नमस्कार!
हालचाल ठीक बा न
हमारा बुझाता की जंतर मंतर नाम केहू भोजपुरिये वाला धईले होई. काहे से की संस्कृत की यन्त्र मंत्र के भोजपुरी जंतर मंतर ह. http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0_%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0,_%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%८०
ऊपर जौन लिंक बा तौना से नई दिल्ली की जंतर मंतर की बारे में जानकारी मिलि जाई. बहुते लोग त जानते बा.ई जंतर मंतर की बगल में एगो छोटी चुकी मैदान बा जौना में ठीक से फुटबालो ना खेलल जा सकेला, उहे जगह भारत की एक अरब बीस करोड़ जनता के जन तंत्र के रक्षा करके जगह जनतांत्रिक सरकार द्वारा दीहल गईल बा. केतनो लोग जुटी जा त ओके कहू सैकड़ा में कहि सकेला. भारत की जनतंत्र के एगो महान विसंगति ईहो बा की जनता के आपन बाति कहे खातिर कौनो जगह नईखे. त सड़क आ रेल के पटरी सबसे अच्छा जगह बनि गईल बा. यन्त्र माने मशीन भी होला. मशीन ऊ होला जौना से कमे ताकत में ढेर काम हो जाला. जंतर ओझा सोखा पंडित लोग भी बनावेला जवना में भोजपत्र चाहे कागज़ पर कौनो चित्र या मंत्र लिखि के पूजा वूजा कके जंतर वाली खोल में राखी के हाथे चाहे गला में पहिरि लीहल जाला. मंतर कुछु शब्दन के श्रृखला ह जौना के बार बार पढ़ला से कुछु ख़ास काम सिद्ध हो जाला. त दिल्ली की जंतर मंतर पर जन लोकपाल बिल नाम के जंतर लेके अन्ना हजारे के साथी लोग भ्रष्टाचार हटाओ मंतर पढ़े लागल.
मंतर इंटर नेट से भी बटाए लागल लोग पढ़े लागल. उपवास से मंतर जल्दी काम करे लागेला. अन्ना अनशन कईले लोगन से कहलें तमाम लोग अनसन करे लागल नारात्र के व्रत चालत रहे एके साथे दुनु काम होखे लागल. टीवी आ नेट दूनू दनादन चले लागल. आ सरकार सकता में आ गईल. सिब्बल अईले एक त वकील दूसरे नेता तीसरे मंत्री कुछु एने ओने कील चहलें बाक़ी लहल नाहीं आ सरकार अन्ना के बाति मानी गईल. लोकपाल विधेयक बनावे खातिर एगो समिति के गठन के राजपत्र जारी हो गईल.इ समिति में पांची गो अन्ना की और के आ पाँची गो मंत्री लोग बा.
केहू का ई आशा ना रहे की सरकाए इतना जल्दी बाति मानि ली. लेकिन जब सरकार मानि गईल त सिब्बलो साहब सकपका गईलें. अंट शंट बयान दीहलें सुनी के हँसी आईल. बाक़ी उहो इतना बड़का वकील हौअनी कुछु वकालत वाला पेंच होई. बाक़ी ईसाफ झलकता की सिब्बल साहब के मन साफ नईखे उ अइसन बिल बानईह की अपराधी बची जा स. बिल त ईसन चाही की अपराधी बचे नापाव्रे आ निरपराधी धराये ना पावे.
अब आजु काल्हि अन्ना हजारे उनुकर टोली सबकी निशाना पर बा. जेतना तरह के विचार हो सकेला ओतना तरह से प्रसंशा आ निंदा हो रहल बा. साम्यवाद, समाजवाद, पूंजीवाद, उदारवाद,अम्बेडकरवाद, मंडलवाद, कमंडलवाद, सब खतरा में बा सबसे ढेर खतरा में समाजवादी लोग के लोकतंत्र बा. गांधीवादी लोग खुश बा बाक़ी बहुते कांग्रेसी बहुत दुखी बाने. नेता लोग के सिट्टी पिट्टी गुम बा. लागता की भारत के जनता अब जागी जाई. त ए आन्दोलन के जेतना कमी हो सकेला उ बतावल जाता.
ए आन्दोलन से ई साफ़ हो गईल बा की भारत के लोग अब भ्रष्टाचार से लदल चाहता. आ नेता लोग भ्रष्टाचार के बचावल चाहता. अब चाहे जनता जीते चाहे भ्रष्टाचार. इतना त साफ़ बा की भ्रष्टाचार के समूल नाश नाहो सकेला कबो ना हो सकेला बाकि अल्पी करण हो सकेला. केतना कम होई ई शासन की ईमानदारी पर निर्भर बा. भारत के बेईमानी या भ्रष्टाचार दुनिया में प्रसिद्द बा ई अध्यात्मिक देश ह आ भ्रष्टाचार के ई हाल.
नवका जंतर मंतर से शायद भ्रष्टाचार के अल्पीकरण के शुरुआत होजा यही आशा की साथ.
फेरु भेट होई.