मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

परमेसर काका

नमस्कार!

काल्हि जब भागलपुर की मसान घाट पर राजा दशरथ के आगि देबेवाला की खातिर आगि मंगाए लागल त परमेसर काका की जिनिगी के सब दृश्य आखी में नाचे लागल. परमेसर काका गाँव की रामलीला में डोम बनें. उनुकी जईसन डोम के अभिनय कहू दूसर ना क पावे दूसर केहू डोम बनलो ना चाहे. परमेसर काका उ सब काम करके तैयार हो जा जेकरी खातिर कहू तैयार ना होखे.

परमेसर काका कोआपरेटिव बैंक में चपरासी की पद पर रहले. हमरी घर आ बाबू जी में उनुकर जान बसे. हम जब सलेमपुर में बाबूजी की साथे छव में पढ़े गईलीं त उहे भोजन बनावें . भोजन बनावेके उनुका  ना आवे बाक़ी  जवान सामने काम बा ओके करेके बा त उ करे के तैयार रहें.

गाँव में हम जबले फगुआ देखलीं टेबल इहे लागे की पूरा गाँव से उ अकेले फगुआ खेलें . उनुकी फगुआ के अलग तरीका रहे ऊ सबकी मूंड़ी में एक पुड़ियाँ गुलाबी रंग धीरे से डाली दें फेरु दूसरे से कही दें की उनुकी कपारे में पानी डालि दे.

जब कौनों समारोह होखे त सबसे अधिक हल्ला करेवाला सबके काम पर लगावेवाला आ सबसे अधिक काम करेवाला उहे रहें.

पूरा गाँव के सहयोगी परमेसर काका तीन दिसंबर २०१२ के शरीर त्याग के मुक्ति पा गईलें।