नमस्कार!
काल्हि जब भागलपुर की मसान घाट पर राजा दशरथ के आगि देबेवाला की खातिर आगि मंगाए लागल त परमेसर काका की जिनिगी के सब दृश्य आखी में नाचे लागल. परमेसर काका गाँव की रामलीला में डोम बनें. उनुकी जईसन डोम के अभिनय कहू दूसर ना क पावे दूसर केहू डोम बनलो ना चाहे. परमेसर काका उ सब काम करके तैयार हो जा जेकरी खातिर कहू तैयार ना होखे.
परमेसर काका कोआपरेटिव बैंक में चपरासी की पद पर रहले. हमरी घर आ बाबू जी में उनुकर जान बसे. हम जब सलेमपुर में बाबूजी की साथे छव में पढ़े गईलीं त उहे भोजन बनावें . भोजन बनावेके उनुका ना आवे बाक़ी जवान सामने काम बा ओके करेके बा त उ करे के तैयार रहें.
गाँव में हम जबले फगुआ देखलीं टेबल इहे लागे की पूरा गाँव से उ अकेले फगुआ खेलें . उनुकी फगुआ के अलग तरीका रहे ऊ सबकी मूंड़ी में एक पुड़ियाँ गुलाबी रंग धीरे से डाली दें फेरु दूसरे से कही दें की उनुकी कपारे में पानी डालि दे.
जब कौनों समारोह होखे त सबसे अधिक हल्ला करेवाला सबके काम पर लगावेवाला आ सबसे अधिक काम करेवाला उहे रहें.
पूरा गाँव के सहयोगी परमेसर काका तीन दिसंबर २०१२ के शरीर त्याग के मुक्ति पा गईलें।
काल्हि जब भागलपुर की मसान घाट पर राजा दशरथ के आगि देबेवाला की खातिर आगि मंगाए लागल त परमेसर काका की जिनिगी के सब दृश्य आखी में नाचे लागल. परमेसर काका गाँव की रामलीला में डोम बनें. उनुकी जईसन डोम के अभिनय कहू दूसर ना क पावे दूसर केहू डोम बनलो ना चाहे. परमेसर काका उ सब काम करके तैयार हो जा जेकरी खातिर कहू तैयार ना होखे.
परमेसर काका कोआपरेटिव बैंक में चपरासी की पद पर रहले. हमरी घर आ बाबू जी में उनुकर जान बसे. हम जब सलेमपुर में बाबूजी की साथे छव में पढ़े गईलीं त उहे भोजन बनावें . भोजन बनावेके उनुका ना आवे बाक़ी जवान सामने काम बा ओके करेके बा त उ करे के तैयार रहें.
गाँव में हम जबले फगुआ देखलीं टेबल इहे लागे की पूरा गाँव से उ अकेले फगुआ खेलें . उनुकी फगुआ के अलग तरीका रहे ऊ सबकी मूंड़ी में एक पुड़ियाँ गुलाबी रंग धीरे से डाली दें फेरु दूसरे से कही दें की उनुकी कपारे में पानी डालि दे.
जब कौनों समारोह होखे त सबसे अधिक हल्ला करेवाला सबके काम पर लगावेवाला आ सबसे अधिक काम करेवाला उहे रहें.
पूरा गाँव के सहयोगी परमेसर काका तीन दिसंबर २०१२ के शरीर त्याग के मुक्ति पा गईलें।