैया नेता लोग मिल के सब डुबा दीहल.
त अब नया का होई.
देख का होला बाकी हर गांव में चक्की बा. उ तनि बढिया हो जा आ गांव के सब गेंहू के पीसि के पैकिंग कके बाजार में ले जा त कुछु रोजगार बढि जाई. खपत से अधिका दूध, फल, सब्जी, सब के लघु उद्योग की रूप में बदलल जा सकेला. एकरी खातिर ईहो जरूरी बा सब सामान शुद्ध आ खरा होखे ,चोर बजारी ना होखे.
एकरी खातिर त बडा लिखत पढत करे के परी.
ह अबे त ईहे हालि बा जब एगो पता ठिकाना आ वोटर लिस्ट सही नईखे. कौनो महकमा में जा त समय से काम ना हो सकेला. कब्बो केहू नईखे त कब्बो केहू नईखे. सब मिली त मारे गलतीये गिनावे लागी. जबराना आ फिरौती के जमाना. नजराना आ शुकराना अब नईखे चलत.
का करब जब इस्कुलवे से लुटहाई शुरु बा त कहां ना रही.
सब कहता ऊपर भेजे के बा. ई केतना ऊपर ले जाला.
का जाने कहां ले जाला ई नेते लोग कहि सकेला.
त का होई.
ऊपर के लोग मन से चाही त सब होई. ना त खाली राज करे की लालसा राखी लोग त कुछु ना होई
बूढ लोग बिना सवारथ के काम करेला त लइकन के मन बढेला आ सठिया के सवारथ में पडि जाला त बंटाधार हो जाला.
देखीं का होता.
अच्छा नमस्कार!
फेरू भेंट होई.
का हो काका हालिचालि ठीक बा नू.
ठीके बा हलचल मचल बा कि असो बरखा कम होई.
के जाने कि कि कहां कम होई कहां अधिक. बडका जानकार लोग पूरा देश के मौसम एके मीटर स नापि देता. कमिश्नरी कि हिसाब से मौसम बतावेके चाहीं.
एतना पईसा कहां से आई.
पईसा के कौनो कमी नईखे. सगरी आवते जात में लूटा जाता आ विदेश चलि जाता, फेरु यफडीआई बनि के आ जाता.
आरे नवकी सरकार आ गईल. कंगरेशियन के राज गईल ई कुछु करी आकि सिंहासन के शोभा में अंझुरा के रहि जाइ.
कुछु कहल ना जा सकेला. एहू सरकार में बहुत बहुवाचक लोग बा.
मोदी जी त कहतारे हरि गांव में उद्योग लागी.
गांधी जी भी कहत रहले बाकी नेहरू जी बडका उद्योग के ढेर मौका दिहलें. गांव की विकास मेम सहकारिता आन्दोलन आ सामुदायिक विकास के योजना चलवा दिहले, अधिकारी आ छोट्भैया नेता लोग मिल के सब डुबा दीहल.
त अब नया का होई.
देख का होला बाकी हर गांव में चक्की बा. उ तनि बढिया हो जा आ गांव के सब गेंहू के पीसि के पैकिंग कके बाजार में ले जा त कुछु रोजगार बढि जाई. खपत से अधिका दूध, फल, सब्जी, सब के लघु उद्योग की रूप में बदलल जा सकेला. एकरी खातिर ईहो जरूरी बा सब सामान शुद्ध आ खरा होखे ,चोर बजारी ना होखे.
एकरी खातिर त बडा लिखत पढत करे के परी.
ह अबे त ईहे हालि बा जब एगो पता ठिकाना आ वोटर लिस्ट सही नईखे. कौनो महकमा में जा त समय से काम ना हो सकेला. कब्बो केहू नईखे त कब्बो केहू नईखे. सब मिली त मारे गलतीये गिनावे लागी. जबराना आ फिरौती के जमाना. नजराना आ शुकराना अब नईखे चलत.
का करब जब इस्कुलवे से लुटहाई शुरु बा त कहां ना रही.
सब कहता ऊपर भेजे के बा. ई केतना ऊपर ले जाला.
का जाने कहां ले जाला ई नेते लोग कहि सकेला.
त का होई.
ऊपर के लोग मन से चाही त सब होई. ना त खाली राज करे की लालसा राखी लोग त कुछु ना होई
बूढ लोग बिना सवारथ के काम करेला त लइकन के मन बढेला आ सठिया के सवारथ में पडि जाला त बंटाधार हो जाला.
देखीं का होता.
अच्छा नमस्कार!
फेरू भेंट होई.