शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

चवन्नी आ पेट्रोल

नमस्कार!
हालिचालि ठीक बानू!

बड़का गाँव माने ग्लोबल विलेज में चवन्नी हेरा गईली . अब भोजपुरी में एगो गाना बने के चाही चवन्नी हेरा गईली दईया रे. हेरईली त एईसन हेरईली की अब मिलबे ना करीहें. हेराईल त बहुत दीन से रहली ह बाक़ी कहू का कौनो फिकिर ना रहल ह. आज  की मनारेगा की ज़माना में चवन्नी के केहू का बूझत बा. बाकिर सरकार एकाएक इनकी हेरईला से कुछु फिकिर में आ गईली ह त सोचलसी  ह अब एके दाखिल दफ्तर  क देबे के चाही. त डुगडुगी बाजि गईल ह की पहली जुलाई से चवन्नी यानी की पचीस पैसा के सिक्का बंद. चवन्नी गायब. ई सूनिके तमाम पुरनका लोग का चवन्नी के जलवा मन परे लागल ह. आ चवन्नी के चर्चा शुरू हो गईल ह.

हमारा बुझाता की चवन्नी शब्द भोजपुरी के ह एसे चवन्नी की बारे में भोजपुरिये में लिखीं. बहुत दीन से ई समझ में ना आवत रहल ह की जून सिक्का प्रचलन में नईखे ओकरी हिसाब से कौनो सामान के दाम काहे राखल जाला. विशेष रूप से पेट्रोलियम पदार्थन  के दाम जईसे तैंतालीस रूपया सताईस पईसा लीटर डीजल होखे त एक लीटर कीनेके होखे तब्बो झंझट, पांच लीटर कीनेके होखे तब्बो झंझट आ दस लीटर कीनेके होखे तब्बो झंझट. जब ई चर्चा हम कीनी त एगो संघतिया कहले की कब्बू कुछु कीनले बाड़ आरे पट्रोल पम्प पर अब रूपायि वाली मशीन लागल बाड़ी स. सीधे ज रूपया के चाही त रूपया के लेल. त हम पूछालीन की गैस के दाम काहे ३४३रू ४७ पईसा बा त कहले की गैस कब्बो छपल दाम पर मीलेला का की चिंता में बाड़. हम चुप हो गईलीं.

अब रउरा सब से ई फ़रियाद बा की बताई सभे की एक ,दू, तीन,पांच,छः  दस आ पचीस के सिक्का धीरे धीरे स्वर्ग सिधारी गईल लोग त ई बात पेट्रोलियम मंत्रालय के के समझाई की दाम सीधे रूपया में बढावल करो लोग. लें दें में सुविधा होई.

जाते जाते-- सरकार सचहूँ जराले पर नमक छिरकत बा. अब्बे लोगन के दाम विरोधी आंदोलन खातमों ना भईल तले फेनू पेट्रोल आ डीजल के दाम बढ़ी गईल.

फेरू भेट होई.