नमस्कार!
हालचाल ठीक बा न !
एतनी घरी देश भ्रष्टाचार जिंदाबाद ,मुर्दाबाद के नारा लगावता. अण्णा हजारे आ उनकर साथी लोग ई मानता की तत्काल अगर एगो बढ़िया लोकपाल बिल बनी जाई त देश की सत्ता पर काबिज लोगन की भ्रष्टाचार पर कुछु अंकुश लागी जाई. बाकिर तमाम लोग ई बूझता की लोकपाल बिल आवते भ्रष्टाचार ख़तम हो जाई. कांग्रेसी भाई लोग खुले आम सोनिया राहुल के वफादारी के बात करेला आ ओ लोगन का कांग्रेस संगठन से कौनो मतलब ना ह. ओ लोगन का लागता की अगिला प्रधान मंत्री राहुल जी होइहें आ उनुकी ऊपर कौनो अंकुश न होखेके चाही त प्रधानमंत्री पद लोकपाल की सीमा से बाहर होखेके चाही त एकरी खातिर कुछु पैताराबाजी करेके चाही त कुछू औरी पद लोकपाल की सीमा से बाहर होजा त ठीके बा. वैसे उ लोग मन से त ईहे चाहता की लोकपाल बनबे ना करे. एकरी खातिर पैंतरा बाजी चलता. वकील लोग चहबे करेला की मुकदमा चलते रहे. बार कौसिल मुकदमा जल्दी निपति जा एकर केतना प्रयास करेले जग जाहिर बा. अण्णा भाई अपनी आत्म विश्वास से सोलह अगस्त के समाया देले बाने. जनता के साथ बनल रही त काम बनी जाई.
बाबा रामदेव योगासन आ योग क्रिया बतावे के प्रचार शुरू कईलें. लोग उनुसे प्रभावित भईल आ उनुके योग आ आयुर्वेद के दोकानि चली गईल. कपालभाती आ अनुलोम विलोम की साथे साथ तमाम चीज पर उनुके भाषण लगातार चलेला. लोग तमाम तरह की बीमारी से मुक्त भईल जे विशवास की साथे उनुके बाति मानता. बहुतन के कौनो फ़ायदा नईखे. आयुर्वेदिक दवाई चूरन चटनी आता तेल भी साथे साथे बिकाता. अलग से प्रचार ना करके पड़ेला त प्रचार के खर्चा बचि जाला. बाबा रामदेव की कमाई एतनी घरी चर्चा में बा, बाक़ी बाबा लोग मौजि में बा मंत्री, अधिकारी के आशीर्वाद आ दर्शन प्रसाद देत रहता. बाबा रामदेव भी सरकार मंत्री अधिकारी आ पत्रकार लोगन के आशीर्वाद आ प्रसाद देत रहेलें आ ओ लोगन के कृपा पावत रहेलें. बाकी इ बेरी बाबा धरा गईल बाने. बाबा काला धन पर भिड़ी गईले कुछु राजनीति के भी मन बनल त भारत स्वाभिमान यात्रा कईलें, काला धन की बारे में जागरूकता फईलला साथे साथे दवा आ उपभोक्ता सामान के प्रचार भईल कुछु चन्दा जुटल आ लोग दू घंटा के मुफ्त योग प्रशिक्षण पावल. बाबा की कारण भ्रष्टाचार की विरोध में वातावरण बाने लागल. कुछु वदेश इमं भी ईसन हो गईल ह की बाबा की पक्ष में बाति चली गईल. टेल अण्णा हजारे भाई लोकपाल लेके आ गईलें. बाबा का बहुत ना रुचल. बाबा रामलीला मैदान में कालाधन की वापसी के लेके आमरण अनशन के तैयारी शुरू का दीहलन. ई भारतीय जनतंत्र के बहुत बड़हन कमजोरी बा की सरकार के विरोध करे खातिर कौनो जगह नईखे. जब जनतंत्र में विरोध करके अधिकार बा त ओहू खातिर जगह चाहि जहां दू चारि लाख लोग जुटी सके. अगर संसद बा त जनता खातिर विरोध स्थल भी होखे के चाही. जहा खाली पंजीकरण कराके लोग आपन धरना प्रदर्शन अनशन क सके. अब देखीं रामलीला मैदान में जगह लीहल गईल अनशन करके बाकी कहल गईल योग सिखावल जाई. अगर अनसन करेके जगह दे दीहल जाईत त ई झूठ ना बोले के परत बाकिर भारत में सच ना चली. जब रामलीला मैदान की ओ तम्मू में एक लाख लोग बैहत सकत रहे त ओतना लोग के अनुमति देबे के चाहत रहे. लेकिन भारत में ईहे चलावल जाला इहाँ जनतंत्र बा बाक़ी जनता के अधिकार नईखे खाली विधायिका के विशेषाधिकार बा ऊ चाहे जौन मन करे का सके. त बाबा रामदेव उहे कईले. जब सरकार का मन कईलस तब धावा बोल दिहलस गृह मंत्री, सिब्बल, जनार्दन, दिग्गी राजा आ दिल्ली पुलिस जेकरा जौन मन कईल तों बयान दीहलस. चाहे जौन घटित होखे मानल उहे जाई जौन प्रमाणित हो जाई.
बाबा की अभियान से सरकार चिंतित हो गईल आ उनुका के मना भी लिहलस . बाकिर बीच में कुछु हो गईल. कांग्रेसी लोगन का लागल की सचाहू में भ्रष्टाचार पर अंकुश लागी जाई त गड़बड़ा जाई त कुछु ईसन कईल जा की फेरु जनता कही भ्रष्टाचार मिटावे खातिर जुटी ना पावे. आ हो गईल कारवाई. बाबा लोग के समझौता के पूरा बाति ना बतवले रहलें त भागे के परल पुलिस झूठा मुकदमा बनवला के माहिर ह. ई लोग त मुआ देला लाठी डंडा के कहे .बाबा आ उनुकर ख़ास सहयोगी लोग भागी गईल जनता जे भागल ऊ बचल जे फंसी गईल ऊ पिटा गईल. ल मिटाव भ्रष्टाचार . पुलिस वाला जब मारत रहल होईन्हें त सोचत रहल होईहें की सबसे भ्रष्ट त हमने के कहेला लोग त आजु मौक़ा मिलल बा बदला ले लेबेके.
बाबा जनता से समझौता छिपाके, फेरू भागीके आपन फजीहत करालीहलें अब एके उपाई बा की साल भर फलाहार वरत आ मौन व्रत रहिके आत्म शुद्धि क लें. देखिलें की सरकार का करातीया. अपनी समझौता के श्वेत पत्र जारी करें आ सांच बोले के सीखे जेसे बयान प्र बयान ना देबे के परे.
जनता काला धन की मुद्दा पर फेरु ठगा गईल. मीडिया कार्पोरेट आ सर्कार के बाति कम सुनले. ऊहू जनता के बे पेनी के लोटे माने ले. जौनी ओर चाहेले तौनी ओर ढरका लेले. विज्ञापन जेतना चाहे ओतना नंगई देखादेले. जेके चाहे ओके हीरू आजेके चाहे ओके जीरो बना देले. भ्रष्टाचार मेटावला से ढेर जरूरी पार्टी के ही बा भईया लोग फेरू देतात रही काला धन आके ऊजर होई त सबके भागी खुली तले घूस देत रहीं आ काली कमाई पर खींझाल करीं.