सोमवार, 14 अक्टूबर 2013

नमस्कार!
हालिचालि ठीक बा. असो (२०१३) दशहरा की दीने चित्रा मंडराइल बा. कल्हिये से बरसता. फेसबुक पर तरह-तरह के पोस्ट देखत देखत सजांव के रामलीला मन में उतरे लागल ह. देश में सबसे अधिक सरकार के पइसा खर्च करे वाला इनवरसीटी (ज.ने.वि.) के लोग सब सोचेला बाकी ई त ना कहेला की देश की हर नौजवान के एइसने इनवरसीटी चाहीं.
सजांव के रामलीला तिजि या चौथि से शुरु होखे. प्राइमरी पाठशाला सजांव की तीन ओर खरिहान में कोदो साठी आ घनकोदई के दवरी आ रामलीला आ ओही साथे चना केराव के बावग सब साथे साथे चले. माटी की दीवाल आ खपडा  के स्कूल के क्लास बारी में पेंड की नीचे. जाडा में फील्ड में चले. प्रार्थना "वह शक्ति हमें दो दयानिधे" स्वदेशी नारा की बाद  फील्ड आ कमरा के सफाई सब लइका लोग कूडा बीन के करे. झाडू झंझट खतम. रामलीला मैदान के सफाई भी एही तरे हो जा. लपटौना घास उखारि के कूडा बीन ल सफाई हो गईल. माटी के दू गो चबूतरा बना के दू गो पताका लागे. राम के लाल पताका रावण के काला पताका.

रामलीला के  सब पात्र गांव के लोग रहे. फुलवारी की दिन से भीड बढे लागे. सबसे अधिक भीड  धनुषग्य, विवाह आ दशरथ मरण मे होखे. धनुषजग्गि के दू गो संवाद रावण बालि संवाद आ परसुराम लक्ष्मण संवाद मजेदार होखे.

रामलीला की मेला में (1960) सबसे अधिक सर्व सुलभ मिठाई रहे पट्टी . लकठा, खझुली, बतासा भी मिले. कोदो, धनकोदई देके मनपसन्द मिठाई मिल जा.

रावण जरवला की समय एगो ढेला फेंकला के चलन रहे. लोग की ढेला चलवला में एक दू लोग के कपार फूटे. झगडा के शुरुआत.

तब ना  सिनेमा रहे. ना टीवी. बरात के नाच आ मंडली की बाद रामलीला अभिनय देखला आ मनोरंजन के साधन रहे.
हमनों के रहरि के तीर धनुष बनि जा. जब समय मिले तब रामलीला शुरू. अबो ईहे बुझाला कि ओइसन रमलीला कहीं ना होला. एक बेर राम नगर के रामलीला भी देखले  बानी.

फेरू भेंट होई,
नमस्कार!