गुजरली बाति
नमस्कार!
हालिचालि ठीक बानू
आज घर से निकलि के सड़क पर पहुँचली ह त एगो बूढ़ आदमी के जात देखि के बाबा के यादि आ गईल ह. ऊ आदमी एकदम नब्बे अंश पर झुकल रहल ह. बाबा जब चलें त ओहींगा झुक के चलें. ऊ एगो लाठी (छड़ी ) लेके चलें. कुछु दूर चलिके सीधा हो जांसु. ऊ जब चलें त तेज चले हमारो के कहें हाली हाली चल. भोजन के बहु त शौकीन रहलें तरह तरह के व्यंजन बनावे के ढंग जाने. मछली मांस बनावे के भी तरीका जानत रहलें. लेकिन हमारी होस में ऊ ई कुल छोड़ी देले रहलें. ब्राह्मन लोग बुढ़ापा में मांस मछली छोड़ी देला. मान्यता बा कि एसे भगवान् खुश रहिहें.
बाबा सिंहासन बतीसी के बतीसो कथा जानत रहलें. बाक़ी हमरा अब याद नईखे. गीत भजन के भी शौकीन रहलें. आज की समय में आ तब्बो की समय में जुना के दुनियादारी कहल जाला ओसे ऊ बहुत दूर रहलें. पिटा अपनी संतान के एक समान सुखी देखल चाहेला. परिस्थिति के खेल या भाग्य के खेल चाहे करम के खेल जौन काम करत होखे , एक पिता के सब संतान एक समान सुखी ना हो पावेला. बाबा के ई चिंता बहित सतावे.
बाबा एकबेर बहुत बीमार पड़ले. बाबूजी छुट्टी लेके घरे आगईल रहलें. ऊ केहू के चिन्हल उन्हाल बंद क देले रहलें. सांझी के हम उनके गीता के श्लोक प्धिके सुनाईं. लोग कहे एग्रहवां अध्याय सुनाव. ओही बीच में ऊ एक दिन लगने बड़ बडाए. घर में धान के बोरा के छली लागल बा एइसन धान बा कि एक मुठ्ठी चाउर में घर भर के भोजन हो जाई. पक्का दुमहला घर बनी गईल बा. गाँव के लोग सुबह शाम हालचाल ले. धीरे धीरे बाबा ठीक हो गईले. १९६७ में बाबा के सरग्बास हो गईल.
बाद में चलि के घर भी दुमहला हो गईल आ एतना धान होखे लागल की धान बिकाए लागल. ई ओ समय के बाति ह जब हमारी क्षेत्र में नगीना बाईस धान बोअईल शुरू भईल रहे . बाद में आई आर एट नाव के धान बोआए लागल औउक्षेत्र भी धन के भण्डार हो गईल. एगो पद्मा नाम के धान बोअईल रहे जौन बहुत छोट पौधा वाला रहे बाक़ी दाना बड़े बड़े होखे.
आज छबीस जनवरी के दीने बचपन के कई गो पन्ना खुलत जाता आ ओही की साथे भारत की विकास के कहानी भी चलता. कईन में सफ़ेद कागज पर वाटर कलर की रंग से बनावल झंडा आ नारा की की साथे गाँव के फेरी. विकास त भईल बा लेकिन भ्रष्टाचार ओके कमतर कीले बा. ऊपर के पईसा नीचे ईला में रस्तवे में हेरा जाता . नीचे से पईसा चलता त उहो बिचवे में हेरा जाता.
हमरी साथे प्राइमरी में हमरी हरवाहे के लईको पढ़े, . हजामों के लईका पढ़े , मोलवी साहब के लईकाभी पढ़े. तेली ,गोड़ सब केहू साथे पढ़े एके पाली पर बईठे. कौनो ना शेडूल रहे ना ओबीसी.
नमस्कार!
हालिचालि ठीक बानू
आज घर से निकलि के सड़क पर पहुँचली ह त एगो बूढ़ आदमी के जात देखि के बाबा के यादि आ गईल ह. ऊ आदमी एकदम नब्बे अंश पर झुकल रहल ह. बाबा जब चलें त ओहींगा झुक के चलें. ऊ एगो लाठी (छड़ी ) लेके चलें. कुछु दूर चलिके सीधा हो जांसु. ऊ जब चलें त तेज चले हमारो के कहें हाली हाली चल. भोजन के बहु त शौकीन रहलें तरह तरह के व्यंजन बनावे के ढंग जाने. मछली मांस बनावे के भी तरीका जानत रहलें. लेकिन हमारी होस में ऊ ई कुल छोड़ी देले रहलें. ब्राह्मन लोग बुढ़ापा में मांस मछली छोड़ी देला. मान्यता बा कि एसे भगवान् खुश रहिहें.
बाबा सिंहासन बतीसी के बतीसो कथा जानत रहलें. बाक़ी हमरा अब याद नईखे. गीत भजन के भी शौकीन रहलें. आज की समय में आ तब्बो की समय में जुना के दुनियादारी कहल जाला ओसे ऊ बहुत दूर रहलें. पिटा अपनी संतान के एक समान सुखी देखल चाहेला. परिस्थिति के खेल या भाग्य के खेल चाहे करम के खेल जौन काम करत होखे , एक पिता के सब संतान एक समान सुखी ना हो पावेला. बाबा के ई चिंता बहित सतावे.
बाबा एकबेर बहुत बीमार पड़ले. बाबूजी छुट्टी लेके घरे आगईल रहलें. ऊ केहू के चिन्हल उन्हाल बंद क देले रहलें. सांझी के हम उनके गीता के श्लोक प्धिके सुनाईं. लोग कहे एग्रहवां अध्याय सुनाव. ओही बीच में ऊ एक दिन लगने बड़ बडाए. घर में धान के बोरा के छली लागल बा एइसन धान बा कि एक मुठ्ठी चाउर में घर भर के भोजन हो जाई. पक्का दुमहला घर बनी गईल बा. गाँव के लोग सुबह शाम हालचाल ले. धीरे धीरे बाबा ठीक हो गईले. १९६७ में बाबा के सरग्बास हो गईल.
बाद में चलि के घर भी दुमहला हो गईल आ एतना धान होखे लागल की धान बिकाए लागल. ई ओ समय के बाति ह जब हमारी क्षेत्र में नगीना बाईस धान बोअईल शुरू भईल रहे . बाद में आई आर एट नाव के धान बोआए लागल औउक्षेत्र भी धन के भण्डार हो गईल. एगो पद्मा नाम के धान बोअईल रहे जौन बहुत छोट पौधा वाला रहे बाक़ी दाना बड़े बड़े होखे.
आज छबीस जनवरी के दीने बचपन के कई गो पन्ना खुलत जाता आ ओही की साथे भारत की विकास के कहानी भी चलता. कईन में सफ़ेद कागज पर वाटर कलर की रंग से बनावल झंडा आ नारा की की साथे गाँव के फेरी. विकास त भईल बा लेकिन भ्रष्टाचार ओके कमतर कीले बा. ऊपर के पईसा नीचे ईला में रस्तवे में हेरा जाता . नीचे से पईसा चलता त उहो बिचवे में हेरा जाता.
हमरी साथे प्राइमरी में हमरी हरवाहे के लईको पढ़े, . हजामों के लईका पढ़े , मोलवी साहब के लईकाभी पढ़े. तेली ,गोड़ सब केहू साथे पढ़े एके पाली पर बईठे. कौनो ना शेडूल रहे ना ओबीसी.