नमस्कार !
हालिचाली ठीक बा नू !
छठी के तिहवार निमने निमने बीती गईल. चैनल से लेके अखबार ले छठी की समाचार से पटी गईल रहल ह. बाजार, ट्रेन, बस, सड़क सब जाम हो गईल रहल ह. केहू कहता की छठ ग्लोबल हो गईल बा त केहू कहता की लोकल हो गईल बा. जौन चीज एक जगह से चारू ओर धूमधाम से फ़ैल जा ओके का कहल जाई.
कांच बांस के बंहगी खोजते रही गईली कहीं देखे के ना मीलल .जबसे छठी देख तानी तबसे आजु ले कब्बो ना देखलीं . हाँ ई जरूर देखली कि नया नया दौउरी चाहे उ बॉस के होखे चाहे मूंज के होखे. मूड़ी ( सिर ) पर रखिके घाट पर पहुंचा दिहल जात बा. एतनी घरी मोटर साईकिल के ज़माना बा ओही पर बैठी के कान्हे पर दौरी भी चली जात बा ऊखियो चली जाता आ ब्रतधारियो चली जा तारी.
त लोकगीतन में अब ईहू कुल के जिक्र होखे के चाहीं तबे नू नवको ज़माना के जानकारी होई. अब कार वाला गाना ना होई त काम कैसे चली. अब त कार से घाट पर जाता लोग.
नदी, पोखरा, तालाब, गड़ही, तुरंता घाट आ कठौता घाट सब चलता . मन चंगा त कठौती में गंगा.
रविवार, 14 नवंबर 2010
शनिवार, 13 नवंबर 2010
शुक्रवार, 1 जनवरी 2010
पावलागी!
आजु पहली जनवरी ह। बड़ा धूमधाम बा। चारु और बड़ा हल्ला बा। आजु से नवका साल शुरू होता। पुरनका साल किकुरले चली जाला आ नवको सलिया किकुरले आवेला। जबसे भारत के पढुआ लोग महानगरवासी से (ग्लोबल) गाँव के वासी हो गईल बा तबसे नवका साल बहुत जोर से आवे लागल बा। इ नवका गाँव के भाषा भुत अजब गजब हो गईल बा। अब ईहे जानिलीं की ई भोजपुरी रउरी लगे अंग्रेजी की रोमन लिपि पर चढ़िके पहुचत बा.
काल्हि हमारी मन में में आईल की आपन कुछु बाति भोजपुरी में कहीं। जवनी भाषा में बोलल शुरू कईले रहलीं ओही में अब लीखले के साहस करतानी। एकरी कुछ दिन पहिले भी तनी कोशिश कईले रहनी। लेकिन ई ब्लाग्वार्ता हमारी खातिर नया विधा बाटे।
त हम बात करत रहलीं हई नवका साल के। पूरा विश्व में बहुत साल बा। ई बाटी कुछ अजबे लागता। हमार मतलब ई बा विश्व में काल गणना के कईगो पध्दति बा भोजपुरी छेत्र में विक्रम संवत, शक संवत आ ईसवी संवत के चलन बा एकरी साथे साथे राष्ट्रीय कलेंडर भी बा। एमे सबसे भारी ईसवी स्वत ही बा। कोर्ट कचहरी के तारीख एहीसे पड़ेला। बैंक के काम काज एहीसे चलता। एक तरह से ई छा गईल बा। ग्लोबल गाँव के भाषा अंग्रेजी साल ईसवी सन हो गईल बा। त ई एगो नया तिहवार बनी गईल बा। पुरनिया लोग ईदेखी के बड़ा कुड़बुड़ाता। हिन्दू आ मुस्लिम धर्मगुरु लोग बड़ा खिसियाला। हालांकी असो रविशंकर गुरु कहले ह (अमर उजाला) इ तिहवार के हँसी खुसी से मनावेके चाहीं।
नवका पीढी के चाहे जेकरा जौन मन करे तौन कहे ऊ ए दीन के बड़ा मन से मनावता। उद्योग जगत एके बहुत दीन से भजावता। डायरी, कलेंडर, झोरा आ गिफ्ट बांटि के आपन इम्प्रेसन बनावता। घुमाफिरा के ए तेहवारे के उद्योगमित्रवत ( कार्पोरेट फ्रेंडली ) कहला में कवनो दोष नईखे। औरू नाही त मोबाईल कम्पनियन की खातिर ई वरदान हो गईल बा। २५ दिसंबर से शुरू होके ७ जनवरी ले फोन से बाटी कईल आसान नईखे। खरबपति लोग की खातिर ई बरदान हो गईल बा। मध्यम वर्ग कुछु मजा काटि के तनाव से मुक्त हो जाता ताकि अपनी अपनी दफ्तर में तनी मन लगाके काम करी। छोटका लोग भकुआ के ताकते रहि जाता।
नवका सालि की चर्चा में ग्रीटिंग कार्ड के चर्चा ना होई त बूझी की सब बेकारे बा। चवनिया छाप से लेके रउरा जेतना खर्च क सकेली ओतना दाम के कार्ड बजारे में बिकाता। लोगन के रीझावे खातिर एसे बढ़िया कौनो साधन नईखे। दिसंबर चढ़ते कार्ड के छटाई शुरू हो जाला आ जनवरी में कुछु दीने ले चलेला। अब नवका ज़माना के ईमेल सबसे अगुआता। एसेमेस हो सकेला तनी औरू आगे होखे। ईकार्ड आ एसेमेस दुनू बड़ा तेज दऊरताने।
ई बतकही त ओही की लगे पहुची जे कम्पूटर से देखी। त असो की साल हमहू एकरी माध्यम से सब लोगनि के नवका साल के शुभकामना देत बानी। सभके संकाल्प पूरा होखे सब सुह्की रहे। सबकर मंगल हो.
आजु पहली जनवरी ह। बड़ा धूमधाम बा। चारु और बड़ा हल्ला बा। आजु से नवका साल शुरू होता। पुरनका साल किकुरले चली जाला आ नवको सलिया किकुरले आवेला। जबसे भारत के पढुआ लोग महानगरवासी से (ग्लोबल) गाँव के वासी हो गईल बा तबसे नवका साल बहुत जोर से आवे लागल बा। इ नवका गाँव के भाषा भुत अजब गजब हो गईल बा। अब ईहे जानिलीं की ई भोजपुरी रउरी लगे अंग्रेजी की रोमन लिपि पर चढ़िके पहुचत बा.
काल्हि हमारी मन में में आईल की आपन कुछु बाति भोजपुरी में कहीं। जवनी भाषा में बोलल शुरू कईले रहलीं ओही में अब लीखले के साहस करतानी। एकरी कुछ दिन पहिले भी तनी कोशिश कईले रहनी। लेकिन ई ब्लाग्वार्ता हमारी खातिर नया विधा बाटे।
त हम बात करत रहलीं हई नवका साल के। पूरा विश्व में बहुत साल बा। ई बाटी कुछ अजबे लागता। हमार मतलब ई बा विश्व में काल गणना के कईगो पध्दति बा भोजपुरी छेत्र में विक्रम संवत, शक संवत आ ईसवी संवत के चलन बा एकरी साथे साथे राष्ट्रीय कलेंडर भी बा। एमे सबसे भारी ईसवी स्वत ही बा। कोर्ट कचहरी के तारीख एहीसे पड़ेला। बैंक के काम काज एहीसे चलता। एक तरह से ई छा गईल बा। ग्लोबल गाँव के भाषा अंग्रेजी साल ईसवी सन हो गईल बा। त ई एगो नया तिहवार बनी गईल बा। पुरनिया लोग ईदेखी के बड़ा कुड़बुड़ाता। हिन्दू आ मुस्लिम धर्मगुरु लोग बड़ा खिसियाला। हालांकी असो रविशंकर गुरु कहले ह (अमर उजाला) इ तिहवार के हँसी खुसी से मनावेके चाहीं।
नवका पीढी के चाहे जेकरा जौन मन करे तौन कहे ऊ ए दीन के बड़ा मन से मनावता। उद्योग जगत एके बहुत दीन से भजावता। डायरी, कलेंडर, झोरा आ गिफ्ट बांटि के आपन इम्प्रेसन बनावता। घुमाफिरा के ए तेहवारे के उद्योगमित्रवत ( कार्पोरेट फ्रेंडली ) कहला में कवनो दोष नईखे। औरू नाही त मोबाईल कम्पनियन की खातिर ई वरदान हो गईल बा। २५ दिसंबर से शुरू होके ७ जनवरी ले फोन से बाटी कईल आसान नईखे। खरबपति लोग की खातिर ई बरदान हो गईल बा। मध्यम वर्ग कुछु मजा काटि के तनाव से मुक्त हो जाता ताकि अपनी अपनी दफ्तर में तनी मन लगाके काम करी। छोटका लोग भकुआ के ताकते रहि जाता।
नवका सालि की चर्चा में ग्रीटिंग कार्ड के चर्चा ना होई त बूझी की सब बेकारे बा। चवनिया छाप से लेके रउरा जेतना खर्च क सकेली ओतना दाम के कार्ड बजारे में बिकाता। लोगन के रीझावे खातिर एसे बढ़िया कौनो साधन नईखे। दिसंबर चढ़ते कार्ड के छटाई शुरू हो जाला आ जनवरी में कुछु दीने ले चलेला। अब नवका ज़माना के ईमेल सबसे अगुआता। एसेमेस हो सकेला तनी औरू आगे होखे। ईकार्ड आ एसेमेस दुनू बड़ा तेज दऊरताने।
ई बतकही त ओही की लगे पहुची जे कम्पूटर से देखी। त असो की साल हमहू एकरी माध्यम से सब लोगनि के नवका साल के शुभकामना देत बानी। सभके संकाल्प पूरा होखे सब सुह्की रहे। सबकर मंगल हो.
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