हालिचालि त सब ठीके बा . बाकी जहिया से सुनले बानी कि दिल्ली विश्व्विद्यालय में चारि सालि के बीए आठ सेमेस्टर में पूरा होई तहिये से भोजपुरी के कहावत मने में घूमता. माननीय प्रणव जी जहिया से राष्ट्रपति भईल बानी उच्चशिक्षा पर चिंतित बानी .( इहे चिन्ता उहांका वित्तमन्त्री रहते हुये कईले रहिती त ई हालि ना भईल रहित.) उहां का उच्चशिक्षा की गुणवत्ता खातिर चिन्तित बानी एसे दिल्ली के कुलपति जी हार्वर्ड आ स्टेन्फोर्ड इनवरसिटी की नकल पर पाठ्यक्रम बना के लागू करावतानी. जेकरी लगे पावर रहेला ओकर बाति जल्दी केहू काटेला नाही. त सब कुछु पास ओस हो गईल . अब लईका लोग पढि के निकलते नोबुल प्राइज मारि देई लोग.
किताब, मास्टर, कलास, हास्टल आ औरु कुल पढावे खातिर जरूरी सामान ,लाइब्रेरी, लैबोरेटरी आ मेज कुर्सी के कौनो जरूरत नईखे. लईका लोग दिल्ली में नाव लिखवा के मुखर्जी नगर आ ढाकागांव में बनाई खाई आ सेमेस्टर में तड से बाजी मारि ले जाई. अब ई बूझि ली कि सब कलक्टर आ एस्पी दिल्ली के होइहे. जौनिगा इन्डिया शाइनिंग हो गईल ओहींगा भारत निर्माण हो जाई. आपरेशन ब्लैकबोर्ड के नाव त सुनलि ही होखबि सभे, आरे उहे राजीव गान्धी वाला जौना समय रूपया में दस पैसा गांव में पहुंचे. त ऊ आपरेशन कच्चा निकलल त सर्व शिक्षा अभियान चलल ओकरि खातिर ना त कमरा बा ना मास्टर. तले झट देना आरटीई आ गईल.
एकर माने ई भईल की जे अपनी लईका के ना पढाई ओही के दोष. आन्ही मान्ही दोष. एहू में पचीस परसेन्ट रिजरवेशन बा. आ हालि ईबा कि दिल्ली में गार्जीयन लोग के नाव लिखववला में नानी याद आ जाता. जे तनिको हुशियार बा उ एके लईका की बाद नसबन्दी करा लेता. आ देहात के हालि जाने के होखे त सरकारी रिपोट पढि लेई. कुल मिलाके हम ई कहल चाहत बानी कि पहिले प्राथमिक शिक्षा के गुणवत्ता, माध्यमिक शिक्षा के गुणवत्ता बढा ली सभे तब ओकरिये साथे उच्चशिक्षा के भी मानक ठीक क लेई सभे.
खाली लन्दन आ अमेरिका मति देखी रूस, चीन आ जापान के भी देखेके चाही. एकरी आधार पर अपनी देश के आपन नीति बनाई. जईसन सन्सद चली ओहींगा स्कूल चली. रूपया देके जे मास्टर, प्रोफेसर, प्रिंसिपल आ कुलपति बनी ऊ का पढाई. इन्तिहान में नकल, सिफारिस आ पईसा पर नम्बर, चमचागीरि में टपौवल. इहे भारत के गुणवत्ता हो गईल बा. त पहिले संसद के गुण्वत्ता सुधरो. यूजीसी के पर्सेन्टेज बन्द होखे. वस्तुनिष्ठ चयन होखे त देखी का से का हो जाता.
त पहिले आपन गोड बरियार कईला के जरूरति बा फेरू कूदी सबसे ऊंचे कूदीं.
फरू भेंट होई..
नमस्कार!